राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए पांच मंजिला इमारत हादसे में मलबे के नीचे दबकर अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। इस हादसे के तुरंत बाद आसपास बने दूसरे पीजी और किराए के मकानों की हकीकत जानने के लिए मौके पर मौजूद टीम ने इलाके की पड़ताल शुरू की। हादसे वाली जगह के ठीक सामने बनी एक पांच मंजिला इमारत में जब टीम पहुंची तो वहां भी हैरान करने वाले हालात सामने आए। यह इमारत भी किराए पर चलती है और यहां बने अकेले कमरे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को रहने के लिए दिए जाते हैं।
एक ही सीढ़ी, एक ही रास्ता, आग के नियमों की खुली अनदेखी
इस इमारत में घुसते ही सबसे पहले उसकी बनावट पर सवाल खड़ा होता है। ऊपर की मंजिलों तक जाने के लिए बनी सीढ़ियां बेहद संकरी हैं और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का रास्ता भी एक ही है, यानी न कोई अलग एंट्री है और न कोई अलग एग्जिट। आग या किसी हादसे की सूरत में लोगों को बाहर निकलने का दूसरा कोई विकल्प नहीं मिलेगा। यह सीधे तौर पर फायर सेफ्टी के तय नियमों का उल्लंघन है, जो हर बहुमंजिला इमारत में अलग निकासी रास्ते की मांग करते हैं।
17 हजार किराए के कमरे में सुविधा के नाम पर सिर्फ टंकी और स्लैब
इसी इमारत में रह रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र शारांश विश्वकर्मा के कमरे में जब टीम पहुंची तो पता चला कि यह डबल शेयरिंग वाला कमरा है, जिसमें दो छात्र साथ रहते हैं। हर बेड का किराया 8000 रुपये है, यानी दोनों बेड मिलाकर पूरे कमरे का किराया करीब 17000 रुपये बैठता है। इतने भारी किराए के बावजूद कमरे के भीतर सुविधा के नाम पर सिर्फ एक पानी की टंकी लगी है और एक स्लैब बिछाकर वहीं कोने में छोटा किचन बना दिया गया है, जहां आरओ भी लगाया गया है। शारांश ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में इसी तरीके से बाकी किराएदार भी रह रहे हैं, यानी उनका कमरा कोई अपवाद नहीं बल्कि पूरी इमारत की आम तस्वीर है।
हादसे के बाद अब यहां रहने से डरने लगे छात्र
पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस पीजी में सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखे। ऊपर जाने वाली सीढ़ियां इतनी छोटी और तंग हैं कि अगर भगदड़ जैसी नौबत आए या कोई हादसा हो जाए, तो दो से तीन लोग भी एक साथ उनसे नहीं गुजर सकते। सत्य निकेतन की इस घटना के बाद शारांश के मन में भी अब यहां रहने को लेकर डर बैठ गया है। उन्होंने कहा कि इलाका छोड़कर कहीं और शिफ्ट होने का खयाल जरूर आता है, लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा कि आखिर जाएं तो जाएं कहां। कॉलेज के नजदीक होने की वजह से यह जगह उनके लिए सुविधाजनक बनी हुई है, इसलिए फिलहाल वह असमंजस में हैं।





















