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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG में मिलीं सुरक्षा में बड़ी खामियां, किराया 17 हजार फिर भी सुविधा नदारददिल्ली
7 सित॰ 2026, 3:12 pm (48 मिनट पहले)· 2

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG में मिलीं सुरक्षा में बड़ी खामियां, किराया 17 हजार फिर भी सुविधा नदारद

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद आसपास के PG की पड़ताल में सुरक्षा के गंभीर इंतजाम नदारद मिले, जहां 17 हजार रुपये किराए वाले कमरे में भी सिर्फ एक सीढ़ी और एक ही रास्ता है।

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए पांच मंजिला इमारत हादसे में मलबे के नीचे दबकर अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। इस हादसे के तुरंत बाद आसपास बने दूसरे पीजी और किराए के मकानों की हकीकत जानने के लिए मौके पर मौजूद टीम ने इलाके की पड़ताल शुरू की। हादसे वाली जगह के ठीक सामने बनी एक पांच मंजिला इमारत में जब टीम पहुंची तो वहां भी हैरान करने वाले हालात सामने आए। यह इमारत भी किराए पर चलती है और यहां बने अकेले कमरे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को रहने के लिए दिए जाते हैं।

एक ही सीढ़ी, एक ही रास्ता, आग के नियमों की खुली अनदेखी

इस इमारत में घुसते ही सबसे पहले उसकी बनावट पर सवाल खड़ा होता है। ऊपर की मंजिलों तक जाने के लिए बनी सीढ़ियां बेहद संकरी हैं और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का रास्ता भी एक ही है, यानी न कोई अलग एंट्री है और न कोई अलग एग्जिट। आग या किसी हादसे की सूरत में लोगों को बाहर निकलने का दूसरा कोई विकल्प नहीं मिलेगा। यह सीधे तौर पर फायर सेफ्टी के तय नियमों का उल्लंघन है, जो हर बहुमंजिला इमारत में अलग निकासी रास्ते की मांग करते हैं।

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17 हजार किराए के कमरे में सुविधा के नाम पर सिर्फ टंकी और स्लैब

इसी इमारत में रह रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र शारांश विश्वकर्मा के कमरे में जब टीम पहुंची तो पता चला कि यह डबल शेयरिंग वाला कमरा है, जिसमें दो छात्र साथ रहते हैं। हर बेड का किराया 8000 रुपये है, यानी दोनों बेड मिलाकर पूरे कमरे का किराया करीब 17000 रुपये बैठता है। इतने भारी किराए के बावजूद कमरे के भीतर सुविधा के नाम पर सिर्फ एक पानी की टंकी लगी है और एक स्लैब बिछाकर वहीं कोने में छोटा किचन बना दिया गया है, जहां आरओ भी लगाया गया है। शारांश ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में इसी तरीके से बाकी किराएदार भी रह रहे हैं, यानी उनका कमरा कोई अपवाद नहीं बल्कि पूरी इमारत की आम तस्वीर है।

हादसे के बाद अब यहां रहने से डरने लगे छात्र

पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस पीजी में सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखे। ऊपर जाने वाली सीढ़ियां इतनी छोटी और तंग हैं कि अगर भगदड़ जैसी नौबत आए या कोई हादसा हो जाए, तो दो से तीन लोग भी एक साथ उनसे नहीं गुजर सकते। सत्य निकेतन की इस घटना के बाद शारांश के मन में भी अब यहां रहने को लेकर डर बैठ गया है। उन्होंने कहा कि इलाका छोड़कर कहीं और शिफ्ट होने का खयाल जरूर आता है, लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा कि आखिर जाएं तो जाएं कहां। कॉलेज के नजदीक होने की वजह से यह जगह उनके लिए सुविधाजनक बनी हुई है, इसलिए फिलहाल वह असमंजस में हैं।

सवाल-जवाब

सत्य निकेतन इमारत हादसे में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
मलबे में दबकर अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
पड़ताल में किस इमारत की जांच की गई?
हादसे वाली जगह के ठीक सामने की एक पांच मंजिला किराए की इमारत की, जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र रहते हैं।
कमरे का किराया कितना था?
एक बेड का किराया 8000 रुपये था, यानी दो बेड वाले डबल शेयरिंग कमरे का किराया करीब 17000 रुपये बैठता था।
इमारत में सुरक्षा को लेकर क्या बड़ी खामी मिली?
सीढ़ियां बेहद संकरी थीं और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने का सिर्फ एक ही एंट्री-एग्जिट रास्ता था।
छात्र शारांश विश्वकर्मा ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद अब उन्हें यहां रहने से डर लगता है, लेकिन कॉलेज पास होने के कारण वे मूव करने का फैसला नहीं कर पा रहे।
कमरे में क्या सुविधाएं दी गई थीं?
सिर्फ एक पानी की टंकी और एक स्लैब लगाकर बनाया गया छोटा किचन था, साथ में एक आरओ भी लगा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·25 मिनट पहले

सत्य निकेतन की यह दुर्घटना मात्र एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि देश के शैक्षणिक हबों में पनपते अनियंत्रित अवैध निर्माण और प्रशासन की गहरी लापरवाही का परिणाम है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख परिसरों के आसपास भारी-भरकम किराया वसूलने वाले ये पीजी बिना किसी आपातकालीन निकास और अग्नि सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं। यदि समय रहते दिल्ली नगर निगम और दमकल विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो छात्र बहुल इन इलाकों में कोई भी बड़ी त्रासदी कभी भी दोहराई जा सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 मिनट पहले

सत्य निकेतन की इस दुर्घटना के बाद हमारी जाँच टीम को जिस तरह की लापरवाही उजागर हुई है, वह किसी बड़े कानूनी उल्लंघन से कम नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी में विद्यार्थियों की जान जोखिम में डालकर चल रहे इन अवैध ढांचों पर भारतीय न्याय संहिता और स्थानीय भवन उपनियमों के तहत गैर इरादतन हत्या जैसे गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए। यदि दिल्ली नगर निगम और अग्निशमन सेवा अब भी केवल कागजी नोटिस तक सीमित रही, तो यह प्रशासनिक मिलीभगत मानी जाएगी। समय आ गया है कि अदालतें स्वतः संज्ञान लें और ऐसे परिसरों को सील करने के साथ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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