शनिवार, 19 सितंबर का दिन भारतीय युवाओं और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों, दोनों के लिए ही अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो बेहद खास कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे। एक ओर जहां देश के 51 हजार युवाओं को उनके करियर की नई शुरुआत के लिए सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र मिलने जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए नई दिल्ली में दुनिया भर के दिग्गज मंथन करेंगे। यह दोनों ही आयोजन देश के भविष्य को संवारने और पृथ्वी को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
20वां रोजगार मेला: देश के 45 स्थानों पर एक साथ बांटे जाएंगे नियुक्ति पत्र
देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 20वें रोजगार मेले में शामिल होंगे। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री देश भर के 51,000 से भी अधिक नवनियुक्त युवाओं को उनके नियुक्ति पत्र सौंपेंगे और डिजिटल माध्यम से उन्हें संबोधित भी करेंगे। इस विशाल भर्ती अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए देश भर में कुल 45 अलग-अलग स्थानों पर भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
इस रोजगार मेले के माध्यम से चयनित युवाओं को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और महत्वपूर्ण विभागों में नियुक्तियां दी गई हैं। इनमें भारतीय रेलवे, गृह मंत्रालय (MHA), स्वास्थ्य मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, राजस्व विभाग और वित्तीय सेवाएं जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सम्मानजनक रोजगार देकर देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस 20वें आयोजन की सफलता के साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा इस अभियान के तहत अब तक कुल 12.75 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपने का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया जाएगा।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर महामंथन: विज्ञान भवन में जुटेगा वैश्विक मंच
रोजगार मेले के कार्यक्रम से पहले, शनिवार सुबह लगभग 10:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। इस द्वि-दिवसीय सम्मेलन का शीर्षक 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' रखा गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ओर से आयोजित किए जा रहे इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 19 और 20 सितंबर को किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई रणनीतियां तैयार करना है।
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैश्विक प्रतिनिधित्व है। इस महत्वपूर्ण चर्चा में भाग लेने के लिए दुनिया भर के 17 अलग-अलग देशों के मुख्य न्यायाधीश और न्यायिक प्रतिनिधि विशेष रूप से भारत आ रहे हैं। उनके साथ ही भारत के सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट और जिला स्तर के कोर्ट (डिस्ट्रिक्ट कोर्ट) के सम्मानित न्यायाधीश भी इस सत्र का हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा देश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और जाने-माने पर्यावरणविद भी इस महामंथन में शामिल होकर अपने विचार साझा करेंगे।
न्यायपालिका और सरकारों की जुगलबंदी: पर्यावरण कानूनों को जमीन पर उतारने की तैयारी
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन संपूर्ण मानवता के सामने एक गंभीर संकट बनकर उभरा है। इस सम्मेलन के दौरान पर्यावरण से जुड़ी तमाम जटिल चुनौतियों, पारिस्थितिकी संरक्षण और टिकाऊ विकास पर अत्यंत गहराई से विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य ध्येय अलग-अलग देशों के नीति निर्माताओं और न्यायपालिका के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि विभिन्न देशों की सरकारें अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा कर सकें। इस साझीदार प्रयास से न केवल पर्यावरण कानूनों को सख्त बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि उन नीतियों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।



















