मेघालय सरकार ने असम सरकार से उन सीमावर्ती गांवों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और जनगणना से जुड़ी गतिविधियों को रोकने की अपील की है, जहां मेघालय प्रशासन पहले ही अपनी प्रक्रिया पूरी कर चुका है। गृह (पुलिस) विभाग के प्रभारी और मेघालय के उप मुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों से समानांतर सर्वेक्षण गतिविधियों की खबरें मिलने के बाद राज्य सरकार ने असम के अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक समन्वय
उप मुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने बताया कि लांगपीह और मुकरोह सहित विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में असम की ओर से जनगणना और मतदाता सूची संशोधन जैसी गतिविधियां चलाए जाने की रिपोर्ट मिली थी। इसके तुरंत बाद मेघालय सरकार ने असम प्रशासन के साथ संपर्क साधा। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य सरकारों के बीच बातचीत के माध्यम से इन चिंताओं को दूर कर लिया गया है।
तिनसोंग ने बताया कि उन्होंने मेघालय के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसी किसी भी शिकायत के सामने आने पर तुरंत असम के मुख्य सचिव के साथ संपर्क करें और इस मुद्दे को उठाएं। मेघालय प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जिन गांवों में उनका आधिकारिक काम पहले ही पूरा हो चुका है, वहां असम की तरफ से दोबारा कोई समानांतर प्रक्रिया न चलाई जाए। उन्होंने असम के अधिकारियों के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की गलतफहमी होने पर असम की तरफ से भी पूरा सहयोग मिलता है। दोनों पक्ष आपसी समझ और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से इन मामलों को सुलझाने में लगे हैं।
मुकरोह गांव में स्थानीय निवासियों का विरोध
सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे इस विवाद के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया था। गत 14 सितंबर को असम-मेघालय सीमा पर स्थित विवादित गांव मुकरोह के स्थानीय निवासियों ने असम के अधिकारियों को गांव में आकर गृह-गणना करने से रोक दिया था। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि यह क्षेत्र पूरी तरह से मेघालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
स्थानीय खासी समुदाय के निवासियों ने असम के अधिकारियों की मौजूदगी का कड़ा विरोध किया और जनगणना टीम के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग करने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने दावा किया कि मुकरोह गांव असम राज्य या कार्बी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं आता है। इस घटना के बाद से दोनों राज्यों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर समन्वय बनाने की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।




















