दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बेसमेंट सहित पांच मंजिला एक इमारत अचानक भरभराकर गिर पड़ी, जिसमें अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। हादसे के बाद रातभर राहत और बचाव अभियान चलता रहा और मलबे से अब तक 11 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। जांच में सामने आया है कि करीब 50 साल पुरानी इस जर्जर इमारत को किराए की कमाई का जरिया बनाकर बिना पूरी सुरक्षा जांचे रहने के लिए खोल दिया गया था।
अस्पताल में भर्ती मरीजों की ताजा स्थिति
सत्य निकेतन हादसे में घायल कुल 10 मरीजों को जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, एम्स लाया गया था। एम्स नई दिल्ली की पीआईसी मीडिया सेल की डॉ. रिमा दादा की ओर से 6 सितंबर को जारी अपडेट के मुताबिक इनमें से चार मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके थे। गंभीर हालत में लाया गया एक और मरीज इलाज के दौरान नहीं बच सका, जिससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में मरने वालों की संख्या और बढ़ गई। तीन मरीजों का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से एक मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसकी अंग यानी लिम्ब की सर्जरी करनी पड़ी। वहीं मामूली चोटों वाले एक मरीज को कुछ घंटे निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
रातभर चला रेस्क्यू, मौत का आंकड़ा छह पहुंचा
दिल्ली पुलिस के अनुसार रातभर चले बचाव कार्य के दौरान मलबे से एक और शख्स को बाहर निकाला गया, मगर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई। अब तक कुल 11 लोगों को मलबे के नीचे से निकाला जा चुका है, जिनमें जिंदा बचाए गए और शव, दोनों शामिल हैं। घटनास्थल पर पुलिस और बचाव दल लगातार तलाशी में जुटे हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि मलबे के नीचे और कोई नहीं दबा है। इसके साथ ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए भी पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।
कैमरे में कैद हुआ दर्दनाक मंजर
इमारत के ठीक सामने बने एक मंदिर में लगे कैमरे ने पूरा हादसा कैद कर लिया। फुटेज में एक बुजुर्ग व्यक्ति छाते के नीचे बैठे नजर आ रहे हैं, तभी अचानक पूरी इमारत भरभराकर जमीन पर आ गिरती है। कुछ ही पलों में मलबे और धूल का गुबार पूरी गली को अपनी चपेट में ले लेता है, जिससे आसपास खड़े लोग हादसे को होता देख दहशत में इधर-उधर भागने लगते हैं। यह फुटेज हादसे की भयावहता और उसमें हुई अचानक तबाही को साफ तौर पर दिखाता है।
मुख्यमंत्री के आदेश पर मालिक के खिलाफ एफआईआर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का खुद जायजा लेने के बाद शुरुआती जांच के आधार पर इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने और इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय यानी सीएमओ ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इतनी गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उन पर कानून के सबसे कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस कमिश्नर के मुताबिक साउथ कैंपस थाने में कथित मालिक हरि राम और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। यह इमारत असल में एक पीजी के तौर पर चल रही थी और आरोप है कि ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे रेनोवेशन के काम की वजह से पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया। आरोपियों तक पहुंचने और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग-अलग कई टीमें बना दी हैं।
50 साल पुरानी जर्जर इमारत, कमाई की जल्दबाजी में हुई लापरवाही
जांच में सामने आया है कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और लंबे समय से बेहद जर्जर हालत में खड़ी थी। दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब होने के चलते इस पूरे इलाके में पीजी हॉस्टलों की भरमार है, और यही वजह है कि इस बदहाल इमारत को भी किराए की कमाई का जरिया बना दिया गया। आरोप है कि इमारत के मालिक हरि राम बंसल ने महीनों तक यहां तोड़फोड़ और नया निर्माण कराया, बिना यह सुनिश्चित किए कि ढांचा इतना बदलाव झेल पाएगा या नहीं। अगस्त महीने में ही, निर्माण कार्य पूरा हुए बगैर, छात्रों समेत कई किरायेदारों को इस इमारत में रहने के लिए भेज दिया गया। हादसे के वक्त ठीक बेसमेंट में मजदूर काम में जुटे हुए थे, जहां रेनोवेशन का काम चल रहा था। मलबे से बचाए गए छह लोगों में दो मजदूर भी शामिल थे, जिनमें से एक की बाद में मौत हो गई।





















