घर बनवाते समय इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि कोई भी इमारत अचानक क्यों जमींदोज हो जाती है। हालांकि भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के समय होने वाला नुकसान एक अलग विषय है, लेकिन बारिश या अन्य सामान्य कारणों से भवन का ढह जाना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री और गलत डिजाइन की ओर इशारा करता है। इस तरह के हादसों की सबसे बड़ी आशंका तब पैदा होती है, जब निर्माण की नींव को पर्याप्त मजबूती नहीं दी जाती है। यदि इमारत की जमीन ही ठोस नहीं होगी, तो उस पर खड़ा ढांचा कभी सुरक्षित नहीं रह सकता, इसलिए नींव के निर्माण में उच्च कोटि की सामग्री का उपयोग किया जाना अनिवार्य है।
मिट्टी की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग सलाह
रियल सेक्टर के विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी भूखंड पर निर्माण शुरू करने से पहले वहां की मिट्टी की गुणवत्ता की बारीकी से जांच करानी चाहिए। यदि मिट्टी का प्रकार सही नहीं है, तो आपकी नींव कभी भी मजबूत नहीं बन पाएगी। इस चरण में किसी भी तरह की कंजूसी नहीं करनी चाहिए और किसी विशेषज्ञ से यह प्रमाणित कराना चाहिए कि वह जमीन अपेक्षित भार सहने में सक्षम है या नहीं। इसके साथ ही, भवन का नक्शा और ढांचा भी तकनीकी रूप से उन्नत होना चाहिए, जिसके लिए किसी पेशेवर इंजीनियर की मदद लेना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है। निर्माण कार्य में हमेशा बेहतरीन गुणवत्ता वाले सामान का ही इस्तेमाल होना चाहिए।
ऊंची इमारतों के लिए खास सावधानियां
यदि आप किसी बहुमंजिला या ऊंची इमारत का निर्माण करवा रहे हैं, तो दो बातों को हमेशा अपने जेहन में रखना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पहली बात यह है कि नींव डलवाते समय ही किसी इंजीनियर से यह आकलन करवा लेना चाहिए कि उस जमीन की धारण क्षमता के आधार पर अधिकतम कितनी मंजिलें बनाई जा सकती हैं। यदि आप तय क्षमता से अधिक मंजिलें खड़ी कर देते हैं, तो उसके ढहने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। इसके अतिरिक्त, यदि आपकी नींव में पहले से सीलन मौजूद है या वहां पानी जमा हो रहा है, तो उसका पुख्ता समाधान किए बिना आगे का निर्माण कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, अन्यथा भवन के गिरने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है.
मजबूत नींव और बेसमेंट का महत्व
अब बात करते हैं उन पांच सबसे अहम बातों की जो मकान निर्माण के दौरान अनिवार्य रूप से ध्यान में रखी जानी चाहिए। सूची में सबसे पहला स्थान नींव का आता है, क्योंकि आपकी नींव जितनी अधिक मजबूत होगी, उस पर तैयार इमारत उतनी ही टिकाऊ होगी। भूकंप के झटकों के दौरान अमूमन वही मकान धराशायी होते हैं, जिनकी नींव शुरुआती चरण में ही कमजोर तैयार की जाती है। इसे बनाते समय मजबूत कंक्रीट के मिश्रण और सही इंजीनियरिंग डिजाइन का प्रयोग करें। जैसा कि पहले भी स्पष्ट किया गया है कि मिट्टी का परीक्षण करवाएं और काम शुरू करने से पहले इंजीनियर से परामर्श जरूर लें। दिल्ली में जो हादसा हुआ है, वहां बेसमेंट का निर्माण कार्य चल रहा था। यदि आप भी बेसमेंट बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो उसके लिए सही ईंटों का चयन करना बेहद जरूरी है। निर्माण विशेषज्ञों का मानना है कि नींव और बेसमेंट के हिस्से को अत्यधिक मजबूत बनाने के लिए झामा या लाल ईंट का उपयोग किया जाना चाहिए, जिसे कुछ क्षेत्रों में प्रथम श्रेणी की ईंट भी कहा जाता है। इस प्रकार की उच्च गुणवत्ता वाली ईंटें जमीन की नमी को दीवारों तक पहुंचने से रोकती हैं और ऊपर खड़े होने वाले पूरे ढांचे को एक ठोस आधार प्रदान करती हैं।
डिजाइन, आधुनिक तकनीक और तराई की प्रक्रिया
एक बार जब नींव और बेसमेंट का काम पूरी मजबूती के साथ पूरा हो जाता है, तो अगला सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी डिजाइन का होता है। भवन का नक्शा हमेशा किसी अनुभवी इंजीनियर से तैयार करवाना चाहिए। इसके अलावा, निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री जैसे स्टील और अन्य जरूरी घटकों की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की होनी चाहिए। दीवारों और छतों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेना फायदेमंद साबित होता है, जिससे इमारत की स्थिरता बढ़ती है और भविष्य में किसी भी प्रकार के नुकसान का खतरा न्यूनतम हो जाता है। निर्माण सामग्री जितनी बेहतरीन होगी, मकान का टिकाऊपन उतना ही अधिक लंबा होगा। इसके अलावा, मकान बनवाने की प्रक्रिया में सबसे अहम कार्य उसकी तराई करना यानी उस पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना है। यदि आप एक मजबूत और दीर्घकालिक इमारत चाहते हैं, तो निर्माण के दौरान और उसके पूरा होने के बाद भी लगातार पानी का छिड़काव जारी रखना चाहिए। विशेष तौर पर बीम, छतों और कॉलम पर कम से कम 10 से 15 दिनों तक लगातार पानी डालना आवश्यक होता है। निर्माण कार्य के दौरान दीवारों और अन्य हिस्सों पर जितना अधिक पानी डाला जाता है, कंक्रीट उतनी ही मजबूती के साथ अपनी पकड़ बनाता है और ढांचा मजबूत होता है। बेहतर परिणाम के लिए बरसात के मौसम में निर्माण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए ताकि नमी का नियंत्रण बेहतर ढंग से हो सके।
जलभराव और सीलन से बचाव के उपाय
मकान के निर्माण कार्य के पश्चात सबसे अहम सावधानी यह बरतनी होती है कि उसके आसपास किसी भी स्थिति में जलभराव की समस्या उत्पन्न न होने पाए। आपकी इमारत के इर्द-गिर्द जितना अधिक पानी जमा होगा, नींव और अन्य दीवारों में सीलन आने की समस्या उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। इससे आपका नया मकान तैयार होने के बाद भी अंदर से कमजोर हो सकता है। यह सुनिश्चित करें कि आसपास जलभराव की स्थिति बिल्कुल न बने। इसके अतिरिक्त, भवन का निर्माण करवाते समय कंक्रीट और अन्य सामग्रियों में सीलन रोकने वाले उपयुक्त केमिकल का मिश्रण अवश्य करवाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में नमी दीवारों को नुकसान न पहुंचा सके।


















