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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी और वीएचपी ने साधा निशानादिल्ली
19 सित॰ 2026, 7:11 pm (30 मिनट पहले)· 0

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी और वीएचपी ने साधा निशाना

नई दिल्ली में एक स्मृति व्याख्यान के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को देश के लिए बड़ा खतरा बताया, जिस पर बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने तीखा पलटवार किया है.

नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक स्मृति कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक वक्तव्य ने देश की राजनीति में नई तकरार पैदा कर दी है. 18 सितंबर को आयोजित तीसरे एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के मंच से बोलते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक ऐतिहासिक वक्तव्य को रेखांकित किया. अंसारी ने कहा कि देश के सामने वास्तविक चुनौती वामपंथ अथवा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है. उनके इस भाषण के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसमें सत्ताधारी दल के प्रमुख नेताओं ने अंसारी की मंशा और दृष्टिकोण पर कड़े प्रश्न खड़े किए हैं.

एजी नूरानी की पुस्तक और नेहरू के वक्तव्य का संदर्भ

अपने संबोधन के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति ने जाने-माने संविधान विशेषज्ञ, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक एजी नूरानी के बौद्धिक योगदान को याद किया. उन्होंने साल 2019 में प्रकाशित नूरानी की चर्चित पुस्तक 'द आरएसएस: अ मेनेस टू इंडिया' का उल्लेख करते हुए इसे लेखक की संभवतः आखिरी प्रमुख रचना करार दिया. अंसारी ने इस किताब की प्रस्तावना में दर्ज एक प्रसंग के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बात को सामने रखा.

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हामिद अंसारी ने बताया कि नेहरू ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक अहम बैठक के दौरान भारत के आंतरिक खतरों का विश्लेषण करते हुए साफ कहा था कि देश के लिए असली संकट वामपंथ नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता की ओर से पेश आने वाला खतरा है. उन्होंने इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर देश की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए.

नागरिक राष्ट्रवाद बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर गहरी चिंता

पूर्व उपराष्ट्रपति का व्याख्यान केवल पूर्व प्रधानमंत्री के पुराने संदर्भों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर भी विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने भारत में नागरिक राष्ट्रवाद के पारंपरिक ढांचे से हटकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की तरफ बढ़ रहे रुझानों को गंभीर चिंता का विषय बताया. अंसारी ने कहा कि हाल के समय में ऐसी कार्यप्रणालियां और तौर-तरीके सामने आए हैं जो स्थापित नागरिक राष्ट्रवाद के बुनियादी सिद्धांतों को सीधी चुनौती देते हैं.

उन्होंने विश्लेषण करते हुए कहा कि चुनावी विजय और संख्यात्मक बहुमत को एक धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक सत्ता पर पूरी तरह एकाधिकार जमाना है. इस तरह की प्रवृत्तियों के तहत नागरिकों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर बांटने का प्रयास होता है, जिससे समाज में असहिष्णुता बढ़ती है और अन्य समुदायों के भीतर दूरी तथा असुरक्षा की भावना पैदा होती है. अंसारी ने हालिया घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए जोर दिया कि देश के ताने-बाने को बचाने के लिए इन प्रवृत्तियों का कानूनी और राजनीतिक धरातल पर कड़ा मुकाबला किया जाना बेहद जरूरी है.

किरेन रिजिजू और बीजेपी नेताओं का तीखा पलटवार

हामिद अंसारी की इस टिप्पणी के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनके खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, “यही सबसे बड़ी समस्या है. वे कट्टरपंथियों, धार्मिक उन्मादियों, चरमपंथियों और अलगाववादियों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलेंगे.” रिजिजू ने साफ किया कि चुनिंदा मुद्दों पर बोलना और अन्य गंभीर खतरों पर चुप्पी साधना एक पक्षपाती सोच को दर्शाता है.

वहीं बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान को कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक और वैचारिक सोच का विस्तार करार दिया. उन्होंने दावा किया कि अंसारी की यह टिप्पणी उसी राजनीतिक मानसिकता की उपज है जिसे कांग्रेस दशकों से आगे बढ़ाती रही है. भंडारी ने वर्ष 2009 के उस घटनाक्रम का भी उल्लेख किया जब राहुल गांधी से जुड़ी एक टिप्पणी के जरिए कांग्रेस पर 'हिंदू टेरर' के नैरेटिव पर राजनीति करने का आरोप लगा था. उन्होंने कहा कि अंसारी का यह बयान भी उसी पुरानी सोच को हवा देने का काम कर रहा है.

बीजेपी नेता नीलम सोनकर ने भी इस वक्तव्य को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति पहले भी हिंदू-मुस्लिम विभाजन और सांप्रदायिकता को लेकर इस प्रकार की बयानबाजी करते रहे हैं. सोनकर ने अंसारी को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें बयानों से माहौल खराब करने के बजाय देश के वास्तविक और सकारात्मक वातावरण को देखना और समझना चाहिए.

विश्व हिंदू परिषद ने सहिष्णुता की परंपरा की दिलाई याद

इस विवाद में विश्व हिंदू परिषद भी कूद पड़ी और संगठन के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र जैन ने पूर्व उपराष्ट्रपति पर तीखा हमला बोला. जैन ने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि यह देश हमेशा से अत्यंत सहिष्णु रहा है और यहां हर समुदाय को बराबर का मान-सम्मान और स्थान दिया गया है. उन्होंने कड़ा सवाल दागते हुए कहा कि अगर हिंदू समाज सचमुच सांप्रदायिक या कट्टर होता, तो क्या हामिद अंसारी इस तरह के उच्च पदों पर रहने के बाद आज इस तरह की टिप्पणी करने की स्थिति में होते.

सुरेंद्र जैन ने पूर्व में दिए गए अंसारी के अन्य बयानों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उनकी ऐसी टिप्पणियां देश के सामाजिक ताने-बाने और आपसी सौहार्द को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती हैं. वीएचपी नेता ने कहा कि एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति को ऐसे विभाजनकारी बयानों से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे.

सवाल-जवाब

हामिद अंसारी ने यह विवादित टिप्पणी किस कार्यक्रम में की?
उन्होंने यह टिप्पणी 18 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित तीसरे एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान की.
हामिद अंसारी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के किस संदर्भ का उल्लेख किया?
उन्होंने बताया कि नेहरू ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में कहा था कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से है.
अंसारी ने अपने भाषण में किस पुस्तक का जिक्र किया?
उन्होंने वर्ष 2019 में प्रकाशित एजी नूरानी की पुस्तक 'द आरएसएस: अ मेनेस टू इंडिया' का विशेष रूप से उल्लेख किया.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हामिद अंसारी के बयान पर क्या कहा?
किरेन रिजिजू ने निशाना साधते हुए कहा कि यही सबसे बड़ी समस्या है कि वे कट्टरपंथियों, धार्मिक उन्मादियों, चरमपंथियों और अलगाववादियों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलेंगे.
विश्व हिंदू परिषद के नेता सुरेंद्र जैन ने क्या प्रतिक्रिया दी?
सुरेंद्र जैन ने भारत की सहिष्णुता की परंपरा याद दिलाते हुए सवाल उठाया कि अगर हिंदू समाज कट्टर होता, तो अंसारी ऐसी टिप्पणी करने की स्थिति में कैसे होते.
बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने क्या आरोप लगाया?
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि अंसारी की टिप्पणी कांग्रेस की पुरानी 'हिंदू टेरर' वाली वैचारिक राजनीति का ही हिस्सा है.
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद चुनावी राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है। ज़मीनी स्तर पर इसका असर यह होगा कि सत्ता पक्ष इसे बहुसंख्यक भावनाओं से जोड़कर आक्रामक राजनीतिक नैरेटिव बनाएगा, जबकि विपक्षी दल इस बहस को संविधान और नागरिक राष्ट्रवाद की रक्षा के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश करेंगे। आने वाले दिनों में यह वैचारिक टकराव क्षेत्रीय चुनाव अभियानों की दिशा तय करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के तीखे वैचारिक बयानों से ज़मीनी स्तर पर ध्रुवीकरण बढ़ने का सीधा जोखिम पैदा होता है। आपराधिक और सार्वजनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से, राजनीतिक मंचों से ऐसे आरोप-प्रत्यारोप अक्सर कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौतियाँ खड़े करते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी ताकि इस गरमागरमी के बीच किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक तनाव की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस प्रकार की बयानबाजी जनता की प्राथमिकताओं को भटकाने का काम करती है और सुरक्षा एजेंसियों का दबाव बढ़ाती है।

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