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जयपुर में चालाक पुलिस अधिकारी की अनोखी तरकीब फेल, रिश्वत के नोट उठाने के लिए किया तौलिए का इस्तेमाल पर ACB ने रंगे हाथों दबोचाराजस्थान
17 सित॰ 2026, 1:03 pm (1 दिन पहले)· 0

जयपुर में चालाक पुलिस अधिकारी की अनोखी तरकीब फेल, रिश्वत के नोट उठाने के लिए किया तौलिए का इस्तेमाल पर ACB ने रंगे हाथों दबोचा

जयपुर के सांभरलेक थाने में तैनात SHO राममिलन मीणा ने केमिकल जांच से बचने के लिए बिना हाथ लगाए तौलिए से 50 हजार रुपये की रिश्वत ली, लेकिन ACB ने तौलिए की जांच कर उसकी पोल खोल दी।

राजस्थान के जयपुर जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया है। सांभरलेक थाने के थाना प्रभारी (SHO) राममिलन मीणा ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने के लिए एक ऐसी तरकीब निकाली जो बहुत ही शातिर थी, लेकिन आखिरकार नाकाम साबित हुई। आमतौर पर जब ACB किसी भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ती है, तो उसके हाथों पर लगा केमिकल रासायनिक जांच में उसका जुर्म साबित कर देता है। इस कानूनी फंदे से बचने के लिए इस पुलिस अधिकारी ने नोटों को सीधे हाथ से छूने के बजाय एक घरेलू तौलिए का सहारा लिया, लेकिन जांच अधिकारियों की सूझबूझ के आगे उसकी यह होशियारी काम नहीं आई।

केमिकल जांच से बचने की शातिर योजना

रिश्वत के मामलों में ACB की कार्रवाई का एक तय तरीका होता है। विभाग पहले से ही रिश्वत के रूप में दिए जाने वाले नोटों पर एक विशेष प्रकार का पाउडर लगा देता है। जैसे ही कोई आरोपी इन नोटों को छूता है, वह अदृश्य केमिकल उसके हाथों में लग जाता है। इसके बाद जब आरोपी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धोया जाता है, तो रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण पानी का रंग गुलाबी हो जाता है। पुलिस महकमे में रहने के कारण SHO राममिलन मीणा इस पूरी तकनीक से बहुत अच्छी तरह वाकिफ था। इसलिए जब पीड़ित ठेकेदार 50 हजार रुपये लेकर उसके केबिन में पहुंचा, तो मीणा ने बेहद सावधानी बरती। उसने पीड़ित से पैसे सीधे अपने हाथ में देने के बजाय टेबल पर रखने को कहा। इसके बाद उसने पास में रखा एक सफेद तौलिया उठाया और उसकी मदद से नोटों को पकड़कर बिना छुए सीधे अपनी रैक में खिसका दिया। उसे पूरा भरोसा था कि हाथ न छूने के कारण वह इस टेस्ट में आसानी से बच निकलेगा।

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हाथों के बजाय तौलिए ने खोला राज

जैसे ही पीड़ित का इशारा पाकर ACB की टीम ने थाने में छापा मारा, तो SHO राममिलन मीणा के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी। उसे यकीन था कि उसने कोई सबूत नहीं छोड़ा है। टीम ने नियम के अनुसार सबसे पहले मीणा के दोनों हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाया। उम्मीद के मुताबिक, पानी का रंग बिल्कुल नहीं बदला और वह साफ रहा। आरोपी को लगा कि उसकी तरकीब काम कर गई है और वह बच निकला है। लेकिन ACB के अनुभवी अधिकारी उसकी इस चाल को समझ गए। उन्होंने टेबल के आसपास की जगह की बारीकी से जांच की और वहां रखे सफेद तौलिए को अपने कब्जे में ले लिया। जब टीम ने उस तौलिए के हिस्से को केमिकल वाले पानी में डुबाया जिससे नोट पकड़े गए थे, तो पूरा पानी तुरंत गुलाबी हो गया। इस वैज्ञानिक सबूत ने आरोपी पुलिस अधिकारी की सारी चालाकी को बेनकाब कर दिया।

डंपर मालिकों से हर महीने मांगी जा रही थी बंधी

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता सड़क निर्माण के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। आरोपी SHO राममिलन मीणा उसे लंबे समय से डंपर और अन्य निर्माण वाहनों को थाने में बंद करने की धमकी देकर परेशान कर रहा था। इन वाहनों को बिना किसी रुकावट के चलाने देने और पुलिसिया उत्पीड़न से बचाने के बदले में वह हर महीने 50 हजार रुपये की बंधी (मासिक रिश्वत) की मांग कर रहा था। इस ब्लैकमेलिंग और लगातार हो रही परेशानी से तंग आकर ठेकेदार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में इसकी शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद भी आरोपी मीणा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया। उसका दावा था कि पीड़ित की गाड़ी एक हादसे के मामले में थाने में जब्त थी और वह केवल उसे छुड़ाने के सिलसिले में बात करने आया था, रिश्वत से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB की कार्रवाई तेज

राजस्थान में सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ACB लगातार जाल बिछा रही है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्ट अधिकारी कानून की नजरों से बचने के लिए चाहे जितने भी नए हथकंडे अपना लें, जांच एजेंसियों की सतर्कता के आगे उनका टिक पाना नामुमकिन है। एक पुलिस अधिकारी द्वारा ही कानून का उल्लंघन कर आम नागरिकों को प्रताड़ित करने की इस घटना ने विभाग की साख पर भी सवाल उठाए हैं। फिलहाल ACB की टीम आरोपी SHO से सघन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध वसूली में कुछ और लोग भी शामिल थे या नहीं, और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

सवाल-जवाब

यह रिश्वतखोरी की घटना कहां हुई?
यह घटना राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित सांभरलेक थाने में हुई।
इस मामले में गिरफ्तार पुलिस अधिकारी कौन है?
गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी सांभरलेक थाने के SHO राममिलन मीणा हैं।
रिश्वत के रूप में कितने पैसों की मांग की गई थी?
पुलिस अधिकारी ने निर्माण वाहनों को बिना किसी रुकावट के चलने देने के बदले 50,000 रुपये की मासिक रिश्वत मांगी थी।
जब पुलिस अधिकारी के हाथ गुलाबी नहीं हुए, तो ACB ने उसका जुर्म कैसे साबित किया?
हालांकि आरोपी के हाथ साफ थे, लेकिन ACB ने उस सफेद तौलिए की जांच की जिससे नोट पकड़े गए थे, और केमिकल टेस्ट में तौलिए के रंग बदलते ही उसका जुर्म साबित हो गया।
पकड़े जाने के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी ने अपने बचाव में क्या दलील दी?
आरोपी अधिकारी ने रिश्वत लेने से इनकार किया और दावा किया कि शिकायतकर्ता केवल दुर्घटना के मामले में जब्त एक कार को छुड़ाने के सिलसिले में थाने आया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधी वैज्ञानिक जांच के तरीकों को मात देने के लिए नए और अजीब हथकंडे अपना रहे हैं। हालांकि एसीबी ने सूझबूझ से इस प्रयास को नाकाम कर दिया, लेकिन यह मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने तकनीकी और फोरेंसिक चुनौतियों के बढ़ते दायरे को उजागर करता है। ऐसे मामलों में डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को समय पर सुरक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि अदालतों में अभियोजन मजबूत हो सके।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

इस तरह की नियमित जबरन वसूली जमीनी स्तर पर व्यापार करने की सुगमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। प्रशासनिक भ्रष्टाचार न केवल कानून-व्यवस्था की साख को बट्टा लगाता है, बल्कि स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत और समय सीमा को भी अनावश्यक रूप से बढ़ाता है। ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए केवल ट्रैप कार्रवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी विभागों में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और पारदर्शी डिजिटल ऑडिट प्रणालियों को लागू करना आवश्यक है ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही खत्म हो सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

जब कानून का रखवाला ही प्रक्रियाओं की जानकारी का इस्तेमाल अपराध छुपाने के लिए करने लगे, तो यह पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आरोपी अधिकारी को फिनोलफ्थलीन केमिकल टेस्ट की तकनीकी समझ थी, लेकिन वह यह भूल गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध में इस्तेमाल की गई हर चीज—चाहे वह तौलिया ही क्यों न हो—अदालत में जब्ती साक्ष्य (क्राइम आर्टिकल) बनती है। फॉरेंसिक जांच और जब्ती की यह वैज्ञानिक प्रक्रिया अदालत में आरोपी के खिलाफ केस को बेहद मजबूत बनाएगी। यह मामला दर्शाता है कि शातिर तरीकों के बावजूद वैज्ञानिक तफ्तीश के आगे भ्रष्टाचार छुप नहीं सकता।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करण जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला केवल एक अधिकारी की चालाकी का नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र के भीतर बैठी संस्थागत समस्या को उजागर करता है। जब कानून के रखवाले ही जांच प्रक्रियाओं की काट खोजने लगें, तो ठेकेदारों और स्थानीय व्यापारियों से होने वाली ऐसी संगठित उगाही से बुनियादी ढांचे के काम भी प्रभावित होते हैं। एसीबी द्वारा वैज्ञानिक साक्ष्यों और जब्ती के आधार पर केस मजबूत करना सराहनीय है, लेकिन ऐसे मामलों को रोकने के लिए पुलिस महकमे में आंतरिक निगरानी और गोपनीय सतर्कता जांच को और कड़ा करना होगा ताकि भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसी जा सके।

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