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राजधानी में बढ़ती गैंगवार के बीच विदेश से रची जा रही साजिशों पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजरदिल्ली
19 सित॰ 2026, 5:36 pm (51 मिनट पहले)· 0

राजधानी में बढ़ती गैंगवार के बीच विदेश से रची जा रही साजिशों पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर

दक्षिण दिल्ली के आया नगर में हालिया मर्डर के बाद विदेशों में छिपे संगठित सिंडिकेट्स की भूमिका और उनके स्थानीय संपर्कों पर सुरक्षा बलों की तफ्तीश तेज हो गई है।

देश की राजधानी में संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले संगठित आपराधिक सिंडिकेट्स का संचालन सरहदों के पार से होने की बात लगातार रेखांकित हो रही है। दक्षिण दिल्ली के आया नगर इलाके में सोमवार को एक शख्स पर प्राणघातक हमला कर उसकी जान ले ली गई। इस सनसनीखेज वारदात के तुरंत बाद इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर एक दावा वायरल हुआ, जिसमें अमेरिका में पनाह लिए बैठे हिमांशु भाऊ ने हमले का जिम्मा अपने सिर लिया। लगभग एक महीने के अंतराल में यह दूसरा वाकया है जब राजधानी के भीतर किसी जघन्य वारदात की सीधी कड़ी इसी सिंडिकेट से जुड़ी पाई गई है।

लगातार दूसरी सनसनीखेज घटना से बढ़ी सुरक्षा तंत्र की चिंता

आया नगर की इस घटना से कुछ ही हफ्तों पहले नरेला क्षेत्र में एक संपत्ति कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त भी सोशल मीडिया हैंडल्स का सहारा लेकर इस खूनी खेल की जिम्मेदारी उसी गिरोह ने कुबूल की थी। लगातार दो हमलों के बाद राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गए हैं। अधिकारी अब उस डिजिटल पदचिह्न और संचार व्यवस्था की पड़ताल कर रहे हैं, जिसके मार्फत विदेश में शरण लिए बैठे आपराधिक तत्व हजारों मील दूर बैठकर भारतीय जमीन पर भाड़े के हमलावरों को सक्रिय कर रहे हैं।

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पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ और जांच दल इस बात की गहराई से छानबीन में लगे हैं कि आया नगर में किए गए दावे की सत्यता क्या है और इस संदेश को प्रसारित करने के पीछे कौन लोग सक्रिय थे। जांचकर्ताओं का मुख्य ध्यान उन अज्ञात हमलावरों की पहचान सुनिश्चित करने पर टिका है जिन्होंने गोलियां चलाईं, साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उन्हें साजो-सामान और निशाने से जुड़ी सूचनाएं कहां से भेजी गई थीं। अधिकारियों को अंदेशा है कि विदेश में बैठे मास्टरमाइंड यहां मौजूद हमलावरों को लक्ष्य की रेकी, स्वचालित हथियार और वित्तीय रसद उपलब्ध कराने के लिए कई अलग-अलग गुप्त रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रंगदारी, अंधाधुंध गोलीबारी और मकोका का शिकंजा

सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ है कि साल 2025 और 2026 की समयावधि में दिल्ली के विभिन्न कोनों तथा पड़ोसी राज्य हरियाणा में व्यापारियों को धमकाने, जबरन वसूली करने और दहशत फैलाने के इरादे से की गई कई गोलीबारी की घटनाओं में इसी गिरोह का हाथ रहा है। आपराधिक तौर-तरीकों के अध्ययन से पता चलता है कि सरगनाओं को किसी वारदात के वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहने की रत्ती भर जरूरत नहीं पड़ती। वे विदेशी धरती पर बैठकर सुरक्षित व एन्क्रिप्टेड संचार उपकरणों की बदौलत अपने गुर्गों को सिलसिलेवार निर्देश जारी करते हैं, जिसके बाद जमीनी स्तर पर स्थानीय मददगार हमलों को अंजाम तक पहुंचाते हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संजाल को ध्वस्त करने के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कठोर कानून मकोका यानी महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून की धाराओं के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। इस गहन पड़ताल में मुख्य साजिशकर्ता के अलावा उससे जुड़े अनेक स्थानीय मददगारों, हमलावरों और रसद जुटाने वाले संपर्कों को नामजद किया गया था। करीब एक दर्जन संदिग्धों को कानूनी कार्रवाई की जद में लाया गया है। जांचकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का गिरोह नहीं है, बल्कि कई पुराने और नए आपराधिक गिरोहों के आपसी तालमेल से खड़ा हुआ एक बड़ा मंच है।

विरोधी धड़े के खिलाफ साझा मंच तैयार करने की कवायद

तफ्तीश में जुटी टीमों का ध्यान इस बात पर भी केंद्रित है कि किस तरह विभिन्न गुट मिलकर एक नया आपराधिक समीकरण बना रहे हैं। उपलब्ध इनपुट के अनुसार, इस सिंडिकेट के तार साहिल, नीरज फरीदपुर, बंबीहा समूह, कौशल चौधरी, नीरज बवानिया, योगेश कादयान और टिल्लू ताजपुरिया से जुड़े नेटवर्क के साथ जुड़ते रहे हैं। अधिकारी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इन गिरोहों के बीच आपसी सहयोग का स्तर क्या है और वे हथियारों या छिपने के ठिकानों को लेकर एक-दूसरे की किस प्रकार मदद करते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इन तमाम गुटों का एक साथ आना लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट के बढ़ते प्रभाव के बरक्स एक समानांतर मोर्चा खड़ा करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि इन विभिन्न आपराधिक संगठनों के बीच जमीनी स्तर पर कितनी पक्की साझेदारी है और वे साझा अभियानों को किस हद तक अंजाम देते हैं, यह अभी आधिकारिक जांच का मुख्य विषय बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की तस्दीक करने में जुटी हैं कि क्या यह केवल जेलों और विदेशों से चलाया जाने वाला एक अस्थायी गठजोड़ है या फिर इसके पीछे कोई गहरी योजना है।

संचार के लिए दर्जनों हैंडसेट और वित्तीय लेन-देन के गुप्त रास्ते

अपराध शाखा की जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ था कि विदेशी सरजमीं से गिरोह की गतिविधियों को संचालित करने के लिए बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया गया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि अमेरिका में मौजूद गिरोह से जुड़े एक संदिग्ध द्वारा लगभग 35 मोबाइल हैंडसेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन दर्जनों नंबरों और हैंडसेट्स को बार-बार बदलकर भारत में मौजूद सक्रिय गुर्गों तक संदेश, नए टारगेट की जानकारी और योजनाएं पहुंचाई जाती थीं।

इसके साथ ही सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे पर भी नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियां इस पहलू की पड़ताल में जुटी हैं कि किस प्रकार अनौपचारिक चैनलों और हवाला तंत्र के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया जाता रहा है। यह धन न केवल भारत में हमलावरों को किराए पर लेने और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने में खपता है, बल्कि अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

नाबालिग उम्र में अपराध की राह और वैश्विक तलाश

हरियाणा के रोहतक जिले के अंतर्गत आने वाले रिटोली गांव से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भाऊ ने महज 17 वर्ष की अल्पायु में अपराध जगत में कदम रखा था। जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2020 में वह बाल सुधार गृह की चारदीवारी फांदकर फरार हो गया था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उसके खिलाफ हरियाणा के कई थानों में दो दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज होते चले गए।

शुरुआती दिनों में छिटपुट वारदातों में शामिल रहने के बाद उसके खिलाफ कत्ल, जानलेवा हमले और अवैध असलाह रखने जैसे जघन्य अपराधों के केस दर्ज हुए, जिसके चलते उसका नाम एक स्थानीय उपद्रवी से बदलकर एक संगठित गैंगस्टर के रूप में कुख्यात हो गया। उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और गतिविधियों की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने भी उसके पैतृक निवास और संबंधित ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी। वर्तमान में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस प्रभावी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे भारतीय न्याय व्यवस्था के सामने लाने के कूटनीतिक व कानूनी प्रयास जारी हैं।

जांच के दायरे में आए अन्य नजदीकी सहयोगी

इस पूरे मामले में हरियाणा के झज्जर का निवासी योगेश कादयान भी जांच एजेंसियों के रडार पर प्रमुखता से बना हुआ है। कादयान बेहद कम उम्र से ही संगीन जुर्म के आरोपों में घिर गया था और वह इस सिंडिकेट के करीबी रणनीतिकारों में गिना जाता है। जांच एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट हैं कि वह फर्जी यात्रा दस्तावेजों और जाली पासपोर्ट का सहारा लेकर अमेरिका भागने में कामयाब रहा, जहां से वह गिरोह के विदेशी ऑपरेशंस में अपनी भूमिका निभा रहा है। अधिकारी अब इन तमाम कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सवाल-जवाब

आया नगर में हुई वारदात के बाद किसने जिम्मेदारी ली?
अमेरिका में बैठे गैंगस्टर हिमांशु भाऊ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आया नगर में हुई हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।
इससे पहले किस इलाके में इसी तरह की घटना सामने आई थी?
इससे करीब एक महीने पहले नरेला इलाके में एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या में भी इसी गिरोह का नाम सामने आया था।
गैंगस्टर के खिलाफ पुलिस ने किस कड़े कानून के तहत कार्रवाई की है?
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने हिमांशु भाऊ और उसके नेटवर्क से जुड़े करीब एक दर्जन आरोपियों के खिलाफ मकोका के तहत मामला दर्ज किया है।
विदेश से गिरोह चलाने के लिए कितने मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की बात सामने आई?
अपराध शाखा की जांच के अनुसार, अमेरिका में मौजूद गिरोह से जुड़े एक आरोपी द्वारा लगभग 35 मोबाइल हैंडसेट इस्तेमाल किए जाने की बात उजागर हुई है।
हिमांशु भाऊ मूल रूप से कहां का रहने वाला है और उसने कब अपराध में कदम रखा?
वह हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव का निवासी है और उसने महज 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में प्रवेश किया था।
योगेश कादयान के खिलाफ जांच एजेंसियां क्यों पड़ताल कर रही हैं?
झज्जर निवासी कादयान पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए अमेरिका भागने और वहां से गिरोह की गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप हैं।
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टिप्पणियाँ 3

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

आया नगर और नरेला की इन वारदातों से स्पष्ट है कि विदेशी धरती से संचालित होने वाले ये सिंडिकेट एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशंस के जरिए स्थानीय शूटरों को नियंत्रित कर रहे हैं। स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच द्वारा मकोका जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने से इस अंतरराष्ट्रीय नेक्सस और वित्तीय रसद पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 मिनट पहले

यह घटना राष्ट्रीय राजधानी की आंतरिक सुरक्षा और भू-राजनीतिक संलिप्तता के बीच एक गंभीर अंतर्संबंध को उजागर करती है। जब विदेशी धरती से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क के जरिए स्थानीय अपराधों का संचालन होने लगे, तो पारंपरिक पुलिसिंग के दायरे से आगे बढ़कर एक उन्नत तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चेबंदी की आवश्यकता होती है। मकोका जैसी सख्त धाराओं का प्रयोग वित्तीय रसद और स्लीपर सेल जैसी स्थानीय कड़ियों को तोड़ने में मददगार हो सकता है, लेकिन खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग के बीच वास्तविक समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान ही इस सीमा पार के आपराधिक नेक्सस को जड़ से उखाड़ने की कुंजी साबित होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·29 मिनट पहले

राष्ट्रीय राजधानी में विदेश से संचालित होने वाले इन आपराधिक सिंडिकेट्स का बढ़ता दखल अब केवल दिल्ली या हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। जिस तरह से एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और विदेशी ठिकानों का इस्तेमाल करके स्थानीय स्तर पर भाड़े के हमलावरों को सक्रिय किया जा रहा है, वह पारंपरिक पुलिसिंग के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि इस डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय नेक्सस को शुरुआती स्तर पर नहीं तोड़ा गया, तो यह संगठित अपराध तेजी से पड़ोसी राज्यों के संगठित माफिया तंत्र के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से और अधिक आहत कर सकता है।

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