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पाकिस्तान संग वॉशिंगटन के राजनयिक संपर्क से नई दिल्ली को भी होगा फायदा, अमेरिकी विदेश मंत्री ने गिनाए कारणदिल्ली
20 अक्तू॰ 2026, 9:39 pm (1 घंटे पहले)· 2

पाकिस्तान संग वॉशिंगटन के राजनयिक संपर्क से नई दिल्ली को भी होगा फायदा, अमेरिकी विदेश मंत्री ने गिनाए कारण

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के कूटनीतिक रिश्ते नई दिल्ली के सुरक्षा हितों के लिए भी मददगार साबित हो सकते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपनी भारत यात्रा के दौरान स्पष्ट किया है कि वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक संवाद वास्तव में नई दिल्ली की चिंताओं को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। एक खास बातचीत के दौरान उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई और यह भी समझाया कि विभिन्न वैश्विक समीकरणों के बीच रणनीतिक संबंधों को कैसे आगे बढ़ाया जाता है। उनका कहना था कि अमेरिका दुनिया के किसी भी कोने में आतंकवाद और उसे खाद-पानी देने वाली ताकतों के पूरी तरह खिलाफ खड़ा है, मगर विदेश नीति की आवश्यकताओं के चलते मतभेदों के बावजूद देशों से संवाद कायम रखना पड़ता है।

सीनेटर से विदेश मंत्री बनने के सफर में प्राथमिकताओं का बदलाव

पत्रकार राहुल जोशी ने बातचीत के दौरान रूबियो से उनके पुराने रुख पर सवाल किया। जोशी ने याद दिलाया कि वर्ष 2025 में सीनेटर के रूप में रूबियो ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि यदि पाकिस्तान भारत के विरुद्ध सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो वे इस्लामाबाद को मिलने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहायता में कटौती करने वाला विधेयक लाएंगे। इस पर जब पूछा गया कि क्या उस पुरानी नीति या दृष्टिकोण में अब कोई बदलाव आया है, तो रूबियो ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के फर्क को रेखांकित किया।

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रूबियो ने जवाब दिया कि उनकी वर्तमान भूमिका अब पहले जैसी नहीं है। वे अब सीनेटर नहीं बल्कि विदेश मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और पूरे देश की कूटनीति का संचालन उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा, "हम दुनिया में कहीं भी आतंकवाद के खिलाफ हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कूटनीतिक संतुलन साधते हुए वॉशिंगटन को उन मुल्कों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनके साथ कई संवेदनशील मामलों में गंभीर वैचारिक असहमतियां या मतभेद मौजूद रहते हैं।

परमाणु शक्ति और भौगोलिक स्थिति के चलते संपर्क जरूरी

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के निरंतर संपर्क में रहने की रणनीतिक मजबूरियों पर भी विस्तार से बात रखी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसके पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। परमाणु संपन्न देश होने के अलावा उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि उससे पूरी तरह किनारा नहीं किया जा सकता।

अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए रूबियो ने नई दिल्ली की अपनी स्वतंत्र कूटनीति का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत सरकार अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए ईरान के नेताओं के साथ संबंध बनाए रखती है और नियमित रूप से उनसे संवाद करती है, उसी तर्ज पर वॉशिंगटन को भी इस्लामाबाद से संपर्क में रहना पड़ता है।

नई दिल्ली की सुरक्षा चिंताओं पर सकारात्मक असर की उम्मीद

अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है, मगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए यह कदम अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान के साथ वॉशिंगटन का यह संवाद व्यापक रूप से एक सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

रूबियो ने निष्कर्ष के तौर पर रेखांकित किया कि यदि अमेरिका के संबंध पाकिस्तान से बने रहते हैं और दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर मौजूद रहते हैं, तो इससे उन संवेदनशील गतिविधियों या संकटों को टालने में मदद मिल सकती है, जिन्हें लेकर नई दिल्ली लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त करती रही है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान से बातचीत को भारत के हित में क्यों बताया?
मार्को रूबियो के अनुसार यदि अमेरिका के पाकिस्तान से संबंध रहेंगे, तो वह उन गतिविधियों और चिंताओं को रोकने में मदद कर सकता है जिन्हें लेकर भारत परेशान रहता है।
वर्ष 2025 में मार्को रूबियो का रुख पाकिस्तान को लेकर क्या था?
वर्ष 2025 में सीनेटर रहते हुए रूबियो ने कहा था कि यदि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो वे उसकी सुरक्षा सहायता काटने के लिए विधेयक लाएंगे।
रूबियो ने अपने बदले हुए रुख का क्या कारण बताया?
उन्होंने कहा कि अब वे सीनेटर नहीं बल्कि विदेश मंत्री हैं, इसलिए उन्हें मतभेदों के बावजूद देशहित में विभिन्न राष्ट्रों से राजनयिक संबंध संभालने होते हैं।
रूबियो ने पाकिस्तान से बातचीत के लिए भारत के किस देश से रिश्तों का उदाहरण दिया?
उन्होंने भारत सरकार के ईरान के नेताओं के साथ नियमित संपर्कों और मुलाकातों का उदाहरण दिया।
पाकिस्तान के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए किन दो प्रमुख तथ्यों का हवाला दिया गया?
रूबियो ने पाकिस्तान के परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र होने और उसकी भौगोलिक स्थिति को बातचीत बनाए रखने का मुख्य कारण बताया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·9 मिनट पहले

वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच का यह कूटनीतिक संतुलन कोई नई बात नहीं है। जब मैं खुद इस्लामाबाद में थी, तब भी अमेरिकी अधिकारियों के ऐसे बयानों पर यही चर्चा होती थी कि बड़े देश अपनी रणनीतिक और परमाणु मजबूरियों के चलते कभी पूरी तरह रिश्ते नहीं तोड़ते।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 मिनट पहले

रूबियो का ईरान और पाकिस्तान की तुलना करना दिलचस्प है, बात तो उन्होंने पते की कही है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·26 मिनट पहले

अर्जुन, बात तो ठीक है, पर क्या कूटनीति के इन दांवपेंचों से वाकई आतंकवाद पर लगाम लगेगी?

Rohan Verma@rohan-verma·37 मिनट पहले

अरे भाई, अमेरिका और पाकिस्तान की पुरानी दोस्ती पर सफाई देना तो नेताओं का पुराना ड्रामा है। ईरान का उदाहरण देकर अपनी कूटनीति सही ठहरा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत सबको पता है कि आतंकवाद पर अमेरिका का रुख कितना ढीला रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 मिनट पहले

अमेरिका की बात पर पूरा भरोसा करना मुश्किल है। पाकिस्तान पर कभी आँख बंद करके यकीन नहीं किया जा सकता।

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