मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को एक दुखद घटना सामने आई, जहां अज्ञात बंदूकधारियों ने 44 वर्षीय एक कुकी नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना उस समय हुई जब पीड़ित जंगल में बांस के कोपल इकट्ठा करने गया था। मृतक की पहचान पी. मोल्डिंग गांव के रहने वाले पाओलेन खोंगसाई के रूप में की गई है। इस हिंसा के बाद इलाके में तनाव फैल गया है और स्थानीय संगठनों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
घटना का विवरण और पुलिस कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाओलेन खोंगसाई अपने एक साथी लालदेंगा के साथ सुबह करीब 8 बजे पी. मोल्डिंग और मोलोई गांवों के बीच स्थित जंगली इलाके की तरफ जा रहे थे। जब दोनों वहां पहुंचे तो अचानक उन पर हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए हमले में पाओलेन खोंगसाई को कई गोलियां लगीं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उनके साथ मौजूद लालदेंगा किसी तरह बाल-बाल बच गए और सुरक्षित निकलने में सफल रहे।
यह वारदात लीमाखोंग पुलिस स्टेशन से लगभग 13 किलोमीटर दूर घनी वन भूमि में हुई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आई और इस सिलसिले में एक आधिकारिक मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए पाओलेन खोंगसाई के शव को पोस्टमार्टम के लिए कांगपोकपी भेजने की व्यवस्था की, ताकि मौत के कारणों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया जा सके।
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी का विरोध और बंद का आह्वान
इस गोलीबारी की घटना के तुरंत बाद, कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कांगपोकपी जिले में मंगलवार आधी रात से 24 घंटे के पूर्ण बंद का ऐलान किया। इस बंद का मुख्य उद्देश्य अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करना, न्याय और जवाबदेही की मांग करना, कुकी-जो समुदाय के लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी पीड़ा को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील करना है।
संगठन ने अपनी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि 19 अक्टूबर को नोंगशुम-सुनुरोक इलाके में तीन मेइती नागरिकों की मौत से जुड़े मामले में कुकी-जो समुदाय के लोगों की अंधाधुंध गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जो चिंता का विषय है। संगठन का कतई यह मानना है कि जिन लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है, उनकी संलिप्तता किसी पक्षपात के बिना एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए ही साबित की जानी चाहिए, न कि बिना पुख्ता सबूतों के कार्रवाई की जाए।
इम्फाल घाटी में समानांतर विरोध प्रदर्शन और जनजीवन पर असर
दूसरी तरफ, एक अन्य घटनाक्रम के तहत नेटिव पीपल्स कमेटी मणिपुर द्वारा तीन मेइती नागरिकों की हत्या के विरोध में बुलाई गई 48 घंटे की हड़ताल के कारण मंगलवार को इम्फाल घाटी के पांचों जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा। इस दौरान इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग जिलों के कई इलाकों में शिक्षण संस्थान, दुकानें और तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे, जिससे रोजमर्रा की गतिविधियां थम गईं।



















