राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम की करवट के साथ ही आबोहवा में बदलाव साफ महसूस किया जा रहा है। दशहरे के बाद जैसे ही बारिश का दौर पूरी तरह थमा, वैसे ही गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। इस मौसमी बदलाव के साथ ही दिल्ली और आसपास के शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। हवा में मौजूद महीन कणों के चलते सांस से जुड़ी तकलीफों का खतरा गहराने लगा है। मौसम में घुली ठंडक के कारण खांसी, सर्दी और मौसमी फ्लू के मामलों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे नाजुक वक्त में सेहत के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।
तापमान का मिजाज और दिनभर का पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुमान के अनुसार 20 अक्टूबर को पूरे दिल्ली और एनसीआर में आसमान मुख्य रूप से साफ और दिन सुहावना बना रहेगा। सुबह के समय न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द रिकॉर्ड किया गया है। दोपहर में धूप खिलने के साथ ही अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने की संभावना है। हालांकि सूरज ढलते ही पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी और रात के समय पारा लुढ़ककर 17 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। दिन के समय हल्की से मध्यम गति से हवाएं चलेंगी, जिससे धूप में भी मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक बना रहेगा।
प्रदूषण के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
मौसम भले ही सुहावना नजर आ रहा हो, लेकिन हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता का सबब बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 130 से 180 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो मध्यम से खराब श्रेणी के अंतर्गत आता है। प्रदूषण के कुछ प्रमुख हॉटस्पॉट्स में स्थिति इससे भी अधिक गंभीर देखी जा रही है। वातावरण में पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कणों की सघनता बढ़ रही है। सर्दियों के आगमन और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं के चलते हवा में यह जहर घुल रहा है। जानकारों का आकलन है कि आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और अधिक गिर सकती है।
बचाव के तरीके और जरूरी सावधानियां
बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के इस दौर में सुबह की सैर या शाम को टहलने जाने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। दिन के वक्त खुली हवा में कामकाज करना ठीक है, परंतु सुबह और देर शाम के समय मास्क का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहेगा। विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से दमा या सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को ठंडी और प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क से बचना चाहिए। शाम होते ही तापमान में आने वाली तेज गिरावट को देखते हुए स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और बाहर रहने वाले लोगों को हल्के गर्म या ऊनी कपड़े साथ रखने की सलाह दी गई है।



















