आजकल शहरी क्षेत्रों में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। इस बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण, ताजी, रसायन मुक्त और पूरी तरह से ऑर्गेनिक सब्जियां खाने का चलन तेजी से बढ़ा है। शहरों में खेती के लिए पर्याप्त जमीन या आंगन की कमी होती है, जिसके चलते लोग अब अपनी खाली छतों का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग छतों पर ही तरह-तरह के फूल और सब्जियां उगाने लगे हैं। हालांकि, गार्डनिंग का शौक रखने वाले ज्यादातर लोगों को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। अक्सर वे पौधे तो लगा लेते हैं, लेकिन सही और सटीक तकनीकी जानकारी की कमी के कारण उनके पौधों में फल नहीं आते या पैदावार बहुत कम होती है। इस आम परेशानी को दूर करने के लिए, भागलपुर के जाने-माने टेरेस फार्मिंग एक्सपर्ट दीपक कुमार ने छत पर बंपर पैदावार हासिल करने का सबसे आसान और कारगर तरीका साझा किया है।
गमले की मिट्टी और खाद का सही अनुपात
छत पर बागवानी करते समय सबसे बड़ी गलती मिट्टी के चुनाव में होती है। अक्सर शुरुआत करने वाले लोग अपने गमलों या ग्रो बैग्स में सिर्फ साधारण मिट्टी भर देते हैं और उसमें नाममात्र की खाद मिला देते हैं। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक, जमीन की तुलना में छत पर गार्डनिंग करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है और सिर्फ मिट्टी के भरोसे अच्छी पैदावार नहीं ली जा सकती। पौधों के संपूर्ण पोषण के लिए एक खास मिश्रण तैयार करना बेहद जरूरी है। दीपक कुमार बताते हैं कि बेहतरीन नतीजों के लिए 40 प्रतिशत मिट्टी और 60 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट (केंचुए की खाद) या फिर पुरानी गोबर की खाद का मिश्रण बनाना चाहिए। इसके बाद, इस तैयार मिश्रण में 10 प्रतिशत सरसों की खली भी अच्छी तरह से मिला देनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे मिश्रण को तुरंत इस्तेमाल करने के बजाय, 7 दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। इस अवधि में सभी तत्व आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाते हैं और एक शानदार पॉटिंग मिक्स तैयार हो जाता है। इस खास मिट्टी में पौधे लगाने से उनमें जबरदस्त फलन होता है।
लताओं वाली सब्जियों को गर्मी से बचाएं
टेरेस फार्मिंग में मौसम का भी बहुत बड़ा असर पड़ता है। गर्मी के मौसम में कंक्रीट से बनी छत का फर्श दिनभर की धूप से बुरी तरह गर्म हो जाता है। अगर आप लताओं वाली (फैलने वाली) सब्जियां लगा रहे हैं और वे सीधे छत के गर्म फर्श पर फैलने लगेंगी, तो तेज गर्मी और गर्माहट के कारण पूरी फसल झुलस कर खराब हो जाएगी। इस समस्या से बचने के लिए, पौधों को हमेशा सहारा या मचान (जिसे स्थानीय भाषा में 'अलान' कहा जाता है) देना चाहिए। लताओं को इस मचान के सहारे ऊपर की तरफ चढ़ाना चाहिए, ताकि वे सीधे गर्म फर्श के संपर्क में न आएं। इस तरीके से न केवल आपकी फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि हवा का संचार बेहतर होने से सब्जियों की पैदावार भी काफी अधिक होगी।
कीट नियंत्रण और नियमित पोषण
जमीन की तुलना में छत पर लगे पौधों में कीड़े लगने और बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है। इसलिए पौधों की सुरक्षा और उनके लगातार विकास पर ध्यान देना जरूरी है।
भागलपुर के विशेषज्ञ का कहना है कि पौधों को खतरनाक कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए उन पर नियमित रूप से नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। यह एक प्राकृतिक और असरदार कीटनाशक का काम करता है। इसके साथ ही, पौधों को लगातार ताकत देने के लिए महीने में कम से कम एक बार सरसों की खली को पानी में अच्छी तरह भिगोकर उस तरल खाद को पौधों की जड़ों में जरूर डालना चाहिए। इस प्रक्रिया से पौधों को निरंतर पोषण मिलता रहता है और उनमें फलन का स्तर हमेशा बेहतर और स्थिर बना रहता है।



















