राजस्थान के सांस्कृतिक शहर उदयपुर से रक्षाबंधन के अवसर पर एक बेहद अद्भुत और अनोखी कलाकृति सामने आई है। शहर के विख्यात सूक्ष्म शिल्पकार डॉ. इकबाल सक्का ने अपनी अद्भुत कारीगरी का परिचय देते हुए सोने और अमेरिकन डायमंड के संयोजन से एक अति सूक्ष्म राखी तैयार की है। 'करिश्मा-ए-तिरंगी' नाम से जानी जाने वाली इस राखी को दुनिया की सबसे छोटी राखी होने का दावा किया जा रहा है। इस कलाकृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे नग्न आंखों से देख पाना लगभग असंभव है और इसके बारीक स्वरूप का दीदार करने के लिए विशेष आवर्धक लेंस की जरूरत पड़ती है। रक्षाबंधन के त्योहार पर बनाई गई यह कृति भारतीय कला और देशभक्ति का एक अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आई है।
लेंस के बिना सोने के कण जैसी दिखती है कलाकृति
डॉ. इकबाल सक्का द्वारा तैयार की गई यह राखी आकार और वजन दोनों के मामले में बेहद असाधारण है। जब कोई व्यक्ति इसे बिना किसी लेंस के देखता है, तो यह केवल सोने के एक छोटे से कण या बारीक बुरादे जैसी प्रतीत होती है। हालांकि, जैसे ही इसे देखने के लिए आवर्धक लेंस का उपयोग किया जाता है, तिरंगे रंग के रेशमी धागे में पिरोई गई सोने की सूक्ष्म संरचना और उसमें जड़ा अमेरिकन डायमंड स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है। तीन रंगों के रेशमी धागे पर सोने और डायमंड की इस नक्काशी को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है। इस अति सूक्ष्म कृति को इतने छोटे पैमाने पर तराशना कारीगरी का एक बेमिसाल नमूना माना जा रहा है।
धर्म कांटा भी दर्ज नहीं कर सका वजन
इस राखी का वजन इतना कम है कि इसे साधारण तराजू पर तोलना तो दूर, व्यावसायिक धर्म कांटे पर भी इसका भार 00.0 मिलीग्राम ही दर्ज होता है। डॉ. सक्का के अनुसार, यह कलाकृति इतनी हल्की और संवेदनशीलता से भरपूर है कि हल्की सी फूंक मारने पर भी हवा में उड़ जाती है। इस वजह से इसे बनाते समय और तैयार होने के बाद सुरक्षित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। जरा सी असावधानी से यह सूक्ष्म राखी गुम हो सकती है, इसलिए इसे संभालने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है।
सात घंटे की कड़ी मेहनत और बारीक कारीगरी
इस अनूठी राखी को आकार देने के लिए डॉ. इकबाल सक्का को लगातार लगभग सात घंटे की कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इतने सूक्ष्म स्तर पर काम करते हुए सोने और अमेरिकन डायमंड को तिरंगे रेशमी धागे के साथ जोड़ना अत्यधिक धैर्य और एकाग्रता की मांग करता है। डॉ. सक्का पहले भी सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं से अति सूक्ष्म कलाकृतियां बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। उनकी पूर्व में बनाई गई कई कृतियों ने कला जगत में काफी सराहना बटोरी है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बनाई गई यह नई राखी उनकी इसी वर्षों पुरानी साधना और सूक्ष्म कला का एक नया पड़ाव है।
कला और देशभक्ति का अनूठा संगम
डॉ. इकबाल सक्का का कहना है कि 'करिश्मा-ए-तिरंगी' राखी का निर्माण केवल एक कलात्मक प्रयोग नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने भारतीय पारंपरिक शिल्प, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति सम्मान और भाई-बहन के अटूट पर्व रक्षाबंधन की पावन भावना को एक साथ पिरोने का प्रयास किया है। त्योहार के मौके पर इस प्रकार की अद्भुत कलाकृति को देखने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है और लेंस के माध्यम से इस सूक्ष्म राखी को देखना हर किसी के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।





















