मानसून की बारिश गर्मी से राहत तो देती है, लेकिन इसके साथ ही घरों और दुकानों की दीवारों में सीलन की एक बड़ी परेशानी भी लेकर आती है। हफ्तों तक चलने वाली बरसात के दौरान दीवारों और छतों में नमी धीरे-धीरे जमा होती रहती है, जिसकी वजह से पेंट और प्लास्टर उखड़ने लगते हैं, कहीं-कहीं छत का प्लास्टर तक झड़ जाता है और दीवारों पर काले-हरे रंग की फफूंद नजर आने लगती है। अगर शुरुआत में ही इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या धीरे-धीरे बढ़कर घर की खूबसूरती के साथ-साथ उसकी नींव और मजबूती को भी नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस सीलन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
दरारें और प्लास्टर की जांच जरूरी
सबसे पहला कदम है घर की छत और दीवारों का बारीकी से निरीक्षण करना। जहां भी प्लास्टर टूटा या उखड़ा हुआ नजर आए, उस हिस्से को साफ करके वहां मौजूद हर दरार की मरम्मत करानी चाहिए। इसके लिए वॉटरप्रूफिंग मटीरियल का उपयोग सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। अगर दीवार या छत में दरारें खुली रह जाएं, तो बरसात का पानी उन्हीं रास्तों से भीतर घुसकर नमी और सीलन को और बढ़ा देता है। वहीं समय पर करवाई गई मरम्मत न सिर्फ सीलन को रोकती है, बल्कि दीवारों की उम्र बढ़ाने और घर को मजबूत बनाए रखने में भी मदद करती है।
पानी की पाइपलाइन को भी परखें
कई बार दीवार गीली होने की वजह बारिश नहीं, बल्कि घर के भीतर बिछी पानी की पाइपलाइन में हुआ रिसाव होता है। इसलिए जिस दीवार पर नमी या गीलापन दिखे, वहां से गुजर रही पाइपलाइन की जांच जरूर करानी चाहिए। कहीं भी लीकेज मिलने पर उसे तुरंत ठीक कराना चाहिए, क्योंकि देरी करने पर वही रिसाव धीरे-धीरे दीवार के भीतर फैलकर बड़ी सीलन का रूप ले सकता है। पाइपलाइन की समय पर मरम्मत से नमी बढ़ने की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाती है।
घर में हवा का आना-जाना बनाए रखें
सीलन रोकने का सबसे आसान और असरदार तरीका है घर में वेंटिलेशन का ध्यान रखना। जैसे ही बारिश थमे और धूप निकले, घर की खिड़कियां और दरवाजे खोल देने चाहिए ताकि बाहर की ताजी हवा अंदर आ सके। इससे कमरों में जमा नमी धीरे-धीरे बाहर निकलती रहती है और दीवारों व छत पर फफूंद जमने का खतरा भी काफी कम हो जाता है। नियमित वेंटिलेशन न सिर्फ घर को सूखा रखता है, बल्कि अंदर की हवा को भी साफ और सेहत के लिहाज से बेहतर बनाए रखता है।
किचन और बाथरूम में रखें खास ध्यान
घर में सबसे ज्यादा नमी आमतौर पर किचन और बाथरूम में ही बनती है। इसलिए खाना बनाते वक्त और नहाने के बाद एग्जॉस्ट फैन जरूर चलाना चाहिए, ताकि भाप और नमी तुरंत बाहर निकल जाए और दीवारों पर न टिके। अगर किसी कमरे या हिस्से में लंबे समय से नमी बनी हुई महसूस हो, तो वहां डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यह उपकरण हवा में घुली अतिरिक्त नमी को खींचकर वातावरण को सुखाने का काम करता है, जिससे सीलन और फफूंद दोनों की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।
सेंधा नमक और नीम जैसे घरेलू नुस्खे भी कारगर
कुछ पुराने और सरल घरेलू नुस्खे भी सीलन से लड़ने में काफी मददगार साबित होते हैं। जिस जगह नमी ज्यादा महसूस हो, वहां एक कटोरी में सेंधा नमक रखा जा सकता है, क्योंकि यह हवा में मौजूद फालतू नमी को सोख लेता है। जब यह नमक गीला हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए ताकि वह असरदार बना रहे। इसके अलावा नीम की पत्तियां या नीम का तेल भी फफूंद को बढ़ने से रोकने में सहायक माना जाता है। इन छोटे-छोटे उपायों को नियमित रूप से अपनाकर बारिश के पूरे मौसम में घर को सीलन, बदबू और फफूंद जैसी परेशानियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।




















