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डिजिटल बस से नोएडा के गरीब बच्चों को मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं वाली लैब बनी चलती-फिरती क्लासरूमशिक्षा
20 अग॰ 2026, 3:18 pm (68 दिन पहले)· 2

डिजिटल बस से नोएडा के गरीब बच्चों को मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं वाली लैब बनी चलती-फिरती क्लासरूम

नोएडा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए स्पार्क मिंडा ग्रुप ने एक अत्याधुनिक डिजिटल बस शुरू की है। वातानुकूलित बस के भीतर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अलग-अलग बैचों में 15-15 बच्चों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को डिजिटल क्रांति से जोड़ने के लिए एक अनुकरणीय पहल की शुरुआत की गई है। स्पार्क मिंडा ग्रुप द्वारा संचालित एक विशेष डिजिटल बस को पूरी तरह से आधुनिक चलती-फिरती क्लासरूम में बदल दिया गया है। इस अनोखे वाहन का मुख्य उद्देश्य उन जरूरतमंद बच्चों को कंप्यूटर की मुफ्त शिक्षा प्रदान करना है जो महंगे कोचिंग संस्थानों या निजी कंप्यूटर लैब का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। इस डिजिटल बस के जरिए बच्चे न केवल कंप्यूटर चलाना सीख रहे हैं, बल्कि भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए खुद को तैयार भी कर रहे हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस हाई-टेक क्लासरूम

यह डिजिटल बस किसी सामान्य परिवहन वाहन जैसी नहीं है, बल्कि इसे अंदर से पूरी तरह से एक स्मार्ट क्लासरूम के रूप में तैयार किया गया है। वाहन के भीतर बच्चों की पढ़ाई के लिए आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, एक इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड और बैठने के लिए आरामदायक कुर्सियां लगाई गई हैं। मौसम की चुनौतियों से बच्चों को बचाने के लिए पूरे वाहन को वातानुकूलित यानी एसी बनाया गया है, जिससे भीषण गर्मी या बारिश के दौरान भी पठन-पाठन का कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहता है।

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सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बस के भीतर उच्च मानकों का पालन किया गया है। पूरी बस में बिजली की सुरक्षित वायरिंग की गई है और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फायर सेफ्टी यानी अग्निशामक उपकरण स्थापित किए गए हैं। इन आधुनिक सुविधाओं की बदौलत बच्चों को बाहर खुले में या असुविधाजनक परिस्थितियों में बैठने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और वे एक सुरक्षित व शांत वातावरण में ध्यान केंद्रित कर पढ़ाई कर पाते हैं।

व्यवस्थित बैच और व्यक्तिगत प्रैक्टिकल प्रशिक्षण

डिजिटल बस में कक्षाओं का संचालन प्रतिदिन सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक किया जाता है। पूरे दिन के समय को एक-एक घंटे की पारियों यानी अलग-अलग बैचों में विभाजित किया गया है। हर घंटे एक नया बैच बस के अंदर प्रवेश करता है, जिससे सीमित स्थान होने के बावजूद अधिकतम बच्चों को प्रशिक्षण का अवसर मिल पाता है।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक समय में केवल 15 बच्चों को ही बस में बैठने की अनुमति दी जाती है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रत्येक बच्चे को काम करने के लिए अलग कंप्यूटर दिया जाता है। बच्चे केवल बोर्ड पर देखकर या किसी दूसरे को देखकर सीखने के बजाय खुद अपने हाथों से कंप्यूटर पर प्रैक्टिकल करते हैं। बस में मौजूद योग्य प्रशिक्षक बच्चों को कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान, टाइपिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम की जानकारी और आवश्यक डिजिटल टूल्स का उपयोग करना सिखाते हैं। छोटा बैच होने के कारण शिक्षक हर बच्चे की सीखने की गति और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं पर विशेष ध्यान दे पाते हैं।

मुफ्त शिक्षा से दूर हो रही आर्थिक विषमता

आज के दौर में कंप्यूटर शिक्षा किसी भी बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य हो चुकी है, लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महंगे संस्थानों की फीस भरना एक बड़ी चुनौती होता है। स्पार्क मिंडा ग्रुप की इस पहल के तहत बच्चों से प्रशिक्षण या पाठ्य सामग्री के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यह पूरी तरह निशुल्क सेवा है, जिसके कारण झुग्गी-झोपड़ियों और ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी आधुनिक तकनीक से जुड़ पा रहे हैं।

एक बैच के पूरा होते ही दूसरे बैच के बच्चों को अंदर भेजा जाता है। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार चलने वाले इस चक्र से पूरे दिन में दर्जनों बच्चे लाभान्वित होते हैं। समयबद्ध और अनुशासित तरीके से चलने वाली यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक छात्र को तय समय सीमा के भीतर कंप्यूटर चलाने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

उज्ज्वल भविष्य और रोजगार की ओर बढ़ते कदम

वर्तमान समय में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और हर प्रकार की नौकरियों में कंप्यूटर की बेसिक समझ होना बेहद जरूरी हो गया है। छोटी उम्र में ही डिजिटल टूल्स और कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान मिलने से बच्चों में आत्मविश्वास का संचार हो रहा है। वे न केवल बुनियादी टाइपिंग सीख रहे हैं, बल्कि डिजिटल साक्षरता के जरिए इंटरनेट और जरूरी सॉफ्टवेयर का सही इस्तेमाल भी समझ रहे हैं।

शुरुआती उम्र में मिला यह तकनीकी ज्ञान इन बच्चों को आगे की पढ़ाई में मदद करेगा और भविष्य में उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। स्पार्क मिंडा ग्रुप की यह डिजिटल बस नोएडा के गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा का नया सवेरा ला रही है और समाज के पिछड़े वर्गों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।

सवाल-जवाब

नोएडा में चल रही डिजिटल बस का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को बिल्कुल मुफ्त में बुनियादी से लेकर जरूरी डिजिटल टूल्स की कंप्यूटर शिक्षा देना है।
डिजिटल बस किस संस्था द्वारा संचालित की जा रही है?
यह पहल स्पार्क मिंडा ग्रुप द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी के तहत चलाई जा रही है।
डिजिटल बस के अंदर कौन-कौन सी सुविधाएं मौजूद हैं?
बस के अंदर आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल बोर्ड, वातानुकूलन (एसी), सुविधाजनक बैठने की जगह, सुरक्षित बिजली व्यवस्था और फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हैं।
कक्षाओं का समय और बैच की व्यवस्था क्या है?
कक्षाएं रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलती हैं। हर घंटे नया बैच बदलता है और एक समय में 15 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
क्या बच्चों से कंप्यूटर प्रशिक्षण का कोई शुल्क लिया जाता है?
नहीं, इस डिजिटल बस में प्रशिक्षण लेने के लिए बच्चों से किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती है, यह पूरी तरह निशुल्क है।
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