कभी अपनी प्रशासनिक कमियों और व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में रहने वाला कानपुर का चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अब देश भर के विद्यार्थियों के बीच एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में इस प्रतिष्ठित संस्थान में देश के 21 अलग-अलग राज्यों से छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है। यहां स्नातक और परास्नातक स्तर के 59 से अधिक विभिन्न पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें विद्यार्थियों ने बड़े पैमाने पर दाखिला लिया है। दूसरे प्रदेशों से आने वाले इन युवाओं के कारण परिसर का शैक्षिक माहौल काफी समृद्ध हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की प्रतिष्ठा भी तेजी से मजबूत हो रही है।
व्यवस्थाओं में सुधार और प्रशासनिक सख्ती का असर
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और कमियों पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार लाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। प्रशासन ने शिक्षा के स्तर को सुधारने, नए और उपयोगी पाठ्यक्रम शुरू करने तथा परिसर में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। इस प्रशासनिक सख्ती और सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिसके चलते लगातार विद्यार्थियों का रुझान इस संस्थान की तरफ बढ़ रहा है और दूसरे राज्यों के युवा भी यहां प्रवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों से परिसर में बढ़ी रौनक
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर मुकेश श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से प्रत्येक वर्ष एक निश्चित कोटा निर्धारित किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत स्नातक स्तर पर 15 प्रतिशत और परास्नातक स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं, जिन पर देश के किसी भी कोने से आने वाले विद्यार्थी आवेदन करने के लिए पात्र होते हैं। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत इस बार 21 राज्यों के मेधावी छात्र चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पहुंचे हैं। जब देश के अलग-अलग राज्यों के युवा एक साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो इससे उन्हें एक-दूसरे की क्षेत्रीय भाषाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और वैचारिक दृष्टिकोण को नजदीक से जानने व समझने का अवसर मिलता है। कक्षा की पढ़ाई के अलावा अनुसंधान कार्यों और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी विद्यार्थियों को विविधतापूर्ण अनुभव प्राप्त होते हैं।
हजारों छात्र कर रहे हैं अध्ययन, आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर
वर्तमान समय में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर और इसके अंतर्गत आने वाले संबद्ध महाविद्यालयों में कुल 2596 छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षा पूरी कर रहे हैं। संस्थान अब पारंपरिक कृषि विज्ञान की शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ आधुनिक युग की तकनीकों को भी तेजी से जोड़ रहा है। इस सत्र से विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग जैसी एडवांस्ड तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया जाएगा। आज के समय में कृषि के क्षेत्र में तकनीक का दखल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। फसल की सेहत पर नजर रखने, सटीक मौसम का अनुमान लगाने, मिट्टी के नमूनों की जांच करने और कुल उत्पादन को बढ़ाने जैसे तमाम कार्यों में आधुनिक तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में इन आधुनिक विषयों का ज्ञान मिलने से युवा भविष्य की कृषि संबंधी चुनौतियों और जरूरतों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेंगे।
पीएचडी के लिए व्यापक विकल्प और शोध को बढ़ावा
उच्च शिक्षा और उच्च स्तरीय अनुसंधान के क्षेत्र में भी इस विश्वविद्यालय में छात्रों के पास अवसरों की कोई कमी नहीं है। संस्थान में इस समय कुल 43 विषयों में पीएचडी करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शोध कार्य की ओर कदम बढ़ाने वाले विद्यार्थियों के लिए रास्ते और अधिक प्रशस्त हो गए हैं। इसके अलावा स्नातक स्तर पर एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर फॉरेस्ट्री, फिशरीज और डेयरी साइंस समेत कृषि विज्ञान से जुड़े कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का पूरा प्रयास ऐसे पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने का है, जिनमें कृषि की पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान का बेहतरीन तालमेल देखने को मिले।
बदलती तस्वीर और छात्रों का बढ़ता हुआ अटूट विश्वास
एक ऐसा दौर भी था जब कानपुर का यह प्रमुख कृषि संस्थान अपनी आलोचनाओं और कमियों के कारण लगातार चर्चा का विषय बना रहता था, लेकिन अब यह अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के बढ़ते भरोसे के कारण सुर्खियों में है। कुल 21 अलग-अलग राज्यों से विद्यार्थियों का यहां आकर दाखिला लेना और ढाई हजार से अधिक युवाओं का विश्वविद्यालय व इसके संबद्ध महाविद्यालयों में नियमित रूप से अध्ययन करना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह संस्थान देश भर के मेधावी विद्यार्थियों के बीच अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को दोबारा हासिल कर चुका है और एक नए रूप में स्थापित हो रहा है।


















