राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) के नतीजों में देश भर के लाखों परीक्षार्थियों के बीच हरियाणा के रहने वाले पांशुल बंसल ने 99.99 पर्सेंटाइल हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 2 (AIR-2) प्राप्त की है। वहीं पंजाब के लुधियाना से ताल्लुक रखने वाले आर्यन गुप्ता ने कुल 715 अंक अर्जित कर ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR-1) का स्थान हासिल किया। देश की सबसे कठिन प्रतिस्पर्धी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक माने जाने वाले इस इम्तिहान में शीर्ष स्थान पाने वाले इन दोनों मेधावी छात्रों ने अपनी सफलता का पूरा खाका साझा किया है। उनकी रणनीतियों में बुनियादी अवधारणाओं की स्पष्टता, मॉक टेस्ट का सटीक विश्लेषण, विषयवार गलतियों को सुधारने का तरीका और निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं।
शुरुआती तैयारी और मजबूत कॉन्सेप्ट: पांशुल बंसल की AIR-2 हासिल करने की रणनीति
पांशुल बंसल की सफलता की यात्रा किसी एक दिन या एक साल की मेहनत का परिणाम नहीं है। उन्होंने कक्षा 8 में अध्ययन के दौरान ही NEET परीक्षा की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए थे। पांशुल ने अपनी पढ़ाई के शुरुआती दौर में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया कि हर विषय के मूल सिद्धांतों और कॉन्सेप्ट को गहराई से समझा जाए। उन्होंने बायोलॉजी और केमिस्ट्री के अध्ययन के लिए पूरी तरह से NCERT की प्रामाणिक किताबों को अपना आधार बनाया और उनके एक-एक अध्याय को गहराई से पढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोचिंग संस्थान एलेन करियर इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद केंद्र से मिले अध्ययन सामग्री का भी अनुशासित तरीके से उपयोग किया।
केवल सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय पांशुल ने जटिल और कठिन प्रश्नों को समझने के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) के प्रश्नों का भी नियमित अभ्यास किया। उनका मानना है कि जब छात्र अलग-अलग पैटर्न और उच्च कठिनाई स्तर वाले प्रतियोगी सवालों को हल करते हैं, तो उनकी सोचने और विश्लेषणात्मक क्षमता का दायरा व्यापक हो जाता है। इससे मुख्य परीक्षा में आने वाले अप्रत्याशित या कठिन प्रश्नों को देखकर घबराहट नहीं होती और छात्र सही दृष्टिकोण के साथ उत्तर तक पहुंच पाते हैं।
परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर पांशुल ने हर दिन मॉक टेस्ट देने का नियम बनाया। अंतिम कुछ महीनों के दौरान रोजाना मॉक टेस्ट आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के दौरान होने वाले मानसिक दबाव को संभालना और समय प्रबंधन में सुधार करना था। पांशुल के अनुसार
"मॉक टेस्ट से कमजोर अध्यायों, छोटी-छोटी गलतियों और समय प्रबंधन की कमियों की पहचान करने में मदद मिलती है।"
पांशुल का कहना है कि सिर्फ टेस्ट में शामिल होना ही काफी नहीं है, बल्कि टेस्ट के बाद अपनी गलतियों की समीक्षा करना और यह समझना कि गलती क्यों हुई, सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।
NEET की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पांशुल बंसल के 6 मुख्य मंत्र
भविष्य में NEET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करते हुए पांशुल ने 6 विशेष रणनीतिक कदम बताए हैं, जिन्हें अपनाकर कोई भी छात्र अपनी तैयारी को मजबूत बना सकता है
- विषयवार एरर नोटबुक तैयार करना: अभ्यास या टेस्ट के दौरान जो प्रश्न गलत हो जाएं या जिन टॉपिक्स में बार-बार भ्रम पैदा हो, उन्हें एक अलग एरर नोटबुक में दर्ज करें। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के लिए अलग-अलग कॉपियां बनाएं और नियमित अंतराल पर अपनी पुरानी गलतियों को दोहराएं ताकि परीक्षा हॉल में वे दोबारा न हों।
- अध्ययन के दौरान प्रश्न निर्माण की सोच रखना: किसी अध्याय को पढ़ते समय केवल तथ्यों को रटने के बजाय यह विचार करें कि परीक्षक इस टॉपिक से किस प्रकार का घुमावदार सवाल पूछ सकता है। इस प्रकार सोचने से विषय पर पकड़ मजबूत होती है और परीक्षा के पैटर्न को समझना आसान हो जाता है।
- किताब बंद करके आत्म-परीक्षण करना: किसी भी अध्याय को पूरा पढ़ने के बाद पुस्तक बंद कर दें। इसके बाद अपने दिमाग पर जोर डालकर आरेख, महत्वपूर्ण फॉर्मूले और मुख्य तथ्यों को बिना देखे कागज पर लिखने या याद करने का प्रयास करें। इससे यह साफ हो जाता है कि आपने वास्तव में कितना सीखा है।
- सामग्री बढ़ाने के बजाय बार-बार रिवीजन करना: नई-नई किताबों और अनगिनत अध्ययन सामग्रियों को जमा करने से बचें। जितना पढ़ा जा चुका है, उसी का बार-बार रिवीजन करना नए टॉपिक्स जोड़ने से कहीं अधिक फायदेमंद होता है। मजबूत रिवीजन ही सटीक उत्तर देने में मदद करता है।
- कमजोर अध्यायों को प्राथमिकता देना: अक्सर छात्र उन चैप्टर्स को बार-बार पढ़ते रहते हैं जिनमें वे पहले से ही अच्छे होते हैं। पांशुल की सलाह है कि अपना ज्यादा समय और ऊर्जा उन कमजोर अध्यायों पर लगाएं जहां नंबर कटने की आशंका सबसे अधिक रहती है।
- वीडियो लेक्चर के बजाय टेस्ट और विश्लेषण पर बल देना: लगातार घंटों तक सिर्फ वीडियो लेक्चर देखते रहने की आदत से बचें। इसकी जगह ज्यादा से ज्यादा टेस्ट पेपर हल करें और उनका गहन विश्लेषण करें, जिससे वास्तविक परीक्षा जैसी स्थिति के लिए रणनीति सुधर सके।
पांशुल बंसल ने छात्रों को यह भी सलाह दी कि तैयारी के दौरान बार-बार अपनी अध्ययन सामग्री, शिक्षक या रणनीति बदलने से बचना चाहिए। एक निश्चित योजना पर टिके रहना, गति और सटीकता पर ध्यान केंद्रित करना और सतत अभ्यास ही सफलता का वास्तविक मार्ग है।
कक्षा 11 से AIR-1 तक: आर्यन गुप्ता का 715 अंकों का स्कोरकार्ड और टाइम-टेबल
NEET UG 2026 में 715 अंकों के साथ पूरे भारत में शीर्ष स्थान (AIR-1) प्राप्त करने वाले आर्यन गुप्ता पंजाब के लुधियाना शहर से आते हैं। आर्यन के कुल स्कोर कार्ड पर नजर डालें तो उन्होंने बायोलॉजी विषय में 360 में से 360 का पूर्ण स्कोर हासिल किया, जबकि फिजिक्स में 180 अंक और केमिस्ट्री में 175 अंक प्राप्त किए। आर्यन ने अपनी इस सफलता का आधार कक्षा 11 से शुरू की गई अनुशासित पढ़ाई को बताया।
आर्यन ने अपनी स्कूली बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ NEET परीक्षा के लिए रोजाना 13 से 14 घंटे का कड़ा अध्ययन शेड्यूल बनाए रखा। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान मुख्य रूप से अपने कोचिंग संस्थान के स्टडी मटेरियल और अध्यापकों के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया। परीक्षा से कुछ महीने पहले उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अभ्यास की तीव्रता बढ़ा दी। आर्यन ने NEET परीक्षा से पहले लगभग 40 मॉक टेस्ट, कई सैंपल पेपर्स और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को पूरी गंभीरता से हल किया। आर्यन का कहना है
"सवालों को हल करने पर ध्यान दें और जितने ज्यादा मॉक टेस्ट दे सकते हैं, दें।"
उनके अनुसार, इतने सारे मॉक टेस्ट देने से परीक्षा के वास्तविक वातावरण को लेकर मन में बैठा डर दूर हो गया और प्रश्नों को हल करने का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया।
दोनों टॉपर्स की रणनीति में छिपा समान सफलता सूत्र
यदि पांशुल बंसल और आर्यन गुप्ता दोनों की तैयारी के तरीकों का विश्लेषण किया जाए, तो कुछ बातें बेहद समान नजर आती हैं। दोनों ही टॉपर्स ने केवल किताबों को पढ़ने या थ्योरी याद करने पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक प्रश्न समाधान पर जोर दिया। लगातार मॉक टेस्ट देना, टेस्ट में हुई अपनी गलतियों का बारीकी से विश्लेषण करना, कमजोर विषयों पर विशेष काम करना और NCERT की किताबों का बार-बार रिवीजन करना दोनों की सफलता के मुख्य आधार रहे हैं। किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सफलता पाने के लिए निरंतरता और सही दिशा में किया गया अभ्यास ही सबसे कारगर साबित होता है।


















