मेघालय सरकार ने स्पष्ट किया है कि तुरा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में MBBS के पहले शैक्षणिक सत्र को शुरू करने के लिए फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की जा सकती। राज्य विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री वेलाडमिकी श्यल्ला ने जानकारी दी कि कॉलेज के बुनियादी ढांचे का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद शैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण संस्थान का परिचालन अटका हुआ है।
शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी बनी मुख्य बाधा
मेडिकल कॉलेज में पहले बैच के दाखिले में देरी का सबसे मुख्य कारण नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निर्धारित मानकों और वर्तमान में तैनात शिक्षकों की संख्या के बीच बड़ा अंतर है। NMC के नियमों के मुताबिक 50 सीट वाले MBBS कॉलेज को मान्यता और संचालन के लिए कम से कम 97 संकाय सदस्यों (फैकल्टी) की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, तुरा मेडिकल कॉलेज में अभी केवल 40 शिक्षक ही तैनात हैं, जिससे 57 महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं।
वरिष्ठ शैक्षणिक पदों पर रिक्ति की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। कुल 14 स्वीकृत प्रोफेसर पदों के मुकाबले संस्थान में केवल 3 प्रोफेसर ही कार्यरत हैं। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर के स्वीकृत 20 पदों के सापेक्ष मात्र 3 पद भरे जा सके हैं। सहायक पदों की बात करें तो 25 की आवश्यकता के मुकाबले 16 असिस्टेंट प्रोफेसर, 15 के मुकाबले 10 ट्यूटर और 23 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 8 सीनियर रेजिडेंट ही तैनात हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्यल्ला ने इसकी तुलना शिलोंग मेडिकल कॉलेज से करते हुए बताया कि वहां 50 सीटों के लिए NMC निरीक्षण के दौरान 83 फैकल्टी सदस्य मौजूद थे, जिनकी संख्या 24 अगस्त 2026 तक बढ़कर 84 हो चुकी है।
भर्ती प्रयास और जनशक्ति समिति की सिफारिशें
संकाय सदस्यों की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 21 अगस्त 2025 को संयुक्त सचिव डॉ रेजिना सीएच मारक की अध्यक्षता में एक जनशक्ति आकलन समिति (मैनपावर असेसमेंट कमेटी) का गठन किया था। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 59 संविदात्मक (कॉन्ट्रैक्चुअल) पदों के सृजन को मंजूरी दी थी।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 5 राष्ट्रीय और 3 स्थानीय समाचार पत्रों में लगातार तीन चक्रों में विज्ञापनों का प्रकाशन किया। इसके अतिरिक्त गारो हिल्स क्षेत्र में सेवाएं दे रहे सरकारी डॉक्टरों के साथ प्रत्यक्ष परामर्श बैठकें आयोजित की गईं ताकि खाली पदों को भरा जा सके। इन तमाम प्रयासों के बावजूद पर्याप्त योग्य उम्मीदवार न मिलने के कारण स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि पिछले एक वर्ष के सघन प्रयासों के बाद भी वर्तमान संकाय स्थिति को देखते हुए किसी निश्चित उद्घाटन तिथि की घोषणा करना संभव नहीं है।
बुनियादी ढांचा और निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति
एक तरफ जहां शिक्षकों की भर्ती चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ परिसर के निर्माण कार्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य सरकार के नए आकलन के अनुसार पूरे कॉलेज परियोजना का लगभग 83 प्रतिशत ढांचागत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
कॉलेज के मुख्य एकेडमिक ब्लॉक का 80 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है, जबकि छात्र और छात्राओं के छात्रावास (हॉस्टल) का निर्माण 78 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। प्रशासनिक और वरिष्ठ आवास सुविधाओं में टाइप-5 स्टाफ क्वार्टर और डीन आवास दोनों 99 प्रतिशत तक बनकर तैयार हैं। इसके अलावा परिसर का इलेक्ट्रिकल सब-स्टेशन 85 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है। हालांकि अन्य कर्मचारियों के आवासों में टाइप-2 और टाइप-3 क्वार्टर का कार्य 50 प्रतिशत तथा टाइप-4 क्वार्टर का काम 40 प्रतिशत पर रुका है।
अस्पताल सुविधाओं की बात करें तो संस्थान के पास वर्तमान में तुरा सिविल अस्पताल के 200 बेड और तुरा एमसीएच अस्पताल के 50 बेड मिलाकर कुल 250 बिस्तरों की क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता 50 सीट के MBBS कॉलेज के लिए NMC द्वारा निर्धारित 220 बिस्तरों की अनिवार्य आवश्यकता से अधिक है। हालांकि अस्पताल के अतिरिक्त निर्माण कार्य अभी शुरुआती दौर में हैं, जिनमें 80 बेड वाला ब्लॉक 40 प्रतिशत और 150 बेड वाला ब्लॉक केवल 25 प्रतिशत ही बन पाया है।
दशक भर पुरानी परियोजना का इतिहास, बजट और भूमि विवाद
स्वास्थ्य मंत्री ने यह विस्तृत विवरण गाम्बेग्रे सीट से एनपीपी विधायक डॉ महताब चंडी ए संगमा द्वारा नियम 54(1) के तहत लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दिया। विधायक ने सदन में कॉलेज के बुनियादी ढांचे, भर्ती की स्थिति, शिक्षण अस्पताल की तैयारी, प्रस्तावित प्रबंधन मॉडल और वर्ष 2027-28 के शैक्षणिक सत्र की तैयारियों पर स्पष्ट जानकारी मांगी थी।
तुरा मेडिकल कॉलेज परियोजना की पृष्ठभूमि दिसंबर 2014 में टीसीआईएल के साथ 100 सीटों के कॉलेज के लिए हस्ताक्षरित समझौते (MoU) से जुड़ी है, जिसकी अनुमानित लागत 234 करोड़ रुपये रखी गई थी। बाद में 2017-18 में जिला अस्पतालों से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों की केंद्रीय योजना के तहत इस परियोजना को 189 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के साथ नए सिरे से मंजूरी दी गई। इसमें 170.10 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी और 19 करोड़ रुपये का राज्य अंश शामिल था।
इस परियोजना को भूमि चयन के कई विवादों के कारण वर्षों की देरी का सामना करना पड़ा। शुरुआत में तुरा सिविल अस्पताल के विस्तार का प्रस्ताव अतिक्रमण के कारण रद्द हुआ। इसके बाद बालग्रे में खोजी गई जमीन को इसलिए खारिज करना पड़ा क्योंकि वह अस्पताल से 17 किलोमीटर दूर थी, जो NMC के अधिकतम 10 किलोमीटर दूरी के नियम का उल्लंघन था। अंततः 2017 में दोल्देग्रे में भूमि चिह्नित की गई, जिसे 22 जनवरी 2019 को वन स्वीकृति मिली। बाद में दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शनों और मार्च 2020 में शुरू हुई कोविड-19 महामारी के कारण निर्माण कार्य बार-बार बाधित हुआ।


















