केंद्र सरकार ने ऑनलाइन फिल्म पायरेसी पर बड़ा शिकंजा कसते हुए अब तक 7,393 यूआरएल बंद करवाए हैं, जिनमें 4,996 टेलीग्राम चैनल और 1,263 वेबसाइट शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म पर फिल्मों की गैरकानूनी कॉपी परोसी जा रही थी।
सख्त कानून बना हथियार
सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम 2023 के जरिए सरकार ने पायरेसी रोकने के नियम और कड़े कर दिए हैं। इस कानून के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सीधे टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म और अन्य वेबसाइटों को नोटिस भेजकर पायरेटेड कॉन्टेंट हटवाने का अधिकार मिल गया है। पहले यह प्रक्रिया लंबी और अदालत पर निर्भर थी, अब मंत्रालय सीधे कार्रवाई कर सकता है।
शिकायत मिलते ही एक्शन
जब भी कोई कॉपीराइट धारक शिकायत दर्ज कराता है, मंत्रालय तुरंत उस कॉन्टेंट को हटाने या उस तक पहुंच रोकने की कार्रवाई शुरू कर देता है। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने खासतौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई है, जहां फिल्म पायरेसी से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। यह पूरी जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान सांसदों को दी।
हर साल हजारों करोड़ का नुकसान
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के बढ़ते चलन के बावजूद पायरेसी भारत के एंटरटेनमेंट कारोबार को गहरी चोट पहुंचा रही है, और सबसे ज्यादा असर फिल्मों और ओटीटी कॉन्टेंट पर पड़ रहा है। 2025 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक मुफ्त और विज्ञापन-समर्थित स्ट्रीमिंग सेवाओं ने म्यूजिक पायरेसी को काफी हद तक काबू में कर लिया है, लेकिन वीडियो पायरेसी अब भी बड़े स्तर पर चल रही है। इस वजह से इंडस्ट्री को सालाना करीब 22,400 करोड़ रुपये गंवाने पड़ते हैं। इसमें से ₹13,700 करोड़ रुपये का नुकसान सिनेमाघरों में रिलीज होने वाले कॉन्टेंट की पायरेसी से होता है, जबकि ₹8,700 करोड़ रुपये का नुकसान लोगों द्वारा गैरकानूनी तरीके से ओटीटी कॉन्टेंट देखने से होता है।
पायरेसी क्यों नहीं थम रही
विशेषज्ञों का मानना है कि वीडियो पायरेसी की सबसे बड़ी वजह यह है कि फिल्म निर्माता, टीवी प्रोड्यूसर और स्ट्रीमिंग कंपनियां अब तक ऐसा प्राइसिंग मॉडल तैयार नहीं कर पाई हैं जो हर आय वर्ग के दर्शकों के लिए मुफीद हो। इसके अलावा फिल्में और शो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बिखरे होने की वजह से दर्शकों के लिए सही तरीके से कॉन्टेंट ढूंढना और देखना मुश्किल हो जाता है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग पायरेसी का रास्ता चुन लेते हैं।



















