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दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद अभिजीत दीपके का दिलजीत दोसांझ को खुला पत्र, बोले मतभेद से आदर नहीं घटतामनोरंजन
31 अक्तू॰ 2026, 10:00 am (2 घंटे पहले)· 1

दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद अभिजीत दीपके का दिलजीत दोसांझ को खुला पत्र, बोले मतभेद से आदर नहीं घटता

दिल्ली में दिलजीत दोसांझ के लाइव कॉन्सर्ट में शामिल होने के बाद छात्र प्रदर्शन से जुड़े नेता अभिजीत दीपके ने सिंगर के नाम एक भावुक पत्र साझा किया। उन्होंने जून के छात्र आंदोलन पर दिलजीत की पुरानी टिप्पणी से उपजी नाराजगी भुलाकर रिश्ते सुधारने की बात कही।

संगीत और सामाजिक मुद्दों के बीच अक्सर कलाकारों की टिप्पणियों को लेकर चर्चाएं गर्म हो जाती हैं, लेकिन दिल्ली में आयोजित एक संगीत समारोह के बाद समझदारी और सम्मान की एक अलग तस्वीर सामने आई है। जून के महीने में दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के एक बयान से आहत हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित उनके लाइव कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर गायक के लिए एक विस्तृत खुला पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने पुरानी नाराजगी का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि एक वैचारिक असहमति किसी व्यक्ति के प्रति दशकों पुराने सम्मान और आत्मीयता को समाप्त नहीं कर सकती।

कॉन्सर्ट में मौजूदगी और सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश

अभिजीत दीपके ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित दिलजीत दोसांझ के भव्य कॉन्सर्ट में व्यक्तिगत रूप से शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी एक सेल्फी भी ली और उसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने सिंगर के नाम एक खुला पत्र पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने जून महीने के घटनाक्रम और अपने मन की भावनाओं को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखा। पत्र में उन्होंने पुराने गिले-शिकवे मिटाने का आह्वान करते हुए पंजाबी में लिखा कि उन्हें छोटा भाई मानकर पुरानी बातों पर मिट्टी डाल देनी चाहिए।

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अपने इस सार्वजनिक नोट में अभिजीत दीपके ने उस समय दिलजीत की आलोचना करने की वास्तविक वजह भी साफ की। उन्होंने लिखा कि जून के महीने में जब वे अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उस दौरान गायक की टिप्पणी से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ठेस पहुंची थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दुख की वजह कोई व्यक्तिगत रंजिश या दुश्मनी नहीं थी। इसके विपरीत, वे हमेशा दिलजीत को एक ऐसे संवेदनशील कलाकार के रूप में देखते रहे हैं जो सही मुद्दों पर मुखर होकर खड़े होते हैं, जैसा कि खुद गायक भी कई मौकों पर कहते आए हैं। इसी अपेक्षा के कारण उस समय उनके शब्दों से निराशा हुई थी।

शिकागो से दिल्ली तक प्रशंसक होने का सफर और आपसी आदर

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ने अपनी पोस्ट में इस साल की शुरुआत में आयोजित दिलजीत के एक अन्य कॉन्सर्ट की तस्वीर भी साझा की। उन्होंने बताया कि कलाकारों के प्रति उनकी दीवानगी किसी एक बयान से खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा कि वे हमेशा से उनके बड़े प्रशंसक रहे हैं और आने वाले समय में भी यह लगाव बरकरार रहेगा। वे आज भी नियमित रूप से दिलजीत के गाने सुनते हैं।

अपनी बात को पुख्ता करते हुए दीपके ने याद दिलाया कि भारत वापस आने से ठीक पहले इसी वर्ष मई में वे अमेरिका के शिकागो में आयोजित दिलजीत के कॉन्सर्ट को देखने विशेष रूप से पहुंचे थे। उन्होंने लिखा कि उनका यह जुड़ाव सिर्फ उनके संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी वे गायक का बहुत आदर करते हैं। अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरे जुड़े रहते हुए भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव दिलाने की दिलजीत की शैली और उनके साहस की वे हमेशा प्रशंसा करते रहे हैं। दीपके के अनुसार, जब आप किसी को बहुत ऊंचे पायदान पर रखते हैं, तो उसकी बात से थोड़ी ज्यादा पीड़ा होती है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी एक मुद्दे पर असहमति या गलतफहमी कभी भी उस बुनियादी सम्मान को कम नहीं कर सकती जो उनके दिल में गायक के लिए है।

प्रसिद्ध गीत की पंक्तियों के साथ गिले-शिकवे मिटाने की अपील

पत्र के समापन में अभिजीत दीपके ने खुद को गायक का छोटा भाई बताते हुए पुरानी कड़वाहट को पूरी तरह भुलाने की बात कही। उन्होंने दिलजीत के बेहद लोकप्रिय गीत जी.ओ.ए.टी. (G.O.A.T.) की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया, जो दोस्तों और विरोधियों दोनों के प्रति शालीन और मधुर व्यवहार बनाए रखने का संदेश देती हैं। उन्होंने लिखा कि जब एक गबरू अपने वैरी से भी मीठा बोलता है, तो फिर अपनों के लिए दिल में खटास रखने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। इस तरह उन्होंने पुरानी बहस को गरिमापूर्ण तरीके से समाप्त करने का आग्रह किया।

क्या था ‘मैं कलाकार हूं’ से जुड़ा पूरा विवाद?

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि जून के महीने में तैयार हुई थी, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय सोशल मीडिया पर आयोजित एक इंस्टाग्राम लाइव सत्र के दौरान किसी प्रशंसक ने दिलजीत से इस छात्र आंदोलन को लेकर सवाल पूछ लिया था। इसके जवाब में दिलजीत ने बेहद सतर्क रुख अपनाते हुए कहा था कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक से दूर रखा जाना चाहिए क्योंकि वे एक कलाकार हैं, कोई राजनेता नहीं।

उसी बातचीत में गायक ने यह भी जोड़ा था कि दुनिया में हर व्यवस्था या स्थिति हमेशा पूरी तरह सही नहीं हो सकती। अपनी बात को दार्शनिक आधार देते हुए उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की एक पवित्र पंक्ति का पाठ भी किया था, जिसका आशय है कि पूरी दुनिया दुखी है और केवल वही सुखी है जिसे ईश्वर के नाम का सहारा है। दिलजीत ने तब यह भी कहा था कि अक्सर अलग-अलग विवादों में उनका नाम घसीट लिया जाता है, जबकि वे हमेशा सभी पक्षों की भलाई और शांति चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें उस पूरे छात्र आंदोलन के सभी पहलुओं की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से बचना चाहते हैं।

छात्रों के समर्थन में बाद में जारी हुआ था गायक का बयान

शुरुआत में दिलजीत के इस बयान से कई युवाओं और प्रदर्शनकारियों को काफी निराशा हुई थी, क्योंकि इससे पहले वे पंजाब के सामाजिक और जमीनी मुद्दों पर निरंतर अपनी स्पष्ट राय रखते आए थे। हालांकि, विवाद के लगभग एक महीने बाद स्थिति में बदलाव देखा गया था। 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के पश्चात दिलजीत ने सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी थी।

उस समय गायक ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की थी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की थी कि वे शांतिपूर्वक छात्रों की मांगों पर ध्यान दें और उनकी समस्याएं सुनें। अपने उस बयान में उन्होंने लिखा था कि जनता की आवाज ही वास्तव में ईश्वर की आवाज होती है। इसके साथ ही दिलजीत ने अपने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए यह भी दर्द बयां किया था कि पूर्व में किसानों के आंदोलन का खुला समर्थन करने के कारण उन्हें कई हलकों में अवांछित आलोचनाओं और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ा था, यहां तक कि कुछ लोगों ने उन्हें देश विरोधी तक कह दिया था। इस ऐतिहासिक दबाव के कारण वे संवेदनशील राजनीतिक विवादों पर बहुत सोच-समझकर प्रतिक्रिया देते रहे हैं।

सवाल-जवाब

अभिजीत दीपके ने दिलजीत दोसांझ के किस कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया?
अभिजीत दीपके ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित दिलजीत दोसांझ के लाइव कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया।
अभिजीत दीपके किस संगठन से जुड़े हैं?
अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और नेता हैं।
जून के महीने में दिलजीत दोसांझ ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा था?
दिलजीत ने इंस्टाग्राम लाइव पर कहा था कि वे एक कलाकार हैं, राजनेता नहीं, इसलिए उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रखा जाए।
दिलजीत दोसांझ ने बाद में छात्रों का समर्थन कब और कैसे किया?
20 जुलाई को संसद मार्च के बाद दिलजीत ने हिंसा की निंदा करते हुए प्रशासन से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की थी।
दीपके ने अपने पत्र में दिलजीत के किस गाने का जिक्र किया?
दीपके ने दिलजीत के मशहूर गीत जी.ओ.ए.टी. (G.O.A.T.) की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए गिले-शिकवे मिटाने की बात कही।
क्या दीपके भारत से बाहर भी दिलजीत के शो में शामिल हुए थे?
हां, दीपके ने इसी साल मई में भारत लौटने से पहले अमेरिका के शिकागो में दिलजीत का कॉन्सर्ट देखा था।
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