उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक गरिमामय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और समरसता पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वतंत्र भारत के भीतर अब दोहरी व्यवस्था या दोहरे कानूनों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। देश अब पूरी तरह एक विधान, एक प्रधान और एक निशान के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि जब समाज जाति, क्षेत्र या भाषा के आधार पर बिखरता है, तभी राष्ट्र की एकता पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाले षड्यंत्रों के खिलाफ सभी देशवासियों को एकजुट होकर मुकाबला करना होगा, और यही सरदार पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राष्ट्रीय एकता के लिए आंतरिक विभाजन सबसे बड़ा खतरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सामाजिक विखंडन को एक गंभीर रोग की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी स्टेमिना कमजोर पड़ने पर विभिन्न बीमारियां उस पर हावी हो जाती हैं, ठीक उसी तरह जब समाज में जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद जैसी कुरीतियां पनपती हैं, तो समाज की आंतरिक शक्ति क्षीण हो जाती है। जब प्रतिरोधक क्षमता समाप्त होती है, तब बाहरी ताकतों और आक्रांताओं को हमला करने का अवसर मिल जाता है।
सीएम योगी ने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग जिन्ना को अपना आदर्श मानते हैं, वे कभी भी सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुयायी नहीं बन सकते। लौहपुरुष का सच्चा अनुयायी केवल वही व्यक्ति हो सकता है जिसके दिल और दिमाग में राष्ट्रवाद की प्रखर भावना हो। सरदार पटेल के विचारों पर चलने का दावा केवल वही कर सकता है जो भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को हर निजी और राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखे। उन्होंने विभाजनकारी तत्वों और समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और अखंडता को कमजोर करने के जो भी कुत्सित प्रयास चल रहे हैं, उनका संगठित होकर जवाब देना आवश्यक है।
सरदार पटेल का ऐतिहासिक योगदान और 563 रियासतों का विलय
सीएम योगी ने भारत माता के महान सपूत और प्रखर राष्ट्रवादी शिल्पी सरदार पटेल को उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्मरण कराया कि 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया था, जिसके अंतर्गत देश भर में विविध प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लौहपुरुष की ऐतिहासिक स्मृति को चिरस्थायी रूप देने के संदर्भ में उन्होंने गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर सरदार सरोवर बांध के पास स्थापित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह विशालकाय प्रतिमा सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व और उनके अदम्य साहस का सच्चा प्रतिनिधित्व करती है। स्वतंत्रता के समय भारत को एक सूत्र में पिरोते हुए सरदार पटेल ने 563 से अधिक देशी रियासतों का भारतीय गणराज्य में शांतिपूर्ण और दृढ़तापूर्वक विलय कराया था, जो आधुनिक विश्व इतिहास का एक अभूतपूर्व अध्याय है।
जूनागढ़ और हैदराबाद के विलय का ऐतिहासिक संदर्भ
आजादी के तुरंत बाद उपजी जटिल परिस्थितियों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में जूनागढ़ और हैदराबाद दो ऐसी रियासतें थीं जिन्होंने भारत संघ में शामिल होने से साफ आनाकानी की थी। उन्होंने कहा कि जब जूनागढ़ के नवाब ने भारतीय गणराज्य में शामिल होने को लेकर अड़ियल रुख अपनाया, तब सरदार पटेल ने उसे कड़ा संदेश दिया कि यदि शांतिपूर्ण बातचीत से सहमति नहीं बनी तो भारत दूसरा तरीका भी अपनाना अच्छी तरह जानता है। इस दृढ़ चेतावनी के बाद जूनागढ़ का नवाब अपने बच्चों तक को छोड़कर पाकिस्तान भाग गया, और जूनागढ़ भारत का अभिन्न अंग बना।
इसी प्रकार हैदराबाद रियासत के निजाम के दौर का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उस समय वहां व्यापक अत्याचार और कत्लेआम हुआ, जहां हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों को निशाना बनाया जाता था और जबरन धर्मांतरण कराया जाता था। वहां किसी भी प्रकार के नियमों या प्रोटोकॉल की परवाह नहीं की जाती थी। लेकिन जब लौहपुरुष सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ता दिखाई और सख्त चेतावनी दी, तो निजाम को भी झुकना पड़ा और भागने के लिए विवश होना पड़ा। परिणामस्वरूप, हैदराबाद और उसके अधीन आने वाले समस्त क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा बने।
कश्मीर नीति और धारा 370 को लेकर कांग्रेस पर निशाना
सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता के समय जम्मू-कश्मीर के मामले में अपनाई गई नीति को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और पंडित जवाहरलाल नेहरू पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने तमाम रियासतों का सफल एकीकरण किया, लेकिन केवल कश्मीर का मामला पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने अधिकार क्षेत्र में रखा था। इसका नतीजा यह हुआ कि जब कबाइलियों ने हमला किया, तो पाक अधिकृत कश्मीर पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा हो गया, जो आज तक बना हुआ है। उस समय वहां हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समाज के लोगों का बड़े पैमाने पर कत्लेआम हुआ, जिसके चलते आज वहां इनकी आबादी न के बराबर रह गई है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के प्रबल विरोध के बावजूद पंडित नेहरू और कांग्रेस ने कश्मीर में धारा 370 लागू करने का पाप किया था, जिसने दशकों तक देश की एकता को आहत किया। हालांकि, एक भारत श्रेष्ठ भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के ऐतिहासिक निर्णय से धारा 370 को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया। आज कश्मीर भारत का उसी तरह सामान्य और अभिन्न अंग बन चुका है, जैसे लखनऊ और उत्तर प्रदेश हैं।
एक देश में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान का संकल्प
संबोधन के समापन चरण में मुख्यमंत्री ने बल देकर कहा कि वर्तमान भारत में अब दो अलग-अलग व्यवस्थाओं या कानूनों की गुंजाइश नहीं है। देश अब पूरी तरह एक देश, एक विधान, एक प्रधान और एक निशान के मूल मंत्र पर संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और देश के तमाम स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने जिस सशक्त और एकीकृत भारत की कल्पना की थी, वह सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यकुशलता से साकार हुआ है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि इस सपने को जीवंत रखने और भारत की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर अपना योगदान देना होगा।



















