कोटा स्थित एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी इन दिनों कृषि जिंसों की जबर्दस्त आवक का केंद्र बनी हुई है। अनाज से लदी ट्रॉलियों और वाहनों के लगातार पहुंचने से मंडी का हर कोना फसलों से अटा पड़ा है। हर रोज करीब डेढ़ से दो लाख बोरी कृषि उपज की आवक दर्ज की जा रही है। दूर-दराज के इलाकों से बड़ी तादाद में काश्तकार अपने महीनों के पसीने की कमाई लेकर यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन रिकॉर्ड तोड़ आवक की इस खुशी के बीच किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं। मंडी परिसर में पर्याप्त टीन शेड नहीं होने की वजह से अनाज की लाखों बोरियां खुले मैदान में रखने की लाचारी पैदा हो गई है। आसमान में छाते बादलों और मौसम के तेजी से बदलते मिजाज ने अन्नदाताओं की नींद उड़ा दी है।
मौसम के करवट लेने से उपज खराब होने की आशंका
अचानक बारिश होने की स्थिति में खुले आसमान तले रखी लाखों बोरी उपज सीधे पानी की जद में आ सकती है। किसानों का कहना है कि जरा सी बरसात उनकी महीनों की खून-पसीने की मेहनत पर पानी फेर सकती है। अनाज भीगने से दाने की चमक खत्म हो जाती है, उसमें नमी बढ़ जाती है और सड़न का खतरा मंडराने लगता है। गुणवत्ता बिगड़ने पर बाजार में फसल के वाजिब दाम नहीं मिलते और खरीददार औने-पौने भाव लगाने लगते हैं। इसी आशंका के चलते किसान खुद अपने स्तर पर तिरपाल की व्यवस्था करके ढेरियों और बोरियों को ढंकने में जुटे हुए हैं। मंडी परिसर के खुले मैदानों में चारों तरफ तिरपालों से ढकी बोरियों के ऊंचे-ऊंचे ढेर नजर आ रहे हैं, जो किसानों की लाचारी की कहानी बयां कर रहे हैं।
शेड की भारी किल्लत और किसानों का आक्रोश
मंडी पहुंचे काश्तकारों ने मंडी प्रबंधन पर बुनियादी व्यवस्थाओं की अनदेखी का खुला आरोप लगाया है। किसानों का साफ कहना है कि एशिया की इतनी विशालकाय मंडी होने के बावजूद टीन शेड का दायरा बेहद सीमित है। शेड के नीचे जगह न मिलने की स्थिति में उनके पास खुले मैदान में बोरियां उतारने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता। किसानों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि अगर बेमौसम बारिश में उपज बर्बाद होती है, तो उस नुकसान की भरपाई का कोई ठोस तंत्र नहीं है। फसल खराब होने पर न तो प्रशासन से कोई उचित मुआवजा मिलता है और न ही बीमा कंपनियों से तुरंत राहत हाथ लगती है। ऐसे में समूचा आर्थिक नुकसान अकेले किसान की जेब पर भारी पड़ता है, जिससे खेती की लागत निकालना भी मुहाल हो जाता है।
मंडी समिति का दावा, अब पटरी पर लौट रहे हालात
दूसरी तरफ, किसानों के आरोपों के बीच मंडी प्रशासन अपनी तैयारियों को पूरी तरह चाक-चौबंद बता रहा है। मंडी सचिव मनोज मीणा का कहना है कि किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंडी समिति की तरफ से तिरपाल मुहैया करवाए जा रहे हैं। इसके साथ ही बहुत से काश्तकार एहतियात के तौर पर अपने साथ भी तिरपाल लेकर आ रहे हैं। सचिव के मुताबिक, हालिया त्योहारों के दौरान एक साथ जिंसों की आवक में भारी उछाल आने से कुछ दिनों तक मंडी परिसर के संसाधनों और जगह पर भारी दबाव बन गया था। हालांकि अब धीरे-धीरे उठान होने से मंडी में जगह खाली होने लगी है, जिससे किसानों को उपज उतारने और नीलामी में सहूलियत मिल रही है। मंडी सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसानों को उनकी कृषि जिंसों के काफी अच्छे और प्रतिस्पर्धी दाम मिल रहे हैं। इसके बावजूद रोजाना लाखों बोरियों की निरंतर आमद के चलते खुले में पड़ी फसलों को मौसम की मार से सुरक्षित बचाए रखना इस वक्त का सबसे बड़ा इम्तिहान बना हुआ है।



















