सिनेमा जगत में अक्सर अभिनेताओं की सफलता को टिकट खिड़की के संग्रह से मापा जाता है, मगर कुछ कलाकार आंकड़ों की इस होड़ से अलग अपनी प्राथमिकताओं पर टिके रहते हैं। हाल के समय में स्त्री और स्त्री 2 जैसी बेहद सफल फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकीं श्रद्धा कपूर ने अपनी आगामी पेशकश ईठा के प्रचार के दौरान इसी सोच को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना से जुड़ते समय कमाई का गणित उनके निर्णय को प्रभावित नहीं करता।
कहानी की मजबूती सबसे बड़ी प्राथमिकता
अपनी नई परियोजना के प्रचार कार्यक्रम में बात करते हुए श्रद्धा ने बताया कि उनका ध्यान केवल एक सार्थक पटकथा का हिस्सा बनने पर रहता है। उन्होंने माना कि वे कभी यह मानकर काम नहीं करतीं कि उन्हें किसी पुराने कीर्तिमान को ध्वस्त करना है या कोई असाधारण व्यापारिक उपलब्धि हासिल करनी है। उनके अनुसार, जब तक किसी कहानी में दर्शकों को बांधने का दम न हो, तब तक बाकी चीजें बेमानी साबित होती हैं।
इसी वजह से वे साल-दर-साल ढेरों फिल्में करने की बजाय लंबी अवधि का अंतराल लेने से भी पीछे नहीं हटतीं। श्रद्धा कपूर ने अपने काम करने के तरीके पर कहा, 'मेरे लिए अच्छी फिल्म मायने रखती है।' उन्होंने समझाया कि अगर किसी बेहतरीन विषय के लिए उन्हें दो साल तक एक ही फिल्म पर काम करना पड़े या अगला प्रोजेक्ट चुनने में वक्त लगे, तो उन्हें इसमें कोई हिचक नहीं होती।
सिनेमा को जेंडर के आधार पर बांटने का विरोध
फिल्मों के वर्गीकरण पर अपने विचार रखते हुए श्रद्धा ने कहा कि कहानियों को महिला केंद्रित या पुरुष केंद्रित जैसे संकीर्ण खांचों में बांटना उचित दृष्टिकोण नहीं है। उनका मानना है कि फिल्म उद्योग को केवल उम्दा आख्यानों की दरकार है, न कि इस बात की कि पर्दे पर कहानी को कौन आगे बढ़ा रहा है। जेंडर के चश्मे से कहानियों को देखना सिनेमा की संभावनाओं को सीमित करता है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी फिल्म की व्यावसायिक कामयाबी कई बार संयोग और समय के तालमेल पर निर्भर करती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका नियंत्रण किसी अकेले शख्स के वश में नहीं होता। अपनी नई भूमिका को लेकर उन्होंने गहरी संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि वे इस पूरी यात्रा का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रही हैं।
विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है ईठा
श्रद्धा की अगली फिल्म ईठा एक वास्तविक जीवन पर आधारित नाटक है, जिसकी कमान निर्देशक लक्ष्मण उतेकर संभाल रहे हैं। इस फिल्म में श्रद्धा महाराष्ट्र की ऐतिहासिक लोक कला तमाशा और लावणी की दिग्गज साधिका विठाबाई नारायणगांवकर का चरित्र निभा रही हैं। पूरी कहानी एक ऐसी जुझारू महिला के संघर्ष को दर्शाती है, जिन्होंने तमाम सामाजिक बाधाओं और विपरीत परिस्थितियों को पार कर कला के क्षेत्र में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी।
तमाशा और पारंपरिक लावणी के ताने-बाने में बुनी गई इस फिल्म में संगीत, नृत्य और एक लोक कलाकार की निजी लड़ाइयों को बेहद करीब से पेश किया जाएगा। इस परियोजना में श्रद्धा के साथ मोहम्मद जीशान अय्यूब और सिद्धार्थ जाधव भी प्रमुख भूमिकाओं में स्क्रीन साझा करते दिखाई देंगे। फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी दिनेश विजान और लक्ष्मण उतेकर ने संभाली है, जो मैडॉक फिल्म्स तथा कठपुतली क्रिएशंस के बैनर तले तैयार हो रही है। वहीं फिल्म के संगीतमय सफर को सुरों से सजाने का काम मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल ने किया है।
रिलीज की तारीख और विठाबाई की विरासत
लक्ष्मण उतेकर द्वारा निर्देशित यह फिल्म 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों के पर्दे पर दस्तक देगी। प्रचार सामग्री में श्रद्धा के नए अवतार को देखने के बाद दर्शकों के बीच उनके इस पारंपरिक रूप को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है।
अगर विठाबाई नारायणगांवकर के ऐतिहासिक संदर्भ की बात करें, तो उनका जन्म 1 जुलाई 1935 को महाराष्ट्र के पंढरपुर में हुआ था। बचपन की बेहद कच्ची उम्र में ही उन्होंने तमाशा मंचों पर कदम रख दिया था। उनके गाने, नृत्य और कथा कहने की जीवंत शैली को देखने के लिए दूर-दराज से लोग जुटा करते थे। कला के प्रति उनके इसी बेमिसाल समर्पण के चलते उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किया गया और लोग उन्हें तमाशा सम्राज्ञी की उपाधि से पुकारते थे।
उनकी सांस्कृतिक विरासत को चिरस्थायी बनाए रखने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2006 में उनके सम्मान में विठाबाई नारायणगांवकर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की नींव रखी। विठाबाई ने 15 जनवरी 2002 को 66 वर्ष की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली थी, और अब उनकी वही प्रेरक दास्तान बड़े पर्दे पर दर्शकों से रूबरू होने जा रही है।



















