भोजपुरी सिनेमा जगत की मशहूर गायिका और अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर दुर्गा सप्तमी के पावन अवसर पर एक नया भक्ति गीत जारी किया है। इस गाने में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप यानी मां कालरात्रि की महिमा और उनकी असीम शक्ति को मुख्य केंद्र में रखा गया है। यह गाना सिर्फ पारंपरिक भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए महिलाओं की आंतरिक शक्ति और उनके अधिकारों की बात मजबूती से उठाई गई है।
मां कालरात्रि की महिमा और महिला सशक्तिकरण का संदेश
मां कालरात्रि को साहस, निर्भीकता और दुष्टों का संहार करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। अक्षरा सिंह के इस नए गीत में इसी देवी स्वरूप को आज के दौर की महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मरक्षा के साथ जोड़ा गया है। गाने का मुख्य संदेश यह है कि समाज को महिलाओं को केवल त्याग, ममता और सहनशीलता की मूरत मानकर सीमित नहीं कर देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए और अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी आनी चाहिए।
रौद्र रूप धारण करने और अन्याय का विरोध करने की प्रेरणा
इस नए गाने के बोल महिलाओं को अपनी सोई हुई ताकत को पहचानने और किसी भी प्रकार के गलत व्यवहार या अत्याचार का डटकर विरोध करने की प्रेरणा देते हैं। अक्षरा सिंह अपने गीतों के माध्यम से यह संदेश देती हैं कि महिलाओं को दुर्गा मां से यह सीखना चाहिए कि विपरीत समय आने पर विरोधियों को धूल कैसे चटाई जाती है। वह कहती हैं कि महिलाओं को समय आने पर चंडी और काली की तरह अपना रौद्र और विकराल रूप भी धारण कर लेना चाहिए ताकि कोई उनका शोषण न कर सके।
भोजपुरी संगीत में सामाजिक संदेश और हालिया चर्चा
यह नया गाना ठीक उस समय आया है जब अक्षरा सिंह का बाढ़ प्रभावित बिहार के हालात पर आधारित एक और गाना काफी चर्चा में था। उस गाने में वह बाढ़ पीड़ितों की मदद करती नजर आई थीं और उसमें छठी मइया के साथ-साथ दुर्गा मां की भक्ति भी दिखाई गई थी। अब सप्तमी यानी 17 अक्टूबर के मौके पर आए इस देवी गीत में उनका अंदाज बेहद दमदार है। उनके हाव-भाव और प्रस्तुति में देवी शक्ति का पूरा प्रभाव झलकता है। भोजपुरी संगीत जगत में देवी गीतों की परंपरा पुरानी रही है, लेकिन यह गीत भक्ति के साथ-साथ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी प्रसारित करता है।



















