हरियाणा के रोहतक जिले में चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ हुए गंभीर यौन उत्पीड़न के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस घिनौने अपराध को किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि बच्ची के अपने ही पिता ने अंजाम दिया था। मामले की सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची के पिता और मां दोनों को गिरफ्तार कर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिता पोर्न वीडियो देखने का आदी था और उसने खुद अपनी मासूम बेटी के साथ दरिंदगी कर पूरा दोष स्कूल के एक नाबालिग छात्र के सिर मढ़ दिया था। लगभग डेढ़ महीने तक चली बारीकी से जांच के बाद इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सका।
स्कूल पर लगाया था झूठा आरोप और किया था हंगामा
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सितंबर के महीने में हुई थी। बच्ची की मां ने 16 सितंबर को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी चार वर्षीय बेटी के साथ गलत काम किया गया है। शिकायत में मां का दावा था कि 15 सितंबर को जब बच्ची स्कूल से घर लौटी, तो उसके प्राइवेट पार्ट में सूजन देखी गई थी। इसके बाद 17 सितंबर को बच्ची का पिता गांव के अन्य लोगों को साथ लेकर स्कूल पहुंच गया और वहां जमकर हंगामा खड़ा कर दिया। पिता और मां ने आरोप लगाया था कि स्कूल का एक लड़का बच्ची को बिस्किट का लालच देकर बाथरूम में ले गया था और मुंह पर टेप चिपकाकर उसके साथ ज्यादती की थी।
स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल ने परिसर में ऐसी किसी भी घटना के होने से पूरी तरह इनकार किया था। इसके बाद स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, लेकिन फुटेज में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला। स्कूल में कोई सुराग न मिलने पर पुलिस और बाल कल्याण समिति का संदेह गहराने लगा।
काउंसलिंग के दौरान कैसे गहराया माता-पिता पर शक
मामले की गंभीरता को देखते हुए महम DSP तनुज शर्मा ने विस्तृत जांच की कमान संभाली। मामले में बच्ची के दो बार औपचारिक बयान दर्ज कराए गए और दो अलग-अलग सत्रों में उसकी काउंसलिंग भी की गई। शुरुआती दो सत्रों के दौरान बच्ची लगातार स्कूल के ही एक छात्र का नाम लेती रही। सीडब्ल्यूसी रोहतक के चेयरमैन एडवोकेट सतीश कौशिक के अनुसार, पहले के दो काउंसलिंग सत्रों में बच्ची के माता-पिता की मौजूदगी और उनके व्यवहार ने समिति के मन में गंभीर संदेह पैदा कर दिया था। दोनों बार काउंसलिंग के दौरान बच्ची के बोलने से पहले उसके माता-पिता ही बीच में बोलने लगते थे और जवाब देने का प्रयास कर रहे थे।
तीसरे अकेले सत्र में सामने आया पूरा घटनाक्रम
संदेह पुख्ता होने पर जांच दल और काउंसलर ने तीसरी बार बच्ची की काउंसलिंग पूरी तरह अकेले में करने का निर्णय लिया। इस तीसरे सत्र में जैसे ही बच्ची को माता-पिता के प्रभाव और दबाव से अलग किया गया, उसने सच बयां करते हुए सीधे अपने मम्मी-पापा का नाम ले लिया। काउंसलिंग के इस खुलासे की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई।
पुलिस ने जब माता-पिता को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो बच्ची की मां टूट गई और उसने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी। मां ने स्वीकार किया कि उसकी आंखों के सामने ही बच्ची के पिता ने मासूम के साथ गलत काम किया था, लेकिन उसने डर और सामाजिक बदनामी के चलते सच्चाई को दबाए रखा और झूठी कहानी गढ़ी। इसके बाद जब पिता से सख्ती से पूछताछ हुई, तो उसने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद अदालत ने दोनों को रिमांड पर भेज दिया।


















