हिंदी सिनेमा में अपनी बिंदास शैली और खास अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता जैकी श्रॉफ की पहचान दशकों से जग्गू दादा के रूप में रही है। सिनेमाई पर्दे पर उनका यह बेबाकपन जितना स्वाभाविक नजर आता है, असल जिंदगी में इस नाम के पीछे उतना ही गहरा व्यक्तिगत दर्द छिपा हुआ है। अपने जीवन के शुरुआती दौर में घटे एक दुखद वाकये ने उनके सोचने और जीने का नजरिया हमेशा के लिए बदलकर रख दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपने इलाके के लोगों की ढाल बनने का फैसला किया।
समुद्र में डूबते भाई को बचाने की बेबस कोशिश
एक प्रसिद्ध बातचीत कार्यक्रम के दौरान जैकी श्रॉफ ने अपने बीते दिनों की इस दिल दहला देने वाली घटना को साझा किया था। मुंबई की जिस चॉल में उनका बचपन बीता, वहां उनके बड़े भाई को लोग बेहद सम्मान से दादा कहते थे। वह चॉल के बाशिंदों की हिफाजत और किसी भी मुसीबत में मदद के लिए सबसे आगे खड़े रहते थे। जैकी की उम्र उस वक्त केवल 10 साल थी, जब उनके बड़े भाई समुद्र में किसी दूसरे इंसान को बचाने के लिए पानी में कूद पड़े।
उस भयानक वक्त में उनके भाई गहरे पानी में डूबने लगे। जैकी को उस समय तैरना नहीं आता था, फिर भी उन्होंने अपने भाई की जान बचाने के लिए किनारे से एक रस्सी फेंकी। बदकिस्मती से वह रस्सी उनके हाथ से फिसल गई और देखते ही देखते उनके भाई समुद्र की लहरों में समा गए। अपनी आंखों के सामने सगे भाई को खो देने की इस बेबसी ने बालक जैकी के मन पर गहरा आघात पहुंचाया।
भाई की अधूरी जिम्मेदारी और जग्गू दादा का उदय
इस अपूरणीय क्षति के बाद जैकी ने टूटने के बजाय अपने भाई के नेक कामों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि चॉल के लोगों को कभी यह महसूस नहीं होने देंगे कि उनकी रक्षा करने वाला कोई नहीं रहा। अपने बड़े भाई की तरह ही वह पड़ोसियों की हर जरूरत में खड़े होने लगे और इसी तरह मोहल्ले के लोग उन्हें प्यार और आदर से जग्गू दादा पुकारने लगे। स्टारडम हासिल करने के बाद भी वह अपनी जड़ों को नहीं भूले और आज भी उस पुरानी चॉल में अक्सर जाकर अपने पुराने साथियों से मिलते हैं।
सिनेमाई पर्दे पर छोटे रोल से स्टारडम तक
चॉल की तंग गलियों से निकलकर जैकी श्रॉफ ने अभिनय जगत की ओर कदम बढ़ाया। वर्ष 1982 में उन्होंने दिग्गज अभिनेता देव आनंद की फिल्म स्वामी दादा में एक बेहद मामूली किरदार के जरिए कैमरे का सामना किया था। इसके ठीक अगले वर्ष, यानी 1983 में निर्देशक सुभाष घई ने उन्हें फिल्म हीरो में मुख्य नायक के रूप में पेश किया, जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
अपनी पहली ही बड़ी फिल्म से दर्शकों के दिलों पर छाने के बाद जैकी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने परिंदा, राम लखन, त्रिदेव, खलनायक, 1942: ए लव स्टोरी, रंगीला, बॉर्डर, देवदास और सूर्यवंशी जैसी यादगार फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी से भारतीय सिनेमा में अपना एक अलग मुकाम कायम किया।


















