सिनेमा जगत में सीक्वल फिल्मों के बनने का सिलसिला दशकों पुराना है, मगर बहुत कम ऐसी सीरीज देखने को मिलती हैं जिनकी हर नई कड़ी अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए टिकट खिड़की पर कमाई की नई ऊंचाइयां छूती जाए। जिस तरह सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री के मैदान में 'दृश्यम' सीरीज ने अपनी कसी हुई पटकथा और विजय सालगांवकर की शातिर रणनीतियों के सहारे सिनेमाघरों में दर्शकों का तांता लगाए रखा, ठीक उसी नक्शेकदम पर चलते हुए 'भूल भुलैया' ने हॉरर-कॉमेडी की दुनिया में अपना दबदबा कायम किया है। फिल्म उद्योग का इतिहास गवाह है कि जब कोई सीरीज दर्शकों के दिल में अटूट भरोसा और ब्रांड वैल्यू कायम कर लेती है, तब कहानीकारों को दर्शकों को लुभाने के लिए शून्य से शुरुआत नहीं करनी पड़ती। टिकट खरीदने वाले सिनेप्रेमियों को पहले ही भली-भांति अंदाजा होता है कि इस नाम के साथ उन्हें किस स्तर का भरपूर मनोरंजन मिलने जा रहा है। यही ब्रांड रिकॉल और दर्शकों का पक्का विश्वास 'भूल भुलैया' को हिंदी सिनेमा की सबसे कामयाब और लंबे समय तक चलने वाली फ्रेंचाइजियों की अगली कतार में खड़ा करता है।
साल 2007 में साइकोलॉजिकल थ्रिलर के साथ रखी गई थी मजबूत बुनियाद
साल 2007 में जब निर्देशक प्रियदर्शन ने पहली बार 'भूल भुलैया' का निर्माण किया था, तब भारतीय सिनेमा के दर्शकों के लिए डर और ठहाकों का यह अनूठा संगम एकदम अछूता और अनोखा तजुर्बा था। इस पहली फिल्म में अक्षय कुमार (डॉ. आदित्य श्रीवास्तव), विद्या बालन (अवनी/मंजुलिका), शाइनी आहूजा और राजपाल यादव जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में जान फूंक दी थी। पर्दे पर विद्या बालन द्वारा निभाया गया मंजुलिका का खौफनाक रूप और खासकर उनका ऐतिहासिक 'आमी जे तोमर' नृत्य दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाला साबित हुआ था।
समीक्षकों की सकारात्मक समीक्षाओं के साथ-साथ आम जनता ने भी इस फिल्म को हाथों-हाथ लिया। पर्दे पर अक्षय कुमार की लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और कहानी के भीतर रचे गए दिमागी खेल ने इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट का दर्जा दिलाया। इस शुरुआती हिस्से ने एक ऐसा मजबूत आधार तैयार किया, जिसकी गूंज और प्रासंगिकता सालों बाद भी सिनेमा जगत में बरकरार रही।
पैंडेमिक के दौर में 'रूह बाबा' का ब्लॉकबस्टर अवतार
लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जब 'भूल भुलैया 2' की घोषणा की गई, तो व्यापार विश्लेषकों और दर्शकों के मन में गहरा संशय था कि क्या मुख्य चेहरे अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की गैरमौजूदगी में यह कहानी अपनी पुरानी लोकप्रियता को संभाल पाएगी। हालांकि, सिनेमाघरों में रिलीज होते ही फिल्म ने तमाम आशंकाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। निर्देशक अनीस बज्मी ने इस दूसरे भाग को गंभीर मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के दायरे से बाहर निकालकर पूरी तरह से एक पारिवारिक हॉरर-कॉमेडी में तब्दील कर दिया। पर्दे पर कार्तिक आर्यन ने 'रूह बाबा' बनकर जोरदार एंट्री ली, जिनकी हास्य कला और स्क्रीन प्रेजेंस ने बच्चों से लेकर युवाओं तक हर वर्ग का दिल जीत लिया।
यह वह नाजुक दौर था जब पैंडेमिक की मार झेलने के बाद हिंदी फिल्में बड़े पर्दे पर दर्शकों के लिए तरस रही थीं। ऐसे विपरीत समय में 'भूल भुलैया 2' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर का खिताब अपने नाम किया। फिल्म ने घरेलू स्तर पर भारत में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा और दुनिया भर में 230 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया। कहानी में तब्बू का दोहरा किरदार और कार्तिक आर्यन के साथ राजपाल यादव की जुगलबंदी दर्शकों को खूब पसंद आई।
साल 2024 की दिवाली पर 'भूल भुलैया 3' का सुपरहिट धमाका
दूसरे भाग की अभूतपूर्व कामयाबी के बाद निर्माताओं ने इस कहानी के दायरे को और अधिक भव्य स्तर पर ले जाने का फैसला किया। दिवाली 2024 के त्योहार पर रिलीज हुई 'भूल भुलैया 3' ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि दर्शकों के बीच इस श्रृंखला का क्रेज कितना गहरा है। इस तीसरे भाग में कार्तिक आर्यन के साथ मूल फिल्म की धड़कन रहीं विद्या बालन की 'असली मंजुलिका' के रूप में भव्य वापसी कराई गई। इसके साथ ही फिल्म में माधुरी दीक्षित को भी एक अहम भूमिका में शामिल किया गया। बड़े पर्दे पर विद्या बालन और माधुरी दीक्षित के बीच की जुगलबंदी, उनका आमना-सामना और साथ में पेश किया गया डांस सीक्वेंस इस पूरी फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया।
त्योहारों के मौसम में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के बावजूद इस फिल्म ने घरेलू सिनेमाघरों में 250 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर दिखाया और वैश्विक स्तर पर 350 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार समेटकर सुपरहिट का मुकाम हासिल किया। 'रूह बाबा' और 'डबल मंजुलिका' के इस नए फार्मूले ने जनता को सिनेमाघरों तक खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
ब्रांड वैल्यू और पारिवारिक मनोरंजन का अटूट गणित
'भूल भुलैया' के तीनों भागों की लगातार सफलता आज के दौर में सिनेमाई ब्रांड के प्रभाव को पुख्ता करती है। जब किसी फिल्म के साथ यह शीर्षक जुड़ता है, तो दर्शकों को पहले से भरोसा होता है कि उन्हें रहस्य, हल्का-फुल्का डर, पारिवारिक हास्य, 'आमी जे तोमर' का नया अंदाज और छोटे पंडित के रूप में राजपाल यादव की बेहतरीन कॉमेडी का पूरा पैकेज मिलेगा। स्थापित फ्रेंचाइजी के साथ काम करने पर फिल्म निर्माताओं के लिए वित्तीय जोखिम भी काफी घट जाता है। 'दृश्यम' की ही तरह 'भूल भुलैया' ने साबित किया है कि अगर नए सीक्वल में ताजगी और ट्विस्ट का ख्याल रखा जाए, तो बॉक्स ऑफिस का यह समीकरण कभी कमजोर नहीं पड़ता।



















