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जब कन्नदासन ने इलैयाराजा की धुन पर पलक झपकते ही रच दिया था एक कालजयी तमिल गीतमनोरंजन
9 जुल॰ 2026, 11:27 pm (20 दिन पहले)· 2

जब कन्नदासन ने इलैयाराजा की धुन पर पलक झपकते ही रच दिया था एक कालजयी तमिल गीत

तमिल सिनेमा के मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने एक किस्सा साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे गीतकार कन्नदासन ने महफिल में ही तुरंत एक अमर गाने के बोल लिख डाले थे।

भारतीय संगीत जगत में 'लग जा गले' या 'कल हो ना हो' जैसे सदाबहार गाने आज भी लोगों के दिलों के करीब हैं। इन गानों की लोकप्रियता का मुख्य आधार उनकी कर्णप्रिय धुन के साथ-साथ उनके गहरे भावपूर्ण शब्द हैं, जो पीढ़ियों को जोड़े रखते हैं। हालांकि, हर महान गीत के पीछे महीनों की लंबी प्रक्रिया नहीं होती। करीब 46 साल पहले एक ऐसा जादुई पल आया था, जब एक महान संगीतकार की धुन सुनते ही मशहूर गीतकार ने बिना किसी रुकावट के पन्नों पर शब्दों की ऐसी लड़ियां उतार दीं कि देखते ही देखते एक क्लासिक गाना बनकर तैयार हो गया।

इलैयाराजा और कन्नदासन का ऐतिहासिक संगम

तमिल सिनेमा के इतिहास में संगीतकार इलैयाराजा और कवि कन्नदासन की जोड़ी ने अमिट छाप छोड़ी है। इन दोनों की जुगलबंदी से निकले कई गीत आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। इसी कड़ी में 1979 की फिल्म 'निरम मारुम पूक्कल' का सुपरहिट गाना 'आयिरम मलारगले मलरुंगल' शामिल है। यह गीत आज भी उतना ही ताजा लगता है जितना अपनी रिलीज के समय था। खुद इलैयाराजा ने एक सार्वजनिक मंच से इस गाने के बनने के पीछे की हैरान कर देने वाली कहानी दुनिया के साथ साझा की थी।

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समय की कमी और रचनात्मकता का विस्फोट

इलैयाराजा ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उनके पास उस समय काम का भारी दबाव था। उन्हें फिल्म की री-रिकॉर्डिंग का काम भी निपटाना था, जिसके कारण उनके पास धुन तैयार करने के लिए सीमित वक्त था। फिल्म के निर्देशक भारतीराजा ने उन्हें गीत की स्थिति यानी सिचुएशन समझाई थी, जिसके बाद गीत लिखने के लिए कन्नदासन को आमंत्रित किया गया। उस समय की व्यस्तता के बीच गीतकार और संगीतकार का तालमेल ही था, जिसने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

धुन पर शब्दों की अद्भुत पकड़

कन्नदासन जब स्टूडियो पहुंचे, तो उनका पहला सवाल धुन को लेकर था। इलैयाराजा ने जैसे ही धुन बजाना शुरू किया, कन्नदासन ने बिना पल गंवाए पहली पंक्ति 'आयिरम मलारगले मलरुंगल' लिख दी। इलैयाराजा के मन में शुरुआत में यह संशय था कि क्या ये शब्द धुन के साथ पूरी तरह न्याय कर पाएंगे, लेकिन जब उन्होंने इन शब्दों को धुन पर गाया, तो वे बिल्कुल सटीक बैठे। इसके बाद तो जैसे सिलसिला सा चल पड़ा। इलैयाराजा जैसे-जैसे धुन आगे बढ़ाते गए, कन्नदासन बिना रुके एक-एक कर पंक्तियां लिखते गए। इलैयाराजा ने बाद में स्वीकार किया कि कन्नदासन रुककर शब्दों को नहीं तराशते थे, बल्कि वे इतनी सहजता से लिखते थे जैसे कोई झरना बह रहा हो।

फिल्म के पर्दे के पीछे की टीम

फिल्म 'निरम मारुम पूक्कल' के निर्देशक भारतीराजा थे। इस फिल्म में मुख्य कलाकारों के तौर पर सुधाकर, राधिका और विजयन ने अपनी भूमिकाएं निभाई थीं। संगीत का पूरा जिम्मा इलैयाराजा ने संभाला था, जबकि इस अमर गीत को मलेशिया वासुदेवन, शैलजा और जेंसी ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। दशकों बीत जाने के बावजूद, आज भी यह तमिल सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में शुमार किया जाता है और इसकी लोकप्रियता का राज कन्नदासन की तत्कालिक प्रतिभा और इलैयाराजा की अद्भुत धुन में छिपा है।

सवाल-जवाब

फिल्म 'निरम मारुम पूक्कल' कब रिलीज हुई थी?
यह फिल्म 1979 में रिलीज हुई थी।
इस गीत के संगीतकार कौन थे?
इस गीत को दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने तैयार किया था।
फिल्म का निर्देशन किसने किया था?
फिल्म 'निरम मारुम पूक्कल' का निर्देशन भारतीराजा ने किया था।
गीत 'आयिरम मलारगले मलरुंगल' के गायक कौन थे?
इस सदाबहार गीत को मलेशिया वासुदेवन, शैलजा और जेंसी ने अपनी आवाज दी थी।
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