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फिल्म 'सहिया' पर सेंसर की कैंची के खिलाफ अदालत जाने की तैयारी, कपिल सिब्बल बोले इसे प्रमाणपत्र रोककर नहीं बल्कि सम्मानित करके नवाजेंमनोरंजन
20 सित॰ 2026, 1:32 am (39 दिन पहले)· 2

फिल्म 'सहिया' पर सेंसर की कैंची के खिलाफ अदालत जाने की तैयारी, कपिल सिब्बल बोले इसे प्रमाणपत्र रोककर नहीं बल्कि सम्मानित करके नवाजें

सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी द्वारा फिल्म 'सहिया' का प्रमाणपत्र रोके जाने के बाद कपिल सिब्बल ने कड़ा ऐतराज जताया है। निर्माता पक्ष अब इस मामले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और फिल्म 'सहिया' की टीम के बीच जारी तकरार अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इस पूरी परियोजना को देखने के बाद प्रमाणन रोके जाने के कदम पर खुला आश्चर्य प्रकट किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि इस कहानी में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता जिसके आधार पर जनता के सामने इसके प्रदर्शन को रोका जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस किस्म की कृति को अवरुद्ध करने की जगह उसे बाकायदा सम्मानित किया जाना चाहिए।

कानूनी चुनौती की तैयारी और सेंसरशिप के पीछे की वजहों पर सवाल

सिब्बल ने बताया कि प्रमाणन से जुड़े इस विवाद को अब न्यायालय के समक्ष ले जाने की पूरी तैयारी की जा चुकी है, ताकि सिनेमाघरों में इसकी पहुंच का रास्ता कानूनी तौर पर साफ कराया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जाहिर की कि आखिर किन तर्कों के सहारे प्रमाणन बोर्ड ने हरी झंडी देने से मना किया। इसके साथ ही उन्होंने यह शंका भी व्यक्त की कि क्या इस रुकावट का असली कारण फिल्म से जुड़े '4 पीएम' नाम का पहलू तो नहीं बन गया है।

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प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर विचार रखते हुए उन्होंने देश के मौजूदा परिवेश को लेकर भी गहरी चिंता दर्ज कराई। उनके अनुसार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और मूल्यों के लिहाज से यह स्थिति बेहद विचारणीय है, जिसका उचित अनुमान शायद अभी शासन तंत्र को नहीं हो पा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि अभिव्यक्ति से जुड़ी स्वतंत्रताओं पर इस तरह के प्रतिबंध स्वस्थ माहौल का संकेत नहीं देते।

हिंसा का महिमामंडन नहीं, आम जन और मानवीय प्रेम का चित्रण

फिल्म की विषयवस्तु पर चर्चा करते हुए कपिल सिब्बल ने समझाया कि यह प्रस्तुति कतई हिंसा को बढ़ावा नहीं देती। इसके उलट यह कहानी हिंसा की लपटों के बीच पिस रहे एक साधारण मनुष्य और उसके आत्मीय प्रेम के ताने-बाने को सामने रखती है। उनका कहना था कि अगर प्रमाणन समिति को किसी विशिष्ट अंश से कोई शिकायत थी, तो उसे पारदर्शी रूप से दर्ज किया जाना चाहिए था ताकि चीजें पूरी तरह स्पष्ट होतीं।

उन्होंने कहा कि जब रचना इतनी प्रभावशाली ढंग से मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती है, तो उस पर ताले लगाने के बजाय सरकार को उसकी सराहना करनी चाहिए। उनका मानना है कि संवेदनशील विषयों को उठाने वाले सिनेमा को संरक्षण की जरूरत होती है, न कि प्रशासनिक रुकावटों की।

समयसीमा खत्म होने के बावजूद निर्णय का लंबा इंतजार

फिल्म के निर्माण दल ने प्रमाणन बोर्ड के कामकाज के ढर्रे पर कड़े सवाल उठाए हैं। निर्माताओं की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बोर्ड के समक्ष अंतिम प्रत्यावेदन 23 अगस्त को पेश किया गया था। प्रमाणन से जुड़े नियमों के तहत ऐसे मामलों में पांच दिनों के भीतर पुनर्विचार करके आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए थी।

इसके विपरीत 14 सितंबर तक लगभग 22 दिन गुजर जाने के बाद भी बोर्ड ने अपनी स्थिति साफ नहीं की है। दल का कहना है कि निर्माताओं को यह तक सूचित नहीं किया गया कि फिल्म की दोबारा समीक्षा हुई या नहीं, उनके अंतिम प्रत्यावेदन पर क्या रुख अपनाया गया और आने वाले दिनों में क्या कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

27 अगस्त को प्रमाणपत्र देने से किया गया था इनकार

इस पूरे विवाद का आगाज तब हुआ था, जब प्रमाणन बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म 'सहिया' को प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर दिया था। इसके बाद फिल्म के निर्माता संजय शर्मा ने सामने आकर यह बात कही थी कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कहानी को नक्सलवाद से जोड़कर प्रमाणन प्रक्रिया में रुकावटें खड़ी की हैं।

निर्माता संजय शर्मा ने इस क्रम में एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुए संवाद का भी हवाला दिया था। निर्माता के अनुसार उस अधिकारी ने उनसे कहा था कि यदि इस फिल्म का फिल्मांकन उत्तर प्रदेश में किया गया होता, तो इसे प्रमाण पत्र हासिल करने में कोई अड़चन नहीं आती।

सवाल-जवाब

कपिल सिब्बल ने फिल्म 'सहिया' को लेकर क्या कहा?
कपिल सिब्बल ने फिल्म देखने के बाद कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है और इसे रोकने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए।
फिल्म 'सहिया' पर सेंसर बोर्ड ने क्या फैसला लिया था?
सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म 'सहिया' को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था।
निर्माताओं के अनुसार सेंसर बोर्ड ने किस नियम का उल्लंघन किया है?
23 अगस्त को दिए गए अंतिम प्रत्यावेदन पर 5 दिन के भीतर निर्णय आना था, लेकिन 14 सितंबर तक 22 दिन बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
निर्माता संजय शर्मा ने सेंसर बोर्ड के अधिकारियों पर क्या आरोप लगाया?
संजय शर्मा ने आरोप लगाया कि बोर्ड ने फिल्म को नक्सलवाद से जोड़ा और एक अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शूटिंग होने पर सर्टिफिकेट मिल जाता।
फिल्म की रिलीज के लिए अब निर्माता पक्ष क्या कदम उठा रहा है?
निर्माता पक्ष अब इस मामले को अदालत में ले जाने और रिलीज के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Tanvi Desai@tanvi-desai·38 दिन पहले

फिल्म 'सहिया' के प्रमाणन को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और निर्माताओं के बीच बढ़ता यह गतिरोध भारतीय सिनेमा जगत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नौकरशाही की देरी पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। पांच दिन की वैधानिक सीमा के बजाय 22 दिनों तक कोई निर्णय न लेना और फिल्म के नाम से जुड़े पहलुओं पर शंका जताना स्ट्रीमिंग और थिएट्रिकल रिलीज़ दोनों के लिए चिंताजनक है। यदि यह मामला अदालत तक पहुंचता है, तो यह न्यायिक समीक्षा इस बात का निर्धारण कर सकती है कि संवेदनशील विषयों पर आधारित स्वतंत्र सिनेमा के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं कितनी पारदर्शी होनी चाहिए।

Aisha Khan@aisha-khan·38 दिन पहले

मनोरंजन उद्योग के गलियारों में यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे प्रमाणन प्रक्रिया में देरी स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के व्यावसायिक और मानसिक दोनों मोर्चों पर भारी पड़ती है। जब पांच दिन की वैधानिक सीमा के इतर 22 दिनों तक चुप्पी साधी जाती है, तो यह केवल लालफीताशाही नहीं बल्कि वितरकों और ओटीटी खरीदारों के बीच एक अनिश्चितता का माहौल पैदा कर देता है। यदि अदालत इस मामले में समयबद्ध समीक्षा का निर्देश देती है, तो यह भविष्य के उन तमाम प्रोजेक्ट्स के लिए एक नज़ीर बन सकता है जो संवेदनशील और मानवीय विषयों पर आधारित होते हैं और जिन्हें अक्सर इस तरह की प्रशासनिक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है।

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