फिल्म सतलुज को जी5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद हुए भारी वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए भारत और विदेश स्थित कई गुरुद्वारों में गुल्लक रखकर चंदा जुटाने का प्रयास किया जा रहा था। इस पहल की जानकारी मिलने पर फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत वक्तव्य जारी किया है। त्रेहान ने दर्शकों और समर्थकों की इस अनूठी भावना और प्यार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि उनकी टीम किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग, दान या उपहार स्वीकार नहीं करेगी।
फिल्म के निर्माताओं का दान स्वीकार करने से इनकार
हनी त्रेहान ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से प्रशंसकों और शुभचिंतकों को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि फिल्म की रिलीज के बाद से ही लगातार उन्हें देश और दुनिया भर से संदेश, फोन कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए जबरदस्त समर्थन मिल रहा था। कई लोग मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ, फिल्म की पूरी टीम और जसवंत सिंह खालरा के परिवार तक पहुंचकर मदद की इच्छा जता रहे थे।
इसी बीच निर्माताओं को यह पता चला कि भारत के साथ-साथ विदेशों में भी कई गुरुद्वारों में दानपात्र स्थापित किए गए हैं ताकि सतलुज को हुए वित्तीय घाटे में योगदान दिया जा सके। निर्देशक ने लिखा कि लोगों का यह कदम उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक है, लेकिन वे और उनकी निर्माण कंपनी किसी भी रूप में जनता से धन एकत्र करना सही नहीं मानते। उनका कहना था कि दर्शकों का प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ी निधि है, इसलिए वे पूरी विनम्रता के साथ हर प्रकार की वित्तीय सहायता को अस्वीकार करते हैं।
सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और 127 कट्स से जुड़ा विवाद
सतलुज की रिलीज की राह आसान नहीं रही है। निर्देशक हनी त्रेहान और निर्माताओं ने बताया था कि वे लंबे समय से इस फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की कोशिशों में लगे हुए थे। हालांकि, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को थिएटर में रिलीज करने की अनुमति देने के बदले 127 अलग-अलग कट्स लगाने का निर्देश दिया था।
फिल्म निर्माता अपने मूल दृष्टिकोण और कहानी की सत्यता से समझौता करने को तैयार नहीं थे। उन्होंने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट्स को मानने के बजाय बिना किसी बदलाव के अपनी मूल फिल्म दर्शकों तक पहुंचाने का फैसला किया। इस वैचारिक और प्रशासनिक गतिरोध के कारण फिल्म को सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर रिलीज नहीं किया जा सका, जिसके बाद निर्माताओं ने इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का रास्ता चुना।
ओटीटी पर दो दिन का सफर और भारी वित्तीय घाटा
लंबी कानूनी और प्रक्रियात्मक लड़ाइयों के बाद फिल्म को इस साल जुलाई महीने में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर स्ट्रीम किया गया। लेकिन यह राहत बेहद कम समय के लिए रही। जी5 पर प्रदर्शित होने के महज 48 घंटे के भीतर ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के फिल्म को हटाए जाने पर निर्देशक हनी त्रेहान ने अपनी गहरी नाराजगी जताई थी।
थिएटर रिलीज न हो पाने और ओटीटी से तुरंत हटाए जाने के कारण फिल्म के प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी फिल्म्स को गंभीर वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। त्रेहान ने स्पष्ट किया कि प्रोड्यूसर इस आर्थिक घाटे को स्वीकार कर चुके हैं और इससे हुए नुकसान से समझौता कर चुके हैं। उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि वे पैसों के बजाय कानूनी माध्यमों से फिल्म को अधिक से अधिक संख्या में देखकर अपना समर्थन दर्ज कराएं।



















