सिनेमा जगत के जाने-माने फिल्ममेकर संजय गुप्ता के अचानक चले जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसक गहरे सदमे में हैं। कला जगत के तमाम दिग्गजों ने उनके असामयिक निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। इस दुखद घड़ी में फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल anuragkashyap10 पर दोनों की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए अपने दिवंगत साथी के नाम एक लंबा और मार्मिक नोट लिखा। अनुराग ने बताया कि उन दोनों का यह दोस्ताना रिश्ता करीब 25 साल पुराना था। हालांकि बदलते दौर और व्यस्त दिनचर्या की वजह से दोनों के बीच हाल के वर्षों में बातचीत पहले जैसी नियमित नहीं रह गई थी, मगर अतीत से जुड़े किस्से और यादें आज भी उनके दिलो-दिमाग में पूरी तरह ताजा हैं।
अनसुलझी बातचीत और हमेशा के लिए अधूरी रह गईं मुलाकातें
अनुराग कश्यप ने अपने संदेश में बेहद भारी मन से इस बात का अफसोस जताया कि दोनों के बीच कई ऐसी जरूरी चर्चाएं और बातचीत बाकी रह गई थीं, जो अब जिंदगी में कभी पूरी नहीं हो सकेंगी। अपने इंस्टाग्राम नोट में अनुराग ने संजय गुप्ता के अनूठे व्यक्तित्व, जीवन के कड़े संघर्षों और सिनेमा रचने के प्रति उनके अटूट जुनून को विस्तार से बयां किया। उनके लिए संजय का जाना केवल एक साथी निर्देशक को खोना भर नहीं है, बल्कि एक ऐसे पुराने हमदर्द दोस्त से बिछड़ना है जिसने जिंदगी के कई उतार-चढ़ाव करीब से देखे थे। अनुराग ने लिखा कि इस आकस्मिक विदाई ने उन्हें भीतर तक हिलाकर रख दिया है।
जॉन वू से मिली प्रेरणा और व्हाइट फेदर फिल्म्स की शुरुआत
संजय गुप्ता के फिल्मी सफर और रचनात्मक सोच पर रोशनी डालते हुए अनुराग ने उनके मशहूर प्रोडक्शन हाउस व्हाइट फेदर फिल्म्स की पृष्ठभूमि का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने साझा किया कि इस बैनर की नींव दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात फिल्म निर्देशक जॉन वू के प्रति अपना गहरा आदर और सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से रखी गई थी। जॉन वू उन गिने-चुने फिल्मकारों में शुमार थे जिनका काम संजय गुप्ता को बहुत ज्यादा प्रभावित करता था और वे उनके सिनेमाई अंदाज को दिल से पसंद करते थे। संजय की फिल्मों के तेवर और उनकी विजुअल स्टाइल में उस सिनेमाई लगाव की छाप साफ नजर आती थी।
मुसीबतों से लड़ने का जज्बा और बीमारी का साया
संजय गुप्ता की सेहत और उनकी बीमारी के दौर का जिक्र करते हुए अनुराग कश्यप ने उनके जुझारू स्वभाव को याद किया। अनुराग का मानना था कि संजय उन मजबूत इंसानों में से थे जो किसी भी कठिन परिस्थिति या विपत्ति से लड़कर बाहर निकलने का हौसला रखते थे। संजय ने पहले भी गंभीर बीमारी को मात देकर अपनी जीवटता साबित की थी, इसलिए अनुराग को पक्का भरोसा था कि इस बार भी वे अपनी तकलीफों से जूझकर सकुशल वापस लौट आएंगे। उन्होंने भावुक होकर लिखा कि उन्हें यकीन था कि उनका दोस्त हर हाल में मुश्किलों को हरा देगा, यही कारण है कि उनके दुनिया छोड़ जाने की खबर ने उन्हें स्तब्ध कर दिया। अनुराग के अनुसार, उनके इस अजीज दोस्त को इतनी जल्दी और इस तरह विदा नहीं होना चाहिए था।



















