सिनेमाई दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की दखल तेजी से बढ़ रही है और अब यह पारंपरिक फीचर फिल्मों के निर्माण तंत्र का सीधा हिस्सा बनने जा रही है। इसी कड़ी में वेवबैंड प्रोडक्शन और अमेरिकी स्टार्टअप इनक्यूबेटर वाई कॉम्बिनेटर समर्थित फर्म कोयल ने मिलकर एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है। दोनों संस्थाओं ने संयुक्त रूप से जमलोक नाम से एक हॉरर फीचर फिल्म बनाने की घोषणा की है, जिसे दुनिया में अपनी तरह की पहली एआई हॉरर फिल्म बताया जा रहा है। शनिवार के दिन नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के परिसर में अनकैनी इंडिया उत्सव के दौरान इस आगामी प्रोजेक्ट का आधिकारिक पोस्टर पहली बार सार्वजनिक किया गया।
सिनेमाई कलाकारों और कंप्यूटर तकनीक का अनोखा संगम
निर्माताओं ने इस प्रोजेक्ट को कई क्षेत्रीय भाषाओं में रिलीज करने की रणनीति बनाई है। इस सिलसिले में हिंदी फिल्म उद्योग और तेलुगु सिनेमा यानी टॉलीवुड के जाने-माने अभिनेताओं को मुख्य भूमिकाओं में शामिल करने के लिए शुरुआती बातचीत चल रही है। वेवबैंड प्रोडक्शन के खाते में पहले से मस्ती 4 जैसी चर्चित फिल्म का निर्माण दर्ज है, जबकि कोयल तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में काम कर रही है। निर्माण दल ने इस पूरी फिल्म को करीब तीन महीने की समयावधि में पूरा करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
तकनीकी संरचना के स्तर पर यह फिल्म इंसानी कलाकारी और कंप्यूटर एल्गोरिदम का मिलाजुला रूप होगी। कोयल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेहुल अग्रवाल ने कहा,
यह दुनिया की पहली AI हॉरर फिल्म होगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक संवाद अदायगी के लिए वास्तविक कलाकारों के सीधे अभिनय को कैमरे में उतारा जाएगा। इसके उलट, दृश्यों की पृष्ठभूमि, भव्य सेट्स, भीड़भाड़ वाले अतिरिक्त चरित्र, परिधान और अन्य जटिल विजुअल इफेक्ट्स तैयार करने की जिम्मेदारी एआई टूल्स पर होगी। निर्माण प्रक्रिया के दौरान अभिनेताओं की शारीरिक बनावट और चेहरे के हाव-भाव को डिजिटल तकनीक की सहायता से प्रोसेस किया जाएगा। इस पोस्टर के अनावरण पर वेवबैंड प्रोडक्शन की ओर से अमर झुनझुनवाला तथा सह-संस्थापक शिखा करण अहलूवालिया भी मंच पर मौजूद रहीं।
अनकैनी इंडिया फेस्ट में रचनात्मक प्रतिभाओं का जमावड़ा
दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन भारत के भीतर अनकैनी वैली फेस्ट का पहला आधिकारिक संस्करण था। इस मंच पर फिल्मकार, डिजिटल क्रिएटर, तकनीकी पेशेवर और कॉलेज छात्र एक साथ जुटे। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष चुनौती आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने महज चौबीस घंटों के भीतर एआई टूल्स की मदद से अपनी रचनात्मक वीडियो परियोजनाएं तैयार कीं। इस पूरी प्रतियोगिता को तीन अलग-अलग वर्गों में बांटा गया था, जिनमें विज्ञापन फिल्में, म्यूजिक वीडियो और शॉर्ट फिल्म की श्रेणियां शामिल थीं। कड़े मूल्यांकन के बाद चुनी गई कुल नौ बेहतरीन कृतियों को उत्सव के दौरान बड़े पर्दे पर दिखाया गया। इससे पूर्व यह फेस्ट सैन फ्रांसिस्को में वाई कॉम्बिनेटर के परिसर, ऑस्टिन में एसएक्सएसडब्ल्यू उत्सव और पिट्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में सफलता के साथ संपन्न हो चुका है।
विशेषज्ञों की जूरी और उद्योग जगत का मूल्यांकन
प्रतियोगिता में शामिल कृतियों को परखने के लिए मनोरंजन और विज्ञापन जगत के दिग्गजों का एक निर्णायक मंडल बनाया गया था। विज्ञापन फिल्म श्रेणी के आकलन का जिम्मा क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग से जुड़े समीर दातार और एस्ट्रा स्टूडियोज के विशेषज्ञ राजाराजन रामकृष्णन ने संभाला। दूसरी तरफ म्यूजिक वीडियो वर्ग की फिल्मों को ऑफबीट मीडिया ग्रुप के जयदीप सिंह तथा बॉम्बे लोकल के प्रतिनिधि अनुपम सिद्धांत ने परखा। लघु फिल्म श्रेणी के तहत विजेताओं का चयन करने वाली जूरी में अन्नपूर्णा स्टूडियोज के तकनीकी प्रमुख सीवी राव, अमर चित्र कथा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमन श्रीवास्तव और वेवबैंड प्रोडक्शन से शिखा करण अहलूवालिया शामिल थीं।
कहानी कहने के पारंपरिक तौर-तरीकों पर विमर्श
इस महोत्सव के दौरान फिल्म निर्माण की बदलती कार्यप्रणाली और भारतीय संस्कृति पर एआई के प्रभाव को लेकर दो अलग-अलग सत्रों में पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। पहले सत्र का शीर्षक द इंडिया नैरेटिव: एआई, कल्चर एंड इन्फ्लुएंस था, जिसमें थिंक स्कूल के गणेश प्रसाद, कबीर कोचर, समीर दातार, जयदीप सिंह और टाटा 1एमजी के प्रशांत टंडन ने अपने विचार रखे। इस सत्र में भारतीय कथा परंपरा को आधुनिक टूल्स के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।
इसके तुरंत बाद प्रोडक्शन री-रिटन: बेंडिंग द रूल्स ऑफ फिल्ममेकिंग विषय पर केंद्रित दूसरा संवाद आयोजित हुआ। इसमें फिल्म निर्माण के स्थापित नियमों को चुनौती देने वाली नई तकनीकों पर मंथन किया गया। इस परिचर्चा में शिखा करण अहलूवालिया, ह्यूमन्स ऑफ सिनेमा के हर्षित बंसल, अनुपम सिद्धांत और राजाराजन रामकृष्णन ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में तकनीकी जगत के विख्यात कंटेंट क्रिएटर गौरव चौधरी से भी बातचीत का एक विशेष सत्र रखा गया। वहीं सीवी राव और अमन श्रीवास्तव ने भविष्य के सिनेमा और तकनीक के तालमेल पर प्रकाश डाला। अंत में आयोजित सम्मान समारोह में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव हरिकिशोर एस. और अन्य गणमान्य अतिथियों ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को संबोधित किया।
सॉफ्टवेयर टूल कोयल 3.0 का अनावरण और कंपनी की पृष्ठभूमि
इस पूरे आयोजन के दौरान मेजबान कंपनी ने फिल्मकारों के लिए अपने नए जनरेटिव एआई सॉफ्टवेयर कोयल 3.0 को भी आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया। कंपनी के डेवलपर्स का दावा है कि यह सिस्टम किसी भी लिखित पटकथा अथवा ऑडियो रिकॉर्डिंग को सीधे सिनेमाई दृश्यों में तब्दील करने की क्षमता रखता है। इस टूल को डिजाइन करते समय दृश्यों के बीच चरित्रों के चेहरे, रंग-रूप और लोकेशन की निरंतरता को एकसमान बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
कोयल की नींव मेहुल अग्रवाल और गौरी अग्रवाल नामक भाई-बहन की जोड़ी ने रखी है। यह तकनीकी कंपनी इससे पहले संगीत और मनोरंजन जगत की दिग्गज कंपनियों टी-सीरीज, यूनिवर्सल म्यूजिक और मैडॉक के साथ कई रचनात्मक अनुबंध पूरे कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी ने संगीतकार एआर रहमान, शंकर महादेवन और रिकी केज के लिए म्यूजिक वीडियो तैयार करने में भी अपनी तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की है।



















