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पेस्टल शिफॉन और मोतियों की सादगी ने बनाया जयपुर की महारानी को वैश्विक फैशन आइकनजीवनशैली
4 नव॰ 2026, 9:33 am (8 मिनट पहले)· 0

पेस्टल शिफॉन और मोतियों की सादगी ने बनाया जयपुर की महारानी को वैश्विक फैशन आइकन

जयपुर की राजमाता गायत्री देवी ने भारी परिधानों के दौर में हल्की शिफॉन साड़ियों और मोतियों के आभूषणों से सादगी और नजाकत की एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसे दुनिया आज भी याद करती है।

भारतीय रजवाड़ों की पारंपरिक वेशभूषा में जब भारी जरी, चटक रंग और वजनी बनारसी सिल्क का एकछत्र वर्चस्व हुआ करता था, तब जयपुर की राजमाता गायत्री देवी ने एक बिल्कुल अलग और अनूठी शैली अपनाकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने साबित कर दिया कि राजसी ठाठ केवल वजनदार गहनों और तड़क-भड़क वाले कपड़ों से नहीं झलकता, बल्कि पहनावे की नजाकत, सहजता और आत्मविश्वास में छुपा होता है। उनकी यही सादगी और सुरुचिपूर्ण समझ उन्हें न केवल देश में, बल्कि सात समंदर पार भी सुंदरता और शालीनता का वैश्विक प्रतीक बना गई। जाने-माने अंतरराष्ट्रीय डिजाइनरों से लेकर प्रमुख पत्रिकाओं तक हर कोई उनकी स्वाभाविक गरिमा का मुरीद रहा।

पेस्टल शिफॉन साड़ियों से गढ़ी नई पहचान

जब भी राजमाता के पहनावे की चर्चा होती है, सबसे पहले जेहन में हल्की और हवादार शिफॉन साड़ियों की छवि उभरती है। उस जमाने में जब राजघरानों में भारी सिल्क पहनना ही नियम माना जाता था, तब उन्होंने हल्के पेस्टल रंगों को प्राथमिकता दी। वह अक्सर हल्का गुलाबी, आसमानी नीला, मिंट ग्रीन और हाथीदांत जैसे शांत रंगों के परिधानों में नजर आती थीं। ये पारदर्शी साड़ियां वजन में बेहद हल्की होती थीं, लेकिन उन्हें संभालने का उनका तरीका और उनका सलीका देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता था। उनका मानना था कि व्यक्ति का वास्तविक आकर्षण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आराम और संतुलन में निहित है। उनका निश्छल आत्मविश्वास ही उनके रूप को सबसे अधिक निखारता था।

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मोतियों का हार बना सिग्नेचर अंदाज

राजमाता के शाही ठाठ की पहचान मोतियों के प्रति उनके गहरे लगाव के बिना अधूरी मानी जाती है। वह सादी शिफॉन साड़ी के साथ अक्सर मोतियों की लंबी लड़ियों वाली माला, गले से सटा चोकर या सुरुचिपूर्ण बालियां पहनना पसंद करती थीं। मोतियों की सौम्य चमक उनके हल्के कपड़ों के साथ एकदम सटीक तालमेल बिठाती थी। इसके अलावा उनका पारंपरिक राजपूती अंदाज, नपा-तुला जूड़ा या हल्के घुंघराले बाल और बेहद सटल मेकअप उनके व्यक्तित्व को एक अलहदा पहचान देता था। उनके चेहरे की कुदरती चमक और सलीके को देखते हुए वोग पत्रिका ने भी उन्हें दुनिया की सबसे हसीन महिलाओं की सूची में शुमार किया था। उनका यह रूप आज के आधुनिक समय में भी उतना ही प्रासंगिक और नया नजर आता है।

कठिन परिस्थितियों में भी नहीं खोई गरिमा

राजमाता गायत्री देवी का जीवन केवल वैभव और सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने बेहद मुश्किल दौर का भी डटकर सामना किया। वर्ष 1970 में जयपुर रियासत के अंतिम शासक महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय का एक पोलो मैच के दौरान दुर्घटना में निधन हो गया, जिससे उनके जीवन में बड़ा शून्य आ गया। इसके बाद वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर जयपुर के महलों में बड़े पैमाने पर छापे मारे गए और उन पर टैक्स चोरी के आरोप लगाकर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। इन कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना धैर्य और आत्मसम्मान नहीं खोया। जेल में बिताए पांच महीनों के दौरान उन्होंने साथी कैदियों को पढ़ाया और अपनी सौम्यता व शालीनता को कभी धूमिल नहीं होने दिया।

संघर्षों के बाद भी अमर रहा स्टाइल का जादू

पैरोल पर रिहा होने के उपरांत उन्होंने सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया और वर्ष 1976 में अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा 'ए प्रिंसेस रिमेम्बर्स' की रचना की। आगे चलकर उन्हें अपने बेटे के असामयिक निधन और करीब 400 मिलियन डॉलर की पारिवारिक संपत्ति से जुड़े लंबे विवादों जैसी भारी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतने गहरे आघातों के बावजूद उनका आंतरिक सौंदर्य, सादगी और शिफॉन तथा मोतियों से सजा उनका क्लासिक अंदाज कभी फीका नहीं पड़ा। जीवन भर दुनिया उनके अनूठे आकर्षण की कायल रही। अंततः 29 जुलाई 2009 को 90 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भी जब पारंपरिक भारतीय परिधानों में क्लासिक लुक की बात आती है, तो उनकी शैली सबसे बेहतरीन प्रेरणा मानी जाती है।

सवाल-जवाब

राजमाता गायत्री देवी ने किस प्रकार की साड़ियों को फैशन में लोकप्रिय बनाया?
उन्होंने हल्के पेस्टल रंगों वाली शिफॉन साड़ियों को लोकप्रिय बनाया, जिनमें हल्का गुलाबी, आसमानी नीला, मिंट ग्रीन और हाथीदांत रंग शामिल थे।
उनके पसंदीदा आभूषण कौन से थे?
वह भारी जेवर के बजाय मोतियों की लंबी लड़ियों वाली माला, चोकर और सुंदर बालियां पहनना पसंद करती थीं।
उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस पत्रिका ने सम्मानित किया था?
वोग पत्रिका ने उनकी कुदरती सुंदरता और अद्वितीय शैली को देखते हुए उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में शामिल किया था।
महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय का निधन कब और कैसे हुआ था?
वर्ष 1970 में एक पोलो दुर्घटना के दौरान उनका असामयिक निधन हुआ था।
आपातकाल के समय उनके साथ क्या हुआ था?
वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान महलों में छापेमारी के बाद उन्हें कर चोरी के आरोपों में तिहाड़ जेल भेजा गया, जहां उन्होंने पांच महीने बिताए।
राजमाता गायत्री देवी की आत्मकथा का क्या नाम है?
उनकी आत्मकथा का नाम 'ए प्रिंसेस रिमेम्बर्स' है, जो वर्ष 1976 में प्रकाशित हुई थी।
उनका निधन कब और किस उम्र में हुआ?
उनका निधन 29 जुलाई 2009 को 90 वर्ष की आयु में हुआ था।
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