संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी कल्ट क्लासिक फिल्म 'देवदास' में चुन्नीलाल का किरदार निभाकर जैकी श्रॉफ ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। इस फिल्म में मुख्य भूमिका शाहरुख खान ने निभाई थी। हाल ही में एक कार्यक्रम में दर्शकों से बातचीत के दौरान जैकी श्रॉफ ने इस यादगार भूमिका से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि इस रोल के लिए मेकर्स की पहली पसंद वह खुद नहीं थे, बल्कि उनसे पहले इंडस्ट्री के कई नामी अभिनेताओं को यह पेशकश की गई थी, लेकिन सभी ने इसे स्वीकार करने से साफ मना कर दिया था।
शीर्षक भूमिका के डर से साथी कलाकारों ने खींच लिए थे हाथ
सभागार में मौजूद एक दर्शक महिला ने जब बताया कि उन्होंने 'देवदास' को पांच बार देखा है, तो जैकी श्रॉफ पुरानी स्मृतियों में चले गए। उन्होंने बताया कि उस दौर में कोई भी अभिनेता चुन्नीलाल का किरदार निभाने के लिए राजी नहीं हो रहा था, क्योंकि मुख्य भूमिका में शाहरुख खान नजर आ रहे थे। जिन भी कलाकारों के पास यह रोल गया, उनका तर्क यही था कि जब पूरी फिल्म का नाम ही 'देवदास' है, तो फिर दूसरे किरदार के पास दिखाने के लिए क्या ही बचेगा। आखिरकार जब हर किसी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तब निर्माताओं ने जैकी श्रॉफ से संपर्क साधा और उन्होंने बिना किसी झिझक के फौरन हामी भर दी।
माधुरी दीक्षित की मौजूदगी और स्क्रीन प्रेजेंस का भरोसा
जैकी श्रॉफ ने विस्तार से समझाया कि उन्होंने इस किरदार को लपकने में तनिक भी देर क्यों नहीं की। उन्होंने याद किया कि फिल्म में माधुरी दीक्षित चंद्रमुखी का किरदार निभा रही थीं और चुन्नीलाल उनके कोठे पर सबसे रसूखदार शख्सियत की तरह बैठता था। जैकी ने सोचा कि चंद्रमुखी के कोठे का राजा बनने का मौका कोई कैसे छोड़ सकता है। जब उन्होंने निर्माताओं से अपने रोल के आकर्षण के बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया कि उनके हिस्से एक शानदार गाना और कुछ बेहद दमदार संवाद आने वाले हैं। संवाद पढ़ने के बाद अभिनेता को इतना आत्मविश्वास था कि यदि उनकी एंट्री मध्यांतर के बाद भी होती, तो भी स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी अलग ही असर छोड़ जाती। पर्दे पर वही हुआ और चुन्नीलाल के रूप में उनका काम बेहद सराहा गया।
देव आनंद की 'स्वामी दादा' से शुरू हुआ था सफर
अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए जैकी श्रॉफ ने दिग्गज अभिनेता देव आनंद का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि देव आनंद ही वह शख्स थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा को सबसे पहले भांपा और अपनी फिल्म 'स्वामी दादा' (1982) में काम दिया। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में थे, जबकि जैकी श्रॉफ को शक्ति कपूर के साथी के तौर पर एक जूनियर आर्टिस्ट का छोटा सा रोल मिला था। इसी छोटे से मौके ने उनके लिए फिल्म जगत के दरवाजे खोले थे।
सुभाष घई की 'हीरो' और वह जादुई बांसुरी की धुन
जूनियर आर्टिस्ट के दौर के बाद जैकी श्रॉफ की तकदीर फिल्म निर्माता सुभाष घई ने पूरी तरह बदल दी। घई ने उन्हें फिल्म 'हीरो' (1983) के जरिए बतौर मुख्य नायक बड़े पर्दे पर पेश किया। इस फिल्म ने जैकी श्रॉफ को रातों-रात स्टारडम की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। अभिनेता ने माना कि फिल्म की मशहूर बांसुरी वाली धुन ने उनकी सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई थी। इसके लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की कृपा को श्रेय दिया, जिसका असर दशकों बाद उनके बेटे टाइगर श्रॉफ के करियर में भी दिखा। टाइगर श्रॉफ की डेब्यू फिल्म 'हीरोपंती' (2014) में भी उसी प्रतिष्ठित बांसुरी की धुन को नए रूप में शामिल किया गया था।


















