फिल्म और संगीत जगत में अपनी खास पहचान बनाने वाली सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने जाने-माने फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के साथ अपने रिश्ते, शादी और उसके बाद के मुश्किल दौर को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। स्कूल के दिनों से ही अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली सुचित्रा को शाहरुख खान की फिल्म कभी हां कभी न से जबरदस्त शोहरत मिली थी। अभिनय के साथ-साथ संगीत में माहिर सुचित्रा ने नब्बे के दशक में कई लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो भी दिए और बाद में साल 2005 में फिल्म माई वाइफ मर्डर के जरिए दोबारा पर्दे पर लौटीं। अब उन्होंने अपने और शेखर कपूर के बीच रहे तीस साल के उम्र के अंतर, शादी के फैसले और परिवार के विरोध पर विस्तार से अपनी बात रखी है।
पहली नजर की मुलाकात और शुरुआती बातचीत
सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने अपने रिश्ते के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि शेखर कपूर से उनका पहला परिचय तब हुआ था जब वह ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रही थीं। उस समय शेखर कपूर उनके कॉलेज में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। सुचित्रा खुद को उनकी बहुत बड़ी प्रशंसक मानती थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेखर ने उन्हें आकर्षित करने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि वह खुद शेखर की तरफ आकर्षित थीं और उन्हें रिझाने का प्रयास कर रही थीं। कॉलेज के उस कार्यक्रम में शेखर ने उन्हें देखा और कुछ बातचीत की थी, जिससे एक फैन के तौर पर सुचित्रा का उत्साह काफी बढ़ गया था।
अठारह साल की उम्र में प्रोजेक्ट और परिवार की नाराजगी
जब सुचित्रा अठारह वर्ष की हुईं, तब मशहूर फोटोग्राफर गौतम राजाध्यक्ष ने उन्हें एक नई फिल्म के सिलसिले में शेखर कपूर से मिलने के लिए भेजा। हालांकि वह सिनेमाई प्रोजेक्ट कभी बन नहीं पाया और धरातल पर नहीं उतरा, लेकिन इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। दोनों अक्सर फोन पर बात करते थे और बाहर मिलने लगे। इस रिश्ते को लेकर सुचित्रा के परिवार में काफी नाराजगी थी। खासकर उनकी बहन इस मुलाकात के सख्त खिलाफ थीं और शेखर कपूर से सीधे कहती थीं कि वे बच्ची को अकेला छोड़ दें।
तीस साल का अंतर और मां की भावुक मिन्नत
दोनों के बीच उम्र का तीस साल का बड़ा फासला था, जिसके चलते सुचित्रा का परिवार इस रिश्ते को कतई स्वीकार नहीं कर पा रहा था। शेखर कपूर की इससे पहले भी एक शादी हो चुकी थी और उनका तलाक हो चुका था। जब सुचित्रा ने शादी करने का फैसला किया, उस वक्त शेखर के तलाक को पांच साल बीत चुके थे। परिवार को यह बेमेल रिश्ता बिल्कुल रास नहीं आ रहा था। सुचित्रा ने उस भावुक लम्हे को याद करते हुए साझा किया कि उनकी मां ने उनके पैर छू लिए थे और शादी न करने की विनती करते हुए कहा था कि ऐसा कदम मत उठाओ। परिवार के कड़े विरोध के बावजूद सुचित्रा अपने फैसले पर अडिग रहीं और दोनों का विवाह हुआ।
पहले साल से ही मुश्किलें और आठ साल में अलगाव
सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने अपने पुराने साक्षात्कारों का हवाला देते हुए यह भी बताया कि शादी के पहले ही साल से उनके वैवाहिक जीवन में तनाव और दरार आने लगी थी। उस दौरान सुचित्रा इस रिश्ते को समाप्त करने का मन बना रही थीं और उन्हें बर्कले स्कूल ऑफ म्यूजिक से प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप भी मिल गई थी। वह संगीत की उच्च शिक्षा हासिल करने विदेश जाना चाहती थीं, लेकिन तभी वह गर्भवती हो गईं। इस वजह से उन्होंने अपना फैसला टाल दिया और कुछ साल तक रिश्ते को खींचती रहीं। आखिरकार शादी के आठ साल पूरे होने के बाद दोनों ने अलग होने का अंतिम फैसला ले लिया।
मुश्किल वक्त में माता-पिता का साथ
तलाक के मुश्किल दौर में सुचित्रा के माता-पिता उनके सबसे बड़े संबल बनकर खड़े रहे। जब हालात बेहद खराब होने लगे, तो परिवार ने उनका पूरा समर्थन किया। सुचित्रा का मानना है कि हर बेटी को विपरीत परिस्थितियों में अपने मायके से ऐसा ही मजबूत सहारा मिलना चाहिए। उनकी मां ने उनसे स्पष्ट कहा था कि उन्हें किसी भी ऐसे व्यवहार या परिस्थिति को सहने की जरूरत नहीं है जिससे उनका स्वाभिमान टूटे या उन्हें अपमानित होना पड़े, क्योंकि वह कोई अनाथ नहीं हैं जिनका कोई अपना न हो।
बेटी कावेरी की परवरिश और को-पेरेंटिंग का अनुभव
तलाक के बाद दोनों ने अपनी बेटी कावेरी की परवरिश साथ मिलकर की। जब दोनों अलग हुए, उस समय कावेरी की उम्र मात्र छह साल थी। सुचित्रा ने को-पेरेंटिंग के अपने तजुर्बे को बिल्कुल अलग नजरिए से बयां किया। उनका मानना है कि इस व्यवस्था में मां को रोजमर्रा की सारी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, जबकि पिता को पूरी वाहवाही मिल जाती है। बेटी ज्यादातर सुचित्रा के साथ ही रहती थी, इसलिए वह शेखर को एक तरह से वेकेशन डैड मानती थीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि छुट्टियों वाले पिता के तौर पर शेखर बेहतरीन पिता साबित हुए हैं। कावेरी दुनिया में जहां कहीं भी उसके पिता रहते हैं, वहां उनसे मिलने जाती है और वह अपनी मां की तुलना में पिता के अधिक करीब है, जिसे सुचित्रा अपने लिए भी एक बड़ी तारीफ मानती हैं।


















