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श्रीदेवी की उस ब्लॉकबस्टर फिल्म का किस्सा, जिसने बोनी कपूर को दिया भारी आर्थिक संकटमनोरंजन
9 सित॰ 2026, 12:54 am (49 दिन पहले)· 2

श्रीदेवी की उस ब्लॉकबस्टर फिल्म का किस्सा, जिसने बोनी कपूर को दिया भारी आर्थिक संकट

सैकड़ों मेटल पीस, हॉलीवुड जैसा विजुअल और 12 दिन तक चला एक गाना, निर्देशक सतीश कौशिक की इस महंगी फिल्म का दिलचस्प इतिहास।

नब्बे के दशक की शुरुआत में भारतीय सिनेमा के गलियारों में जिस मेगा-प्रोजेक्ट की सबसे ज्यादा चर्चा थी, वह थी ‘रूप की रानी चोरों का राजा’. इस बहुप्रतीक्षित एक्शन ड्रामा फिल्म में अनिल कपूर, श्रीदेवी, अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में थे. इस फिल्म की घोषणा साल 1987 में की गई थी और अपने समय में इसे बॉलीवुड का सबसे महंगा और भव्य प्रोजेक्ट माना जा रहा था. शुरुआत में इस फिल्म की कमान शेखर कपूर के हाथों में थी, लेकिन कुछ रचनात्मक मतभेदों के चलते उन्होंने बीच में ही प्रोजेक्ट छोड़ दिया, जिसके बाद सतीश कौशिक ने निर्देशन की बागडोर संभाली और इसे पूरा किया.

हॉलीवुड फिल्म से प्रेरित था श्रीदेवी का वह खास लुक

इस मेगा-फिल्म के निर्माण के दौरान कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का काम बेहद चुनौतीपूर्ण और अनोखा था. फिल्म की डिजाइनर नीता ने याद करते हुए साझा किया कि कैसे हॉलीवुड फिल्म ‘कमिंग टू अमेरिका’ देखकर उनके दिमाग में एक भव्य विचार आया था. जब श्रीदेवी ने उनसे संपर्क किया और एक गाने के लिए खास पोशाक तैयार करने को कहा, तो नीता ने तुरंत एक ऐसा पहनावा बनाने का प्रस्ताव रखा जिसमें भारी पंख और शाही डिटेलिंग शामिल हो. डिजाइनर ने बताया कि उन्होंने क्रॉफर्ड मार्केट जाकर सुंदर पंख तलाशे और चेन मेल, स्टोन्स, राइन स्टोन्स तथा धातु के टुकड़ों को आपस में पिरोकर एक शानदार हेडगियर और स्कर्ट तैयार की थी.

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बारह दिनों तक चला था एक गाने का मैराथन शूट

फिल्म के उस चर्चित गाने की शूटिंग किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी. सेट पर उस समय के माहौल को याद करते हुए बताया गया कि गाने का फिल्मांकन लगातार 10 से 12 दिनों तक चला था. शूटिंग का यह सिलसिला सुबह नौ बजे शुरू होकर देर रात दस या साढ़े दस बजे तक खिंचता था. चूंकि डांस मूव्स बेहद ऊर्जावान और जोरदार थे, इसलिए हर दिन पैकअप के बाद कॉस्ट्यूम में आई खराबी को ठीक करना, पंखों को संभालना और ज्वेलरी की फिनिशिंग करना एक नियमित काम बन गया था. डिजाइनर हर रात उन कपड़ों को सुधारकर अगले दिन की शूटिंग के लिए सेट पर वापस ले जाती थीं.

मल्टी-मेटल डिटेलिंग और विशाल सेट की चुनौतियां

इस ऐतिहासिक आउटफिट को तैयार करने में पारंपरिक कला और आधुनिक शिल्प का बेहतरीन मेल देखने को मिला था. इस रचना में मिस्र की कला से प्रेरित इजिप्टियन पाल्मेट मोटिफ्स के साथ लगभग 800 मेटल के छोटे-छोटे टुकड़े जोड़े गए थे, जो राइनस्टोन और हाथों की बनी कारीगरी के साथ जड़े हुए थे. खुद दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी भी इस बात को लेकर असमंजस में थीं कि क्या ऐसा जटिल विजन असल में पर्दे पर जीवंत हो पाएगा. इस संबंध में डिजाइनर ने एक साक्षात्कार में कहा कि कल्पना को हकीकत में बदलने के लिए पक्के इरादे और बेजोड़ कारीगरी की जरूरत होती है.

जुगरान की कहानी और फिल्म की भारी असफलता

कथानक के मोर्चे पर यह फिल्म जुगरान नामक एक क्रूर अपराधी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेरहमी से एक कस्टम अधिकारी और एक डॉक्टर की हत्या कर देता है. इसके बाद उन दोनों मृतकों के अनाथ बच्चे बड़े होकर अपने माता-पिता की मौत का बदला लेने की कसम खाते हैं. हालांकि पर्दे पर इस फिल्म का सफर काफी दुखद रहा और बॉक्स ऑफिस पर यह बुरी तरह असफल साबित हुई. इस फिल्म के निर्माता बोनी कपूर थे, जिन्हें इसके फ्लॉप होने के बाद गंभीर वित्तीय संकट और भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था.

सवाल-जवाब

‘रूप की रानी चोरों का राजा’ फिल्म किस वर्ष रिलीज हुई थी?
यह फिल्म 1993 में रिलीज हुई थी।
फिल्म के निर्माता कौन थे?
इस फिल्म के निर्माता बोनी कपूर थे।
फिल्म का निर्देशन किसने किया था?
फिल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था, जबकि शुरुआत में शेखर कपूर इसके निर्देशक थे।
फिल्म में मुख्य कलाकार कौन-कौन थे?
फिल्म में अनिल कपूर, श्रीदेवी, अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।
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