दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्र तमिलनाडु को आधुनिक बुनियादी ढांचे की एक बड़ी सौगात मिली है। राजधानी चेन्नई में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई और पूरी हो चुकी योजनाओं का लोकार्पण संपन्न हुआ। यह बहुआयामी निवेश स्थानीय नागरिकों के दैनिक सफर को सुगम बनाने, क्षेत्रीय उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देने तथा राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए मार्ग खोलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सार्वजनिक मंच से इस बात को रेखांकित किया गया कि केंद्र सरकार राज्य के समग्र विस्तार के लिए हर स्तर पर सहयोग जारी रखने को तैयार है।
राज्य के पूर्व और वर्तमान नेतृत्व के साथ काम का अनुभव
सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए नेतृत्व ने तमिलनाडु के विविध मुख्यमंत्रियों के साथ लंबे प्रशासनिक समन्वय का स्मरण किया। बीते दशकों के दौरान शासन स्तर पर हुए संवादों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया कि व्यवस्था में कई बदलाव आए, परंतु क्षेत्र के कल्याण को लेकर प्राथमिकताओं में कोई कमी नहीं आई।
"सरकारें बदलती रहीं, लेकिन तमिलनाडु के विकास और यहां की जनता की सेवा करने का मेरा संकल्प हमेशा कायम रहा है।"
अपने संबोधन में उन्होंने स्मरण किया कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्हें करुणानिधि और जयललिता के साथ रचनात्मक संवाद स्थापित करने के अनेक अवसर मिले थे। उसके उपरांत राष्ट्रीय दायित्व संभालने के बाद जयललिता, ओ. पन्नीरसेल्वम, ई. पलानीस्वामी तथा एम.के. स्टालिन के साथ मिलकर प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाया गया। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ मिलकर इस विकास यात्रा को निरंतर गति दी जा रही है।
प्रशासनिक प्रमुख के 25 वर्ष और सहकारी संघवाद की भूमिका
संबोधन में लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुशासन के पच्चीस वर्षों की यात्रा पर भी प्रकाश डाला गया। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में ली गई शपथ से लेकर वर्तमान दायित्वों तक, नागरिकों के विश्वास को सबसे बड़ी ऊर्जा बताया गया। जनसेवा के इस विस्तृत कालखंड में जनशक्ति तथा सहकारी संघवाद के सिद्धांत में निष्ठा और अधिक सुदृढ़ हुई है। इसी दर्शन के तहत यह स्पष्ट किया गया कि जब राज्य प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हैं, तभी सशक्त राष्ट्र के निर्माण की बुनियाद मजबूत होती है।
शहरीकरण को चुनौती नहीं, अपार अवसर मानने पर जोर
आधुनिक दौर में तमिलनाडु के भीतर नगरीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। बढ़ते शहरीकरण को किसी समस्या अथवा संकट के रूप में देखने के स्थान पर आर्थिक संभावनाओं के एक विशाल केंद्र के रूप में परिभाषित किया गया। शहरों को रहने योग्य और गतिशील बनाने के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को अनिवार्य आधार स्तंभ माना गया है। मजबूत आवागमन तंत्र से आम नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर होता है और अनावश्यक समय की बचत होती है।
मेट्रो नेटवर्क में चार गुना से अधिक की वृद्धि
चेन्नई में यातायात को निर्बाध बनाने के क्रम में नई मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया गया, जिससे स्थानीय यात्रियों को आधुनिक और सुरक्षित सफर की सुविधा मिलेगी। देश भर में तीव्र गति वाले रेल परिवहन के विस्तार की तुलना करते हुए बताया गया कि वर्ष 2014 के दौरान भारत का कुल मेट्रो नेटवर्क लगभग 250 किलोमीटर तक सीमित था। बीते वर्षों के सुनियोजित प्रयासों के परिणामस्वरूप अब यह दायरा फैलकर 1,100 किलोमीटर से अधिक तक पहुंच चुका है। चेन्नई में मेट्रो नेटवर्क के ताजा विस्तार से भीड़भाड़ कम होगी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
भारतीय बंदरगाहों की कार्यक्षमता और जहाजों का टर्नअराउंड समय
परिवहन के साथ-साथ समुद्री व्यापार और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे में आए क्रांतिकारी सुधारों को भी सामने रखा गया। भारतीय बंदरगाहों पर संचालन की गति और तकनीकी दक्षता में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहाजों के टर्नअराउंड समय, यानी गोदी पर पोत के पहुंचने से लेकर माल उतारकर रवाना होने तक की समयावधि को घटाकर आधा कर दिया गया है। इस तेज रफ्तार परिचालन का सीधा आर्थिक लाभ देश के निर्यातकों और व्यापारियों को मिल रहा है। इसके चलते भारतीय विनिर्माण उत्पाद अब पहले की तुलना में कहीं अधिक गति और प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
विकसित तमिलनाडु से विकसित भारत का साझा दृष्टिकोण
कार्यक्रम के समापन चरण में राज्य को आधुनिकता और समृद्धि के नए शिखरों तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। यह दोहराया गया कि तमिलनाडु के चौतरफा विकास के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहायता देने के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। विकसित तमिलनाडु के निर्माण से ही विकसित भारत के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य को सिद्ध किया जा सकता है।
























