स्टैंडअप कॉमेडियन जाकिर खान ने अभिनेता गोपाल दत्त के पॉडकास्ट 'पहला पहला' में अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों की एक दिलचस्प कहानी साझा की। कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके जाकिर अक्सर अपने संघर्ष और परिवार से जुड़े अनुभव खुलकर बताते हैं, यही वजह है कि फैंस उनसे आसानी से जुड़ जाते हैं। इस बार उन्होंने अपने घर के निर्माण से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसने सबको चौंका दिया।
जब खुद मजदूर बन गए जाकिर खान
जाकिर खान ने बताया कि जिस दौर में उनका घर बन रहा था, उस वक्त वह खुद उसी जगह पर रह रहे थे और निर्माण कार्य में हाथ बंटाते थे। उन्हें सीमेंट, रेत और मिट्टी मिलाकर निर्माण सामग्री तैयार करने का भी अनुभव है। उन्होंने बताया कि घर बनाने के लिए चार मजदूरों की जरूरत थी, लेकिन उन्होंने केवल तीन मजदूर ही रखे। जाकिर ने कहा, 'चौथा इंसान मैं खुद था।' उन्होंने आगे बताया कि निर्माण सामग्री भी उन्होंने खुद तैयार की थी। इस किस्से से साफ झलकता है कि शोहरत की बुलंदी पर पहुंचने के बाद भी जाकिर जमीन से जुड़े रहना नहीं भूले और मेहनत करने में उन्हें कभी झिझक नहीं हुई।
सारंगीवादक दादा की विरासत
जाकिर खान मशहूर सारंगी कलाकार उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं। उनका बचपन एक ऐसे माहौल में बीता, जहां चारों तरफ संगीत की गूंज सुनाई देती थी। उन्होंने बताया कि उनके घर में लगातार रियाज चलता रहता था और बड़े-बड़े कलाकारों का आना-जाना बना रहता था। जाकिर के मुताबिक, मुंबई बाजार में उनका घर संगीत से भरा हुआ रहता था और हर सुबह करीब पांच या छह बजे उनके दादा संगीत का अभ्यास किया करते थे। वह उस वक्त अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में थे, लेकिन संगीत के प्रति उनका समर्पण उतना ही गहरा बना रहा।
घर में चलती थी संगीत की पाठशाला
जाकिर खान के मुताबिक उनके घर में पांच युवा लड़कों को संगीत की बाकायदा शिक्षा दी जाती थी। इसके अलावा भी कई विद्यार्थी सीखने के लिए आते थे और सभी बारी-बारी से अपनी बारी का इंतजार करते थे। घर में कभी घंटों तक तबले की साधना चलती थी, तो कभी सितार और सारंगी की धुनें पूरे घर में गूंज उठती थीं। इस तरह का माहौल किसी संगीत विद्यालय से कम नहीं था, जहां हर पल कोई न कोई कला की साधना में जुटा रहता था।
आकाशवाणी और घर आते थे दिग्गज कलाकार
जाकिर खान ने यह भी बताया कि वह हफ्ते में एक या दो बार आकाशवाणी जाया करते थे, जहां बड़े-बड़े कलाकार और गजल गायक अपनी प्रस्तुतियां देते थे। इसके अलावा कई मशहूर कलाकार खुद उनके घर भी आते थे। जाकिर खान का यह पूरा किस्सा बताता है कि उनकी कॉमेडी की जड़ें कहीं न कहीं उसी संगीतमय और मेहनतकश माहौल से जुड़ी हैं, जिसमें वह पले-बढ़े।



















