उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित धोपेश्वर नाथ मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं के बीच आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तीर्थ स्थल का इतिहास करीब 5,000 वर्ष पुराना है, जिसकी जड़ें द्वापर युग और महाभारत कालीन घटनाओं से जुड़ी हुई हैं। परंपरा के अनुसार, त्रेतायुग में महर्षि अत्रि के शिष्य और पांडवों के गुरु धूम्र ऋषि ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। उनकी कठिन साधना से संतुष्ट होकर स्वयं भगवान शिव ने यहां दर्शन दिए और ऋषि के निवेदन पर हमेशा के लिए एक पावन शिवलिंग के रूप में विराजमान हो गए।
त्वचा संबंधी विकारों को दूर करने वाला चमत्कारी सरोवर
धोपेश्वर नाथ मंदिर परिसर में बना जल कुंड अपनी विलक्षण औषधीय और आध्यात्मिक विशेषताओं के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। इस पावन सरोवर में डुबकी लगाने को लेकर गहरी जनआस्था जुड़ी हुई है। माना जाता है कि कुंड के जल में स्नान करने से दाने, एलर्जी और अन्य सभी किस्म के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। इस सरोवर का उल्लेख ऐतिहासिक संदर्भों में भी मिलता है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम की मन्नत इसी स्थल पर पूरी हुई थी। अपनी बेगम की मुराद पूरी होने के आभार स्वरूप नवाब ने सरोवर की कच्ची सीढ़ियों को पक्के पत्थरों से बंधवाने का निर्माण कार्य संपन्न कराया था।
शिव चालीसा पाठ और गोपालासिद्ध बाबा के दर्शन का नियम
धोपेश्वर नाथ धाम को 'स्वयं सिद्ध पीठ' का दर्जा प्राप्त है, जहां केवल शिव मंत्रों के विधिवत जाप से ही मानसिक शांति मिलती है और पूर्व संचित पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, परिसर में नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। हालांकि, इस अनुष्ठान को लेकर एक अनिवार्य नियम भी प्रचलित है। मान्यता यह है कि चालीसा पाठ का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है, जब पाठ पूरा होने वाले अंतिम सोमवार को भक्त क्यारा स्थित गोपालासिद्ध बाबा के मंदिर में जाकर भी विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करें। मंदिर में मुख्य शिवलिंग के अलावा श्रद्धालुओं के आकर्षण के लिए जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा का भव्य स्वरूप भी स्थापित किया गया है।
वर्ष 2026 तक पूरा होगा नाथ कॉरिडोर और सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट
बरेली शहर के धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देने के लिए धोपेश्वर नाथ मंदिर को नगर के अन्य 6 पौराणिक नाथ मंदिरों से एक साथ जोड़ने वाले नाथ कॉरिडोर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इस पुनर्विकास परियोजना के तहत श्रद्धालुओं और शोधार्थी विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए मंदिर परिसर के अंदर एक आधुनिक लाइब्रेरी भी तैयार की जा रही है, जो एक ज्ञान केंद्र की भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, मंदिर तक पहुंचने वाले सभी मार्गों का चौड़ीकरण, परिसर में भव्य दिव्य लाइटिंग व्यवस्था और दर्शनार्थियों के लिए आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार का कार्य वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


















