कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े बहुचर्चित वसूली प्रकरण में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही के पक्ष की ओर से एक विस्तृत कानूनी स्पष्टीकरण सामने आया है। अभिनेत्री के वकीलों ने साफ लफ्जों में रेखांकित किया है कि इस पूरे आपराधिक मामले में उनका नाम किसी अभियुक्त के रूप में दर्ज नहीं है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें केवल एक अभियोजन गवाह के नाते बुलाया गया है, ताकि वे अदालती कार्रवाई को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग दे सकें।
राउज एवेन्यू अदालत में पेशी और तारीख
राजधानी दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में 2 नवंबर को आर्थिक अपराध शाखा की चार्जशीट से जुड़े इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई रखी गई थी। नियमानुसार अभिनेत्री को अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित रहना था। अदालत की कार्यवाही के दौरान अभिनेत्री के अधिवक्ताओं ने बेंच को सूचित किया कि समन की सूचना बेहद अल्प समय पहले प्राप्त हुई थी। पूर्व-निर्धारित पेशेवर व्यस्तताओं के चलते वे उस रोज सशरीर उपस्थित होने में असमर्थ रहीं।
वकीलों द्वारा उस तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर न हो पाने की विधिवत अर्जी दाखिल की गई। विशेष अदालत ने उनके तर्कों और कारणों पर विचार करते हुए छूट का अनुरोध स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने इस सुनवाई को 6 नवंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया तथा गवाही के प्रयोजन से नोरा को नया कानूनी समन प्रेषित करने का निर्देश जारी किया।
कानूनी प्रतिनिधियों का औपचारिक रुख
स्थिति को सार्वजनिक पटल पर स्पष्ट करते हुए अभिनेत्री की कानूनी टीम ने अपना पक्ष रखा। उनके वकीलों ने कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि नोरा फतेही न तो इस मामले में आरोपी हैं और न ही उन पर किसी अपराध में शामिल होने का आरोप है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें मात्र न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देने हेतु साक्षी की हैसियत से तलब किया गया है और वे जांच एजेंसियों तथा न्यायपालिका के साथ निरंतर तालमेल बनाए हुए हैं।
200 करोड़ की रंगदारी का मूल विवाद
यह समूचा विवाद जेल के भीतर से रचे गए एक बड़े वित्तीय अपराध से संबंधित है। आरोपों के अनुसार, दिल्ली की रोहिणी जेल में निरुद्ध रहने के दौरान सुकेश चंद्रशेखर ने करीब 200 करोड़ रुपये के व्यापक जबरन वसूली गिरोह का संचालन किया था। उसने खुद को शासन का वरिष्ठ सरकारी अधिकारी प्रस्तुत करके विभिन्न लोगों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
इस पूरे सुनियोजित नेटवर्क की विस्तृत तफ्तीश दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा संपन्न की गई थी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिक आरोप पत्र दाखिल किया था।
पूछताछ और सीआरपीसी धारा 164 का बयान
तफ्तीश के विभिन्न चरणों के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिनेत्री नोरा फतेही को भी पूछताछ की प्रक्रिया में शामिल किया था। जांच दल ने उनसे सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना मारिया पॉलोस के साथ कथित मुलाकातों अथवा संपर्कों के बाबत विस्तृत सवाल-जवाब किए थे। इस जांच के दौरान नोरा ने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत अपना बयान विधिवत दर्ज कराया था।
सभी साक्ष्यों तथा बयानों के विश्लेषण के पश्चात, जांच एजेंसी ने अदालत में जो सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की, उसमें नोरा फतेही का नाम संदिग्ध या अपराधी के रूप में नहीं, बल्कि अभियोजन पक्ष के गवाह की सूची में शामिल किया गया था। इस प्रकार वे इस प्रकरण में कानूनी रूप से केवल गवाही की भूमिका निभा रही हैं।


















