फिल्मकार और अभिनेता अनुराग कश्यप की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि गुजरात के सूरत शहर की एक अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले साल ब्राह्मण समाज को लेकर की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अदालत की तरफ से लगातार जारी समनों के बावजूद पेश न होने पर यह कदम उठाया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे वी चौहान की अदालत ने यह आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 दिसंबर की तारीख तय की है।
लगातार समन के बाद भी नहीं पहुंचे 54 वर्षीय फिल्मकार
हिंदी सिनेमा में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'ब्लैक फ्राइडे' जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन करने वाले 54 वर्षीय फिल्मकार को अदालत में उपस्थित होने के लिए पूर्व में कई बार न्यायिक समन भेजे गए थे। इन समनों के बावजूद जब वह न्यायालय में पेश नहीं हुए, तो अदालत के निर्देश पर समाचार पत्र के जरिए भी सार्वजनिक समन प्रकाशित कराया गया था। इसके बाद भी उनकी तरफ से अदालत में कोई हाजिरी नहीं लगाई गई, जिसके चलते अदालत को कड़ा रुख अपनाना पड़ा।
भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज हुआ था मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत मई महीने में हुई थी, जब वकील कमलेश रावल ने अदालत में एक याचिका दायर की थी। कमलेश रावल हिंदू विचारधारा से जुड़े संगठनों विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कानूनी सलाहकार हैं। उनकी इस अर्जी पर अदालत ने अनुराग कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की तीन प्रमुख धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इनमें धारा 192 विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित है। इसके साथ ही शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किए गए अपमान के लिए धारा 352 और झूठी अफवाहें फैलाने के संदर्भ में धारा 352(2) के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी।
समाचार पत्र में सार्वजनिक नोटिस के बावजूद गैरहाजिरी
जमानती वारंट जारी होने के बाद कानूनी प्रावधानों के मुताबिक आरोपी व्यक्ति अदालत द्वारा तय की गई जमानत राशि जमा कराकर रिहाई हासिल कर सकता है। इस मामले में याचिकाकर्ता कमलेश रावल ने अदालती कार्यवाही की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरण में उन्होंने कश्यप की उपस्थिति के लिए अर्जी लगाई थी ताकि सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो सके, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। इसके बाद जब निचली अदालत ने कार्यवाही आगे बढ़ाई और समन भेजे, तब भी फिल्मकार अदालत नहीं पहुंचे। इसके बाद कोर्ट के आदेशानुसार एक प्रमुख समाचार पत्र के मुंबई संस्करण में सार्वजनिक समन का प्रकाशन कराया गया, ताकि सूचना की पुष्टि हो सके। हालांकि, सोमवार को भी जब वह अदालत में हाजिर नहीं हुए, तो मजिस्ट्रेट ने उनके नाम पर जमानती वारंट जारी कर दिया।
16 अप्रैल 2025 की सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
अदालत में दायर याचिका के अनुसार, कानूनी कार्रवाई की यह मांग 16 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर की गई एक टिप्पणी के आधार पर की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कश्यप ने उस दिन एक आपत्तिजनक संदेश लिखा था, जिससे पूरे ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और उनका अपमान हुआ। याचिका में उल्लेख किया गया कि जब आदित्य नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने उनकी उस पोस्ट पर आपत्ति दर्ज कराई, तो कश्यप ने बेहद तीखे और गुस्से भरे अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने उस व्यक्ति से सवाल किया कि ब्राह्मण होकर तुमने क्या हासिल किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस टिप्पणी के जरिए पूरे ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया।
फिल्म के ट्रेलर विवाद और उसके बाद की माफी का घटनाक्रम
याचिका में दलील दी गई कि इस प्रकार के बयानों से देश के अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समूहों के बीच आपसी कटुता और दुश्मनी बढ़ने की आशंका रहती है। कश्यप की यह टिप्पणी उस समय सामने आई थी जब हिंदी फिल्म 'फुले' का ट्रेलर रिलीज हुआ था। उस ट्रेलर के कुछ हिस्सों को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज और विप्र सेना जैसे संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। फिल्मकार ने उन्हीं आपत्तियों की पृष्ठभूमि में यह जवाब लिखा था। हालांकि, उस पोस्ट को लेकर बड़ा सार्वजनिक विवाद खड़ा होने के कुछ ही दिनों बाद कश्यप ने ब्राह्मण समाज से माफी भी मांगी थी। अपने माफीनामे में उन्होंने स्वीकार किया था कि आवेश में किसी यूजर को जवाब देते समय उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग करके भाषाई मर्यादा की सीमा लांघ दी थी। बावजूद इसके, मामला अदालत तक पहुंच गया और अब उन्हें जमानती वारंट का सामना करना पड़ रहा है।



















