बुंदेली लोक गायक सुनील लोधी इन दिनों अपने लोकप्रिय भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान…' के कारण देश भर में खासे चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म की शानदार सफलता के साथ ही उनकी जादुई आवाज भी हर किसी की जुबान पर है। जन्म से ही आंखों से देख पाने में असमर्थ रहे सुनील ने अपनी इस शारीरिक सीमा को कभी भी अपनी कला और गायकी के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। अब उनकी इस संघर्षपूर्ण जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी है, क्योंकि फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता अनुप्रिया नागर ने उनके इलाज का पूरा जिम्मा उठाने का बड़ा निर्णय लिया है।
मुंबई में होगी आंखों की विशेष जांच
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, अनुप्रिया नागर ने सुनील के इलाज के सिलसिले में मुंबई के एक प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञ से विस्तृत चर्चा कर ली है। तय योजना के तहत सुनील के मुंबई पहुंचते ही डॉक्टर उनकी आंखों की गहन जांच करेंगे और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय करेंगे। इस मेडिकल परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि उनकी दृष्टि वापस लौटने की कितनी संभावना है और इस तरह का उपचार उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव है या नहीं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी की थी मदद की घोषणा
मध्य प्रदेश के सागर जिले के मूल निवासी सुनील लोधी की किस्मत इस फिल्म के भजन के बाद पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने अपनी दिल को छू लेने वाली गायकी से श्रोताओं के दिलों में ऐसी जगह बनाई कि वे रातोंरात इंटरनेट और मीडिया की सुर्खियों में छा गए। अनुप्रिया नागर द्वारा यह कदम उठाने से पहले, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सुनील से मुलाकात की थी और उनके इलाज में हरसंभव सहायता प्रदान करने का पक्का आश्वासन दिया था। अब मुख्यमंत्री के बाद फिल्म की निर्माता ने भी आगे आकर उनके उपचार का बीड़ा उठाया है।
बुंदेली लोक गायकी से बनाई खास पहचान
सुनील लोधी भले ही बचपन से दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उन्होंने अपनी इस चुनौती को कभी अपनी कमजोरी में नहीं बदलने दिया। वे पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों का दिल जीतते रहे हैं और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने बुंदेली लोक गायकी को अपनी पहचान का आधार बनाया। इसी अद्वितीय गायन प्रतिभा के दम पर आज उन्हें सिनेमा जगत और देश भर में एक बहुत बड़ी पहचान हासिल हुई है।
नीम करौरी बाबा पर आधारित फिल्म की अनोखी सफलता
नीम करौरी बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' को शुरुआती दो हफ्तों तक बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास दर्शक नहीं मिल पाए थे। हालांकि, दो सप्ताह का समय बीतने के बाद इस फिल्म के कलेक्शन में अचानक ऐसी जबरदस्त तेजी आई कि इसकी कमाई का सिलसिला अब तक बदस्तूर जारी है। इस फिल्म के एक भजन ने न केवल फिल्म को नई जिंदगी दी, बल्कि सुनील लोधी की पूरी दुनिया ही बदल दी। अपनी अनूठी आवाज में गाए गए इस भजन के जरिए वे आज हर भारतीय घर में एक जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं।


















