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फ्रांस के संस्कृति मंत्रालय में इंटरव्यू के नाम पर महिलाओं को पिलाई गई दवा, क्रिस्चियन नेग्र पर लगे गंभीर आरोपयूरोप
19 अग॰ 2026, 11:59 am (1 घंटे पहले)· 2

फ्रांस के संस्कृति मंत्रालय में इंटरव्यू के नाम पर महिलाओं को पिलाई गई दवा, क्रिस्चियन नेग्र पर लगे गंभीर आरोप

फ्रांस के संस्कृति मंत्रालय में नौकरी के इंटरव्यू के दौरान करीब 250 महिलाओं को नशीली दवा पिलाकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। आरोपी वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्चियन नेग्र पर महिलाओं को शारीरिक रूप से लाचार बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप है।

फ्रांस के संस्कृति मंत्रालय में एक बेहद हैरान करने वाला प्रशासनिक अपराध सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी क्रिस्चियन नेग्र पर नौकरी का इंटरव्यू देने आई लगभग 250 महिलाओं को नशीली दवाएं देने का गंभीर आरोप लगा है। वर्ष 2009 से 2018 के बीच 9 सालों की अवधि के दौरान अंजाम दी गई इन घटनाओं में आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि वह पेय पदार्थों में मूत्रवर्धक (डाइयूरेटिक) दवाइयां मिलाकर महिला अभ्यर्थियों को पिला देता था। इस प्रक्रिया को चिकित्सा और कानूनी भाषा में केमिकल सबमिशन यानी रासायनिक नियंत्रण कहा जाता है। इसके जरिए महिलाओं को अचानक और अनियंत्रित रूप से तीव्र शारीरिक पीड़ा के साथ मूत्र विसर्जन की जरूरत महसूस होती थी, जिससे वे बेहद अपमानजनक स्थितियों में फंस जाती थीं।

पेरिस में नौकरी के इंटरव्यू का झांसा और बेकाबू शारीरिक पीड़ा

अनाइस दे वोस की आपबीती इस मामले की भयावहता को उजागर करती है। जुलाई 2011 में जब अनाइस 27 वर्ष की थीं, तब वे पेरिस स्थित फ्रांस के संस्कृति मंत्रालय में नौकरी के साक्षात्कार के लिए पहुंची थीं। अनाइस आमतौर पर कॉफी नहीं पीती थीं, लेकिन जब इंटरव्यू ले रहे वरिष्ठ सिविल सेवक क्रिस्चियन नेग्र ने उन्हें खुद कॉफी बनाकर ऑफर की, तो उन्होंने शिष्टाचार के नाते स्वीकार कर लिया। अनाइस का कहना है कि उस कॉफी का स्वाद बहुत अजीब और खराब था, इसलिए उन्होंने सिर्फ आधी कप कॉफी ही पी।

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बातचीत की शुरुआत कार्यालय के भीतर हुई थी, लेकिन कुछ ही मिनटों के बाद क्रिस्चियन नेग्र ने बाहर टहलते हुए इंटरव्यू जारी रखने का प्रस्ताव रखा। पेरिस की सड़कों पर घूमते समय अनाइस को अचानक तीव्र और बेकाबू शारीरिक परेशानी का अहसास होने लगा। जब उन्होंने तत्काल शौचालय जाने की इच्छा जताई, तो क्रिस्चियन नेग्र का व्यवहार बेहद अजीब हो गया। उसने सीन नदी के ऊपर बने एक पुल के नीचे बने स्टोर रूम के दरवाजे की ओर इशारा करते हुए वहां जाने की सलाह दी।

अनाइस ने इस अजीब प्रस्ताव को खारिज कर दिया और लूर्व संग्रहालय के सार्वजनिक शौचालय की ओर रुख किया। हालांकि वहां एक यूरो का शुल्क था और अनाइस का पर्स मंत्रालय के दफ्तर में ही छूट गया था। क्रिस्चियन नेग्र ने भी कोई नकद राशि होने से इनकार कर दिया। अत्यधिक शारीरिक पीड़ा और कमजोरी से जूझते हुए अनाइस आखिरकार एक नजदीकी कैफे के शौचालय तक पहुंचीं, लेकिन वहां पहुंचते-पहुंचते उनका शारीरिक नियंत्रण पूरी तरह छूट गया। इस पूरी घटना के कारण उनका आत्मविश्वास टूट गया और आने वाले वर्षों में उन्होंने अपने करियर के महत्वाकांक्षी रास्तों को छोड़ दिया।

"मैं बहुत कमजोर महसूस कर रही थी और मुझे अपने पैरों का अहसास नहीं हो रहा था।"

जांच में खुलासा और 'एक्सपेरिमेंट्स पी' नाम की सीक्रेट फाइल

इस पूरे घटनाक्रम का सच 2019 में तब सामने आया जब पुलिस ने अनाइस से संपर्क किया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि क्रिस्चियन नेग्र के कंप्यूटर से एक विस्तृत दस्तावेज मिला है, जिसका शीर्षक 'एक्सपेरिमेंट्स पी' रखा गया था। इस डिजिटल स्प्रेडशीट में आरोपी अधिकारी ने सभी पीड़ित महिलाओं का पूरा रिकॉर्ड बना रखा था।

इस स्प्रेडशीट में महिलाओं के इंटरव्यू पर पहुंचने का समय, दवा देने का सटीक समय, दवा का असर शुरू होने में लगा समय और महिलाओं द्वारा पहने गए अंडरवेयर का विवरण तक दर्ज किया गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी अधिकारी ने 2009 से 2018 के बीच संस्कृति मंत्रालय में विभिन्न पदों के लिए आई अभ्यर्थियों को निशाना बनाया था। शुरुआत में पीड़ित महिलाओं की संख्या 200 के करीब आंकी गई थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 250 हो गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि क्रिस्चियन नेग्र की करतूतों का भंडाफोड़ जून 2018 में हुआ था, जब उसके एक सहकर्मी ने उसे एक मेज के नीचे से एक महिला अभ्यर्थी की तस्वीरें खींचते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। इसके बाद उसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक मामलों के निदेशक के पद से निलंबित कर दिया गया और 2019 में संस्कृति मंत्रालय से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया। 2018 में पूछताछ के दौरान उसने जांचकर्ताओं के सामने स्वीकार किया था कि उसने इंटरव्यू के दौरान महिलाओं पर अपमानजनक स्थितियां थोपी थीं।

स्ट्रासबर्ग नहर की घटना और अन्य पीड़ितों का दर्द

क्रिस्चियन नेग्र के शिकार बनी महिलाओं में मारी-हेलेन ब्रिस भी शामिल हैं, जिनका इंटरव्यू उसने 2016 में स्ट्रासबर्ग में लिया था। मारी-हेलेन का कहना है कि नेग्र ने उनसे कहा कि वे तनावग्रस्त दिख रही हैं और तनाव दूर करने के नाम पर उन्हें नहर के किनारे टहलाने ले गया। टहलने के दौरान मारी-हेलेन को भी अत्यधिक पीड़ादायक और अनियंत्रित शारीरिक समस्या का सामना करना पड़ा।

जब मारी-हेलेन दर्द से बेहाल होकर रोने लगीं, तो नेग्र ने पास में ही एक सार्वजनिक शौचालय होने का दावा किया, लेकिन वहां पहुंचने पर कोई शौचालय मौजूद नहीं था। मजबूर होकर उन्हें सार्वजनिक स्थान पर ही रुकना पड़ा, जहां नेग्र अपनी जैकेट से उन्हें छिपाने का नाटक करते हुए लगातार उन्हें घूरता रहा। इस घटना के बाद मारी-हेलेन वर्षों तक अपराधबोध और मानसिक आघात से जूझती रहीं और उन्हें स्थायी रूप से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

"मैं बेहद शर्मिंदा थी और उसने अपनी नज़रें मुझ पर से एक पल के लिए भी नहीं हटाईं।"

केमिकल सबमिशन और फोरेंसिक जांच की चुनौतियां

फ्रांस में रासायनिक नियंत्रण यानी केमिकल सबमिशन का मुद्दा हाल के वर्षों में बेहद संवेदनशील विषय बन चुका है। 2024 में जिसेल पेलिकॉट मामले के बाद यह विषय पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना, जिसमें पीड़िता के पति ने उन्हें नशीली दवाएं देकर अजनबियों से शोषण कराया था। इसके अलावा फ्रांसीसी सांसद सैंड्रिन जोसो भी इस अभियान की प्रमुख चेहरा बनीं, जिन्हें एक फ्रांसीसी सीनेटर जोयेल गेरियो ने नशीला पदार्थ देकर प्रताड़ित करने का प्रयास किया था।

सांसद सैंड्रिन जोसो की पहल पर फ्रांस में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके तहत कोई भी महिला जो खुद को नशीली दवा दिए जाने का संदेह करती है, वह पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराए बिना भी अपने रक्त, मूत्र या बालों के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज सकती है।

रेमंड-पोइनकेयर AP-HP अस्पताल की विषविज्ञान प्रयोगशाला के प्रमुख प्रोफेसर जीन-क्लॉड अल्वारेज ने बताया कि 26 वर्षों के अपने करियर में उन्होंने मूत्रवर्धक दवाओं का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं देखा। उनकी प्रयोगशाला सामान्य तौर पर 400 से अधिक जहरीले पदार्थों की जांच करती है और अब इसमें डाइयूरेटिक दवाओं को भी शामिल किया गया है। हालांकि, रक्त और मूत्र में इन दवाओं का असर बहुत जल्दी खत्म हो जाता है, जबकि बालों की जांच में समय बीतने के साथ सटीक समय का पता लगाना कठिन हो जाता है।

"अब फ्रांस में हम अपनी नियमित जांच में डाइयूरेटिक दवाओं की तलाश भी कर रहे हैं।"

कानूनी प्रक्रिया में देरी और संस्थागत विफलता पर सवाल

घटना के वर्षों बीत जाने के बाद भी क्रिस्चियन नेग्र के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। 60 से अधिक उम्र का आरोपी अधिकारी वर्तमान में नशीली दवाएं देने, निजता के हनन और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों में औपचारिक जांच के तहत है और मुकदमे का इंतजार कर रहा है। महिला अधिकार संगठन 'फाउंडेशन दे फेम्स' के अनुसार, आरोपी अधिकारी इस जांच के दौरान भी मानव संसाधन क्षेत्र में काम करता रहा।

पीड़ित महिलाओं ने फ्रांसीसी न्याय प्रणाली की धीमी गति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। अनाइस का कहना है कि 2019 में पहली बार पुलिस से मिलने के बाद 2023 तक उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे वे चार साल तक अकेले इस मानसिक प्रताड़ना को झेलती रहीं। वहीं यूएन वीमेन की प्रतिनिधि कैलियोपी मिंगीरू ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं में इस तरह की अत्यधिक देरी पीड़ित महिलाओं की जिंदगी को तबाह कर देती है। इस पूरे मामले पर फ्रांसीसी पुलिस और न्याय मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सवाल-जवाब

क्रिस्चियन नेग्र पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
क्रिस्चियन नेग्र पर 2009 से 2018 के बीच नौकरी के इंटरव्यू के दौरान लगभग 250 महिलाओं को नशीली मूत्रवर्धक (डाइयूरेटिक) दवाइयां पिलाकर प्रताड़ित करने, निजता का हनन करने और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं।
पुलिस को इस मामले का पता कैसे चला?
जून 2018 में आरोपी को एक मेज के नीचे से महिला अभ्यर्थी की फोटो खींचते हुए पकड़ा गया था। बाद में उसके कंप्यूटर से 'एक्सपेरिमेंट्स पी' नाम की फाइल मिली, जिसमें पीड़ितों का विस्तृत डेटा दर्ज था।
केमिकल सबमिशन (रासायनिक नियंत्रण) क्या है?
केमिकल सबमिशन का तात्पर्य किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना नशीली या प्रभावकारी दवाएं देकर लाचार बनाने और उस पर नियंत्रण हासिल करने से है।
फ्रांस में इस तरह के मामलों की जांच के लिए क्या नई व्यवस्था की गई है?
फ्रांस में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके तहत महिलाएं पुलिस में formal शिकायत दर्ज कराए बिना भी लैब में अपने ब्लड, यूरीन या बालों के सैंपल की जांच करा सकती हैं।
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