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गुरुग्राम में ब्लैकआउट जैसे हालात, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्थाहरियाणा
29 अक्तू॰ 2026, 9:45 am (1 घंटे पहले)· 3

गुरुग्राम में ब्लैकआउट जैसे हालात, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्था

हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू होने से गुरुग्राम में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए हैं। पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है और 12 घंटे के भीतर 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं।

हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है, जिसका असर अब गुरुग्राम शहर में साफ तौर पर दिखने लगा है। गुरुग्राम के कई इलाकों में बिजली गुल होने से ब्लैकआउट जैसे हालात पैदा हो गए हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर पेयजल व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। बिजली निगम के पास महज 12 घंटे के भीतर बिजली गुल होने और फॉल्ट से जुड़ी 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।

रात 10 बजे से शुरू हुआ संकट

कर्मचारियों की यह हड़ताल बुधवार रात 10 बजे से आधिकारिक तौर पर शुरू हुई थी। इसके तुरंत बाद ही गुरुग्राम के विभिन्न सेक्टरों और रिहायशी इलाकों से बिजली गायब होने की शिकायतें आने का सिलसिला शुरू हो गया। कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हड़ताल की पहली रात को ही बिजली निगम को 945 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि अगले दिन सुबह के शुरुआती दो घंटों के भीतर ही 2,245 नई शिकायतें दर्ज कर ली गईं। इस तरह महज़ 12 घंटे के अंतराल में शिकायतों का आंकड़ा 3,000 के पार निकल गया। ऑनलाइन पोर्टल्स और हेल्पलाइन कॉल सेंटर पर लगातार शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जिससे व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है।

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निजीकरण के फैसले का विरोध

यह पूरा विरोध प्रदर्शन सरकार के बिजली निगम के निजीकरण से जुड़े फैसलों के खिलाफ किया जा रहा है। यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से उनकी जायज मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसकी वजह से उन्हें मजबूरी में हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया।

कर्मचारियों के काम पर नहीं लौटने की वजह से बिजली लाइनों में आने वाले तकनीकी फॉल्ट को समय पर ठीक करने का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है। विभिन्न यूनियन पदाधिकारियों का दावा है कि इस समय गुरुग्राम के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित या ठप होने जैसी गंभीर स्थिति बन चुकी है।

पेयजल आपूर्ति और दैनिक जीवन पर असर

बिजली गुल होने की इस विकट स्थिति ने आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। बिजली के बिना वाटर ट्रीटमेंट और सप्लाई पंप नहीं चलने के कारण कई इलाकों में पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। सुबह के वक्त घरों में पानी की किल्लत और खाना बनाने से लेकर बच्चों को तैयार करने जैसे रोजमर्रा के जरूरी काम निपटाने में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

बिजली कर्मचारियों का कहना है कि बीते समय में वे सरकार के केवल मौखिक आश्वासनों के भरोसे आकर अपना आंदोलन वापस लेते रहे हैं, लेकिन इस बार वे किसी भी सूरत में पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और आरपार की लड़ाई लड़ रहे हैं। बिजली कर्मचारी यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया और उनकी सभी लंबित मांगों पर सार्थक बातचीत नहीं की, तो इस तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी या प्रांतीय आंदोलन में बदल दिया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी घोषणा की है कि आगामी 24 तारीख को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बैठक कर आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे इस बार केवल कोरे आश्वासनों के आधार पर अपनी हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। उनका रुख साफ है कि जब तक निजीकरण के फैसले को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता और उनकी लंबित मांगों पर ठोस प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन को लेकर पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

सवाल-जवाब

गुरुग्राम में बिजली संकट की मुख्य वजह क्या है?
हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण गुरुग्राम में बिजली संकट पैदा हुआ है।
यह हड़ताल कब शुरू हुई थी?
बिजली निगम के कर्मचारियों की यह हड़ताल बुधवार रात 10 बजे शुरू हुई थी।
महज 12 घंटे में कितनी शिकायतें दर्ज की गईं?
हड़ताल शुरू होने के शुरुआती 12 घंटों के भीतर बिजली आपूर्ति से जुड़ी 3,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं।
गुरुग्राम का कितना हिस्सा इस हड़ताल से प्रभावित हुआ है?
यूनियन पदाधिकारियों के दावे के मुताबिक, गुरुग्राम के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति ठप होने जैसी स्थिति बन गई है।
बिजली के अलावा और कौन सी सेवा प्रभावित हुई है?
बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण शहर के कई इलाकों में पेयजल यानी पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है।
कर्मचारियों ने आगे क्या चेतावनी दी है?
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है।
अगली रणनीति तय करने के लिए बैठक कब होगी?
कर्मचारियों ने कहा है कि आगामी 24 तारीख को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बातचीत कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·4 मिनट पहले

गुरुग्राम में रहना और बिना पानी-बिजली के सुबह मैनेज करना — यह सिर्फ़ असुविधा नहीं है, यह रोज़ की ज़िंदगी पूरी तरह उखड़ जाना है। जो लोग वर्क फ्रॉम होम करते हैं या छोटे बच्चों को स्कूल भेजते हैं, उनके लिए यह दिन कितना भारी रहा होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 मिनट पहले

40 प्रतिशत आंकड़ा यूनियन का दावा है, सरकारी आंकड़ा क्या कह रहा है वो भी देखना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·25 मिनट पहले

Arjun, बिल्कुल सही पकड़ा — सरकारी आंकड़ा सामने आए तो तस्वीर साफ होगी। यूनियन का दावा और असल हालात में फ़र्क हमेशा होता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

40% गुरुग्राम अंधेरे में और पानी भी नहीं — यह हड़ताल आम लोगों पर सबसे भारी पड़ रही है।

Rohan Verma@rohan-verma·45 मिनट पहले

Karan बिल्कुल सही कह रहे हो — मैंने 2019 में गाजियाबाद में एक लंबी हड़ताल के दौरान देखा था कि पानी की किल्लत कैसे घरों को तोड़ देती है। बिजली तो फिर भी लोग झेल लेते हैं, पर पानी नहीं मिला तो बच्चे और बुजुर्ग सबसे पहले टूटते हैं।

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