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राजस्थान में शहरी स्थानीय निकायों की जंग के लिए बीजेपी और कांग्रेस की बिसात, टिकट मंथन के बीच उभरी बगावतराजस्थान
28 अग॰ 2026, 11:23 pm (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान में शहरी स्थानीय निकायों की जंग के लिए बीजेपी और कांग्रेस की बिसात, टिकट मंथन के बीच उभरी बगावत

राजस्थान निकाय चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। बीजेपी जहां 309 निकायों में 50 हजार से ज्यादा दावेदारों की स्क्रीनिंग कर रही है, वहीं कांग्रेस ने बगावत रोकने के लिए बिना सार्वजनिक सूची जारी किए सीधे सिंबल बांटने का फॉर्मूला अपनाया है।

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश का सियासी तापमान चरम पर पहुंच चुका है, जहां भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। जयपुर स्थित बीजेपी राज्य मुख्यालय में प्रत्याशियों के चयन को लेकर मैराथन बैठकों का दौर जारी रहा, वहीं कांग्रेस ने अंदरूनी गुटबाजी और बगावत को रोकने के लिए एक बेहद गुप्त और नया फॉर्मूला तैयार किया है। राज्य भर के विभिन्न शहरों में उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगने से पहले ही असंतोष के सुर भी उभरने लगे हैं, जिससे चुनाव मैदान में उतरने से पहले दोनों ही राजनीतिक खेमों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बीजेपी मुख्यालय में मैराथन बैठकों का दौर और 50 हजार दावेदारों की स्क्रीनिंग

राजधानी जयपुर में स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय गुरुवार को दिन भर हाई-प्रोफाइल बैठकों का केंद्र बना रहा। इन बैठकों में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल, और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी सहित संगठन के कई शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे। पार्टी की राज्य स्तरीय चुनाव समिति ने बीकानेर, कोटा, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर और भरतपुर जैसे प्रमुख संभागों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के निकाय टिकटों पर विस्तृत चर्चा की। राज्य के प्रत्येक वार्ड के लिए संभावित प्रत्याशियों के नाम और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए व्यापक रायशुमारी की गई।

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बीजेपी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती पार्षद के टिकटों के लिए उमड़ी दावेदारों की भारी भीड़ बनी हुई है। राज्य की कुल 309 नगर निकायों में पार्षद पद के लिए पार्टी के पास 50 हजार से भी अधिक कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है। इतने बड़े पैमाने पर आवेदनों को छांटने के लिए पार्टी ने चार स्तरीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाई है। इसमें जमीनी स्तर की सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय संगठन का फीडबैक, पार्टी पर्यवेक्षकों की राय और चुनाव समिति का अंतिम मूल्यांकन शामिल है। कई संवेदनशील वार्डों में तीन-तीन संभावित उम्मीदवारों के पैनल तैयार किए गए हैं, ताकि केवल उसी चेहरे पर सहमति बने जिसकी जीत की संभावना सबसे ज्यादा हो।

दिन भर बीजेपी की पहली प्रत्याशी सूची जारी होने को लेकर बाजार में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। विशेष रूप से अजमेर और उदयपुर संभाग के प्रत्याशियों के नाम सबसे पहले घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही थी। इसके साथ ही बीकानेर, भरतपुर और कोटा संभाग के टिकटों पर भी नेताओं के बीच लगातार विचार-विमर्श चलता रहा। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि हर वार्ड को लेकर बहुत बारीकी से चर्चा की जा रही है और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की बात को प्राथमिकता दी जा रही है।

टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के असंतोष की बात को खारिज करते हुए बीजेपी महामंत्री कैलाश मेघवाल ने स्थिति स्पष्ट की। कैलाश मेघवाल ने कहा, "टिकटों को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन पार्टी में टकराव जैसी स्थिति नहीं है।" वहीं वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लखावत ने भी संगठन के रुख का समर्थन करते हुए कहा, "बीजेपी एक बड़ा परिवार है और हर चीज में स्वाभाविक रूप से समय लगता है।" उन्होंने जोर दिया कि पार्टी का मुख्य ध्यान केवल जीतने वाले प्रत्याशियों का चयन करने पर केंद्रित है।

कांग्रेस का सीक्रेट फॉर्मूला: बिना सार्वजनिक सूची के सीधे सिंबल बांटने की रणनीति

दूसरी तरफ, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने निकाय चुनावों में टिकट वितरण के दौरान होने वाली संभावित बगावत से निपटने के लिए एक नया और अनूठा रास्ता चुना है। कांग्रेस इस बार प्रत्याशियों की कोई आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से मीडिया या जनता के सामने जारी नहीं करेगी। इसके बजाय पार्टी मुख्यालय से सीधे जिलों में चुनाव सिंबल भेजे जा रहे हैं। इस रणनीति के तहत संबंधित जिला अध्यक्ष और विधानसभा क्षेत्रों के ऑब्जर्वर सीधे योग्य दावेदारों से संपर्क साधेंगे और उन्हें गुप्त रूप से पार्टी का सिंबल सौंपेंगे।

इस नई कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि जिला स्तर पर ही चयनित उम्मीदवारों को उनके टिकट की जानकारी दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संभावित प्रत्याशियों को फोन करके भी सूचित किया जाएगा। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि नामांकन दाखिल करने के आखिरी समय तक टिकट के अन्य दावेदारों में सस्पेंस बना रहे, जिससे असंतुष्ट नेताओं को बागी होकर पर्चा भरने या पार्टी का विरोध करने का अवसर न मिल सके। कांग्रेस की तैयारी सीधे रिटर्निंग ऑफिसर के सामने सिंबल जमा कराने की भी है।

कांग्रेस के लिए भी दावेदारों की अत्यधिक संख्या एक बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है। कई नगर निकायों में एक-एक पार्षद पद के लिए दर्जनों नेताओं ने अपने आवेदन जमा कराए हैं। ऐसे में सार्वजनिक सूची जारी होने पर टिकट न पाने वाले दावेदारों द्वारा बगावत करने और निर्दलीय मैदान में उतरने का सीधा खतरा मंडरा रहा था। कई निकायों में असंतुष्ट नेताओं ने संकेत दिए थे कि सिंबल न मिलने पर भी वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। इसी संभावित खतरे को टालने के लिए कांग्रेस ने खुली घोषणा के पारंपरिक तरीके को त्यागकर सीधे सिंबल वितरण का रास्ता अख्तियार किया है।

भीलवाड़ा में टिकट वितरण से पहले भड़का असंतोष और महिला नेताओं का विरोध

हालांकि दोनों दल बगावत को दबाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असंतोष की ज्वाला भड़कने लगी है। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में बीजेपी की आधिकारिक सूची सामने आने से पहले ही महिला कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। पार्टी की नीतियों और टिकट वितरण में अनदेखी का आरोप लगाते हुए दर्जनों महिला कार्यकर्ता भीलवाड़ा स्थित बीजेपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी की कई वरिष्ठ और जानी-मानी महिला नेत्रियां कर रही थीं। इनमें पूर्व सभापति मंजू चेचाणी, वर्तमान पार्षद रेखा पुरी, महिला मोर्चा की पूर्व जिला उपाध्यक्ष और पूर्व पार्षद ज्योति आशीर्वाद के साथ-साथ महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष मंजू पालीवाल भी प्रमुख रूप से शामिल थीं। इन नेताओं का आरोप था कि स्थानीय संगठन निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर पसंदीदा चेहरों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब पूर्व सभापति मंजू चेचाणी ने चेतावनी देते हुए आत्मदाह तक करने की बात कह दी। इस घटनाक्रम से पार्टी आलाकमान में हड़कंप मच गया है।

अजमेर में पूर्व मेयर का बगावती कदम: निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी हेमलता गहलोत

भीलवाड़ा के अलावा अजमेर जिले में भी बीजेपी को बड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी के भीतर लंबे समय से जारी अंदरूनी कलह सार्वजनिक रूप से सामने आ गई। बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से हाल ही में इस्तीफा दे चुके पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमलता गहलोत को चुनाव मैदान में उतारने का औपचारिक ऐलान कर दिया। धर्मेन्द्र गहलोत ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी हेमलता गहलोत पार्षद पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगी।

हेमलता गहलोत ने अजमेर के वार्ड संख्या 4 से नामांकन पत्र प्राप्त कर लिया है, जो इस चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किया गया है। धर्मेन्द्र गहलोत का यह कदम स्थानीय बीजेपी संगठन के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वे खुद 2005 और 2015 में बीजेपी के टिकट पर अजमेर के मेयर रह चुके हैं। उनका स्थानीय राजनीति और अपने क्षेत्र के मतदाताओं के बीच गहरा प्रभाव माना जाता है। पूर्व मेयर द्वारा अपनी पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने से बीजेपी के आधिकारिक प्रत्याशी के लिए चुनावी राह बेहद कठिन होने की आशंका जताई जा रही है।

चुनावी मैदान का भावी परिदृश्य और दोनों दलों के सामने खड़ी चुनौतियां

राजस्थान के इस नगरीय निकाय चुनाव में टिकटों का आवंटन ही सबसे केंद्रीय और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। एक तरफ जहां बीजेपी 50 हजार से अधिक आवेदनों में से विभिन्न स्तरों की स्क्रीनिंग के जरिए जिताऊ चेहरों की तलाश में जुटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने बगावत के खतरे को बेअसर करने के लिए सार्वजनिक सूची के बजाय सीधे सिंबल बांटने का साहसिक फैसला लिया है।

दूसरी ओर, भीलवाड़ा और अजमेर जैसे महत्वपूर्ण शहरों से सामने आ रहे विरोध के सुर यह दर्शाते हैं कि दोनों ही दलों के लिए अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में जैसे ही सभी वार्डों के प्रत्याशियों की स्थिति पूरी तरह से साफ होगी, वैसे ही चुनावी मुकाबला और अधिक आक्रामक और दिलचस्प होने की पूरी संभावना है।

सवाल-जवाब

राजस्थान के कितने नगरीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं?
राजस्थान में कुल 309 नगर निकायों में पार्षद पद के लिए चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं।
बीजेपी के पास पार्षद टिकट के लिए कितने आवेदन आए हैं?
बीजेपी के पास 309 निकायों के पार्षद पदों के लिए 50 हजार से भी अधिक कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है।
कांग्रेस निकाय चुनाव में टिकट कैसे वितरित कर रही है?
कांग्रेस कोई सार्वजनिक सूची जारी नहीं करेगी; पार्टी मुख्यालय से सीधे जिलों में सिंबल भेजे जाएंगे और योग्य उम्मीदवारों को व्यक्तिगत रूप से सूचित किया जाएगा।
भीलवाड़ा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने क्यों विरोध प्रदर्शन किया?
भीलवाड़ा में सूची जारी होने से पहले ही महिला कार्यकर्ताओं और पूर्व सभापति मंजू चेचाणी ने टिकट आवंटन में अनदेखी का आरोप लगाते हुए बीजेपी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
अजमेर में पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने क्या फैसला लिया है?
बीजेपी से इस्तीफा देने वाले पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमलता गहलोत को अजमेर के वार्ड 4 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

राजस्थान के इन नगरीय निकाय चुनावों में 309 निकायों के लिए 50 हजार से ज्यादा दावेदारों का होना और कांग्रेस द्वारा बगावत रोकने के लिए सीधे सिंबल बांटने की रणनीति अपनाना यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर टिकट वितरण कितना संवेदनशील हो गया है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारी और शुरुआती असंतोष इस बात का संकेत है कि दोनों ही प्रमुख दलों के लिए बागियों को साधना और भीतरघात रोकना चुनाव परिणाम तय करने में सबसे निर्णायक कारक साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

नगरीय निकाय चुनावों में टिकट वितरण के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और गुप्त रणनीतियाँ अक्सर आंतरिक असंतोष और बगावत को जन्म देती हैं, जो आगे चलकर स्थानीय कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए संवेदनशील साबित हो सकती हैं। जब हजारों दावेदार मैदान में हों और दल गोपनीय तरीकों से सिंबल बांटें, तो प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों को राजनीतिक दफ्तरों के बाहर और संवेदनशील वार्डों में संभावित तनाव से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

राज्य की ३०९ नगर निकायों में ५० हज़ार से अधिक टिकट दावेदारों की भीड़ और कांग्रेस के गुप्त सिंबल वितरण फॉर्मूले से यह स्पष्ट है कि धरातल पर असंतोष व्यापक है। जब इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता टिकट न मिलने से निराश होंगे, तो यह भितरघात चुनावी नतीजों को तो प्रभावित करेगा ही, साथ ही स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था के लिए भी संवेदनशील वार्डों में गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।

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