जर्मनी के म्यूनिख उच्च क्षेत्रीय न्यायालय ने एक शांतिपूर्ण जनसभा को निशाना बनाकर जानलेवा कार हमला करने के दोषी 25 वर्षीय अफगान नागरिक फरहाद एन को उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। 13 फरवरी 2025 की सुबह, आरोपी ने सेंट्रल म्यूनिख में आयोजित एक ट्रेड यूनियन रैली में मौजूद लगभग 1,400 लोगों की भीड़ के बीच जानबूझकर अपनी मिनी कार घुसा दी थी। इस भयानक वारदात में एक 37 वर्षीय महिला और उनकी दो वर्षीय मासूम बेटी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा, इस हिंसक हमले में 40 से अधिक अन्य लोग बुरी तरह घायल हुए थे, जिनमें से कई की हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी।
अदालत का फैसला और पैरोल पर कड़े प्रतिबंध
लंबी कानूनी सुनवाई के बाद, म्यूनिख उच्च क्षेत्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों ने फरहाद एन को हत्या के 2 मामलों और हत्या के प्रयास के 23 मामलों में दोषी करार दिया। इसके साथ ही, अदालत ने आरोपी को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने सहित कई अन्य आपराधिक आरोपों में भी सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को विशेष रूप से गंभीर श्रेणी का माना है। जर्मन कानून के तहत, इस विशिष्ट टिप्पणी का अर्थ यह है कि 15 साल की अनिवार्य जेल काटने के बाद भी आरोपी के लिए पैरोल पर रिहा होना बेहद कठिन हो जाएगा। हालांकि, जर्मन कानून प्रक्रिया के तहत फरहाद एन के पास इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का अधिकार सुरक्षित है।
वैचारिक कट्टरता और अभियोजन पक्ष के तर्क
अदालती कार्यवाही के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों ने आरोपी की कट्टरपंथी सोच और हिंसक इरादों को उजागर किया। मामले की सुनवाई कर रहे जज ने टिप्पणी की कि फरहाद एन का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक देशों के हालात के विरोध में जर्मनी में आम नागरिकों पर हमला करके उनकी हत्या करना था। फैसले के अनुसार, आरोपी एक ऐसा कदम उठाना चाहता था जिसे वह ईश्वर को प्रसन्न करने वाला मानता था और खुद को अल्लाह, अपने परिवार और स्वयं की नजरों में एक सच्चा मुस्लिम साबित करने की कोशिश कर रहा था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी गाजा और अफगानिस्तान में अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर अत्यधिक गुस्से, निराशा और कड़वाहट से भरा हुआ था और उसने इसी मानसिकता के तहत इस भीषण हमले को अंजाम दिया।
बचाव पक्ष की दलीलें और मानसिक स्थिति की जांच
राज्य के अभियोजकों द्वारा मांगी गई अधिकतम सजा के जवाब में, फरहाद एन के वकील ने अदालत से 15 साल की सीमित सजा की मांग की थी। इसके साथ ही बचाव पक्ष ने आरोपी को इलाज के लिए किसी मनोरोग अस्पताल में भेजने का अनुरोध किया था। बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क था कि उनके मुवक्किल में शिजोफ्रेनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग के लक्षण देखे गए हैं, जिसकी वजह से उसकी आपराधिक जिम्मेदारी कम हो जाती है। हालांकि, अदालत ने मानसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट और घटना के पूर्व नियोजित तरीके का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद बचाव पक्ष के दावों को खारिज कर दिया और आरोपी की पूर्ण आपराधिक जिम्मेदारी तय करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
आरोपी का पृष्ठभूमि और शरणार्थी इतिहास
जर्मन अधिकारियों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, फरहाद एन वर्ष 2016 में यूरोप के प्रवासन संकट के दौर में एक अकेला किशोर शरणार्थी बनकर जर्मनी आया था। उसके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। जर्मन अधिकारियों ने उसके शरण आवेदन को खारिज कर दिया था, लेकिन कानूनी कारणों से उसे वापस अफगानिस्तान नहीं भेजा गया। इसके बाद वह कानूनी रूप से जर्मनी में रहता रहा और उसे वर्क परमिट भी प्राप्त हुआ, जिसके तहत उसने शॉप डिटेक्टिव और निजी सिक्योरिटी कंपनियों में काम किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस घटना से पहले उस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। वह इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय था, जहां वह बॉडीबिल्डिंग और धार्मिक विषयों पर सामग्री पोस्ट करता था।
राजनीतिक प्रभाव और प्रवासन पर जारी बहस
म्यूनिख में हुए इस भीषण कार हमले ने जर्मनी में सीमा नियंत्रण और प्रवासन नीति को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। वर्ष 2015 और 2016 के बीच, जर्मनी ने 10 लाख से अधिक शरणार्थियों को अपने देश में आश्रय दिया था, जिसके बाद से देश में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। विदेशी नागरिकों द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाओं ने देश में चरमपंथी और दक्षिणपंथी राजनीति को हवा दी है। इस घटना का इस्तेमाल एएफडी जैसी प्रवासन विरोधी राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपनी बयानबाजी को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। म्यूनिख अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरा देश आंतरिक सुरक्षा, शरणार्थी नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।



















