इंग्लिश चैनल में हुई अब तक की सबसे भयावह नाव दुर्घटना के मामले में फ्रांस की राजधानी पेरिस की एक अदालत में 14 संदिग्ध मानव तस्करों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की सुनवाई शुरू हो गई है। यह मामला नवंबर 2021 में एक खस्ताहाल रबर बोट के डूबने से जुड़ा है, जिसमें 31 प्रवासियों की जान चली गई थी। अभियोजकों ने आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और संगठित गिरोह बनाकर अवैध घुसपैठ कराने के गंभीर आरोप तय किए हैं। इस बीच, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए पीड़ितों के परिजन न्याय की गुहार लगाने के लिए पेरिस पहुंचे हैं।
पेरिस की अदालत में मानव तस्करी गिरोह पर कसने लगा शिकंजा
पेरिस में शुरू हुई अदालती कार्रवाई उन 14 संदिग्धों पर केंद्रित है, जिन पर उत्तरी फ्रांस से ब्रिटेन के तटीय इलाकों में अवैध रूप से लोगों को भेजने वाले एक संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन करने का आरोप है। आरोपी मुख्य रूप से अफगान नागरिक हैं और उनके खिलाफ घातक समुद्री यात्रा आयोजित करने के गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। मुकदमे की शुरुआत के समय 14 में से 12 आरोपी अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जबकि तस्करी गिरोह के दो मुख्य सरगना अब भी फरार हैं और उनके खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में सुनवाई की जा रही है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इन आरोपियों ने एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम किया, जो अवैध प्रवासन के विभिन्न चरणों को संभालता था। उन पर उत्तरी फ्रांस के तटीय क्षेत्रों में प्रवासियों के ठहरने का इंतजाम करने, उन्हें गुप्त स्थानों तक पहुंचाने, घटिया क्वालिटी की रबर बोट और इंजन मुहैया कराने और असहाय प्रवासियों से भारी रकम वसूलने के आरोप हैं। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि इस गिरोह ने वित्तीय लाभ के लिए समुद्री सुरक्षा के बुनियादी नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और प्रवासियों को मौत के मुंह में धकेल दिया।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिकांश वकीलों का कहना है कि उनके मुवक्किल गैर-इरादतन हत्या के दोषी नहीं हैं। सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि इनमें से कई आरोपी खुद शरणार्थी थे जो ब्रिटेन जाने की कोशिश कर रहे थे, और उन्होंने गिरोह के मुख्य आकाओं के दबाव में आकर या किराए में छूट पाने के लिए जमीनी स्तर के काम संभाले थे। बचाव पक्ष का दावा है कि इस तस्करी नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं और देश से दूर छिपे हुए हैं।
पीड़ित परिवारों के वकीलों ने तस्करों की क्रूरता पर उठाए सवाल
पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे कानूनी सलाहकारों ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है। पेरिस पहुंचे कई शोक संतप्त परिवारों की पैरवी कर रहे मानवाधिकार वकील इमैनुएल दाउद ने अदालत के सामने तस्करों की कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि असहाय प्रवासी समुद्री नेविगेशन और हादसों के जोखिम से अनजान होते हैं और वे मजबूरी में तस्करों पर भरोसा करते हैं।
वकीलों ने जोर देकर कहा कि तस्करी गिरोह इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि ठंड के मौसम में एक अत्यधिक भरी हुई, कमजोर नाव को खुले समुद्र में भेजना कितना खतरनाक हो सकता है। वकील इमैनुएल दाउद ने कहा, "तस्कर अच्छी तरह जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं।" कानूनी सलाहकारों ने तर्क दिया कि समुद्र के लायक न होने वाली नाव और अपर्याप्त लाइफ जैकेट के साथ प्रवासियों को भेजकर तस्करों ने जानबूझकर ऐसा जोखिम उठाया, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। तीन हफ्ते तक चलने वाली इस अदालती सुनवाई के पहले दिन कोर्ट रूम में कई पीड़ितों के परिजन मौजूद रहे।
नवंबर 2021 के दर्दनाक हादसे की पूरी कहानी
यह दुखद हादसा 23 नवंबर 2021 की शाम को शुरू हुआ, जब उत्तरी फ्रांस के एक सुनसान समुद्र तट से रबर की एक छोटी नाव ब्रिटेन के तट की ओर रवाना हुई। नाव में 30 से अधिक प्रवासी सवार थे, जो बेहतर जिंदगी की उम्मीद में यात्रा कर रहे थे। जांच रिपोर्टों के मुताबिक, तस्करों द्वारा दी गई यह नाव खुले समुद्र में चलने के बिल्कुल लायक नहीं थी। यह नाव अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भरी हुई थी, इसका इंजन बेहद कमजोर था और इसमें सवार लोगों के लिए लाइफ जैकेट भी नाकाफी और घटिया स्तर की थीं।
रात के अंधेरे में जब नाव इंग्लिश चैनल के बीच पहुंची, तो उसका संतुलन बिगड़ने लगा और रबर के ट्यूबों से हवा निकलने लगी। पानी नाव के भीतर भरने लगा। डूबती नाव का वजन कम करने के लिए उसमें सवार लोग एक-एक करके बर्फीले पानी में उतरने लगे ताकि नाव को डूबने से बचाया जा सके। लेकिन जम देने वाले ठंडे पानी में रहने के कारण लोग जल्द ही हाइपोथर्मिया के शिकार हो गए, बेहोश हुए और डूब गए।
इस हादसे में नाव पर सवार 30 से अधिक लोगों में से केवल दो पुरुष ही जीवित बच सके, जिन्हें कई घंटों बाद बचाया जा सका। राहत और बचाव दल ने समुद्र से 27 शव बरामद किए, जबकि चार लोग लापता घोषित किए गए जिन्हें मृत मान लिया गया है। इस तरह कुल 31 प्रवासियों की मौत हुई। मृतकों में इराकी कुर्द, सोमालिया, इथियोपिया, मिस्र और अफगानिस्तान के नागरिक शामिल थे। मारे गए लोगों में सबसे कम उम्र की सात साल की बच्ची हस्ती रिज़गार हुसैन थी। अन्य नामजद मृतकों में मोहम्मद हुसैन मोहम्मदिए, महाबाद अहमद अली, बिलिंद शाकिर बेकर, शिकार अली पिरोट और ब्र्यार हमद अब्दुलरहमान शामिल हैं।
बचाव अभियान में लापरवाही और जांच रिपोर्ट के खुलासे
इस भीषण हादसे ने इंग्लिश चैनल के दोनों तरफ फ्रांस और ब्रिटेन की आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हादसे के बाद हुई जांच में यह बात सामने आई कि जब नाव डूब रही थी, तब उस पर सवार प्रवासियों ने फ्रांस और ब्रिटेन दोनों देशों की तटरक्षक एजेंसियों को मदद के लिए कई बार फोन किए थे। इसके बावजूद घंटों तक किसी भी देश की ओर से प्रभावी बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा।
फ्रांस में न्यायिक अधिकारियों ने बचाव कार्य से जुड़े सात सैन्यकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें फ्रांस के समुद्री बचाव केंद्र के कर्मचारी और इलाके में तैनात नौसेना के जहाज के क्रू मेंबर शामिल हैं। जांच अधिकारी इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या इन सैन्यकर्मियों पर खतरे में पड़े लोगों की मदद न करने के आरोप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
इसी तरह, ब्रिटेन में हुई आधिकारिक जांच में डोवर स्थित HM Coastguard की संचालन व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हादसे वाली रात कोस्टगार्ड सेंटर में कर्मचारियों की भारी कमी थी, जिससे आपातकालीन कॉल की निगरानी ठीक से नहीं हो सकी। इसके अलावा, खराब मौसम के कारण हवाई निगरानी विमान भी उड़ान नहीं भर सका। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कोस्टगार्ड स्टाफ के बीच यह आम धारणा बन गई थी कि छोटी नावों से आने वाले प्रवासी मदद मांगते समय संकट को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, जिसके कारण अधिकारियों ने समुद्र में जारी इस जानलेवा आपातस्थिति को बेहद हलके में लिया।



















