फ्रांस के प्रमुख बंदरगाह शहर मार्सिले की सड़कों पर सप्ताहांत में भड़की अभूतपूर्व हिंसा और लूटपाट के बाद गहरा सन्नाटा और तनाव पसरा हुआ है। बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक के बीच टूटे हुए शीशे, शटरों पर लगी लकड़ियां और वीरान पड़े बाजार उस भारी तबाही की गवाही दे रहे हैं, जिसने फ्रांस के इस दूसरे सबसे बड़े शहर को हिलाकर रख दिया है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों के अनुसार उपद्रवियों ने 500 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिनमें से अधिकांश दुकानों में बड़े पैमाने पर लूटपाट की गई।
छात्र आंदोलन से भड़की हिंसा और बेकाबू होते हालात
मार्सिले में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सितंबर महीने में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर हुई थी। धीरे-धीरे इस असंतोष में जीवनयापन की बढ़ती लागत और महंगाई जैसे व्यापक आर्थिक मुद्दे भी जुड़ गए। शनिवार को जब स्कूली छात्र और युवा सड़कों पर उतरे, तो शुरुआत में यह एक संगठित मार्च था। हाल ही में ग्रामीण इलाके से पढ़ाई के लिए शहर आईं 18 वर्षीय छात्रा मरियम भी इस प्रदर्शन का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया कि बड़े शहर में उनका पहला प्रदर्शन था और शुरू में माहौल एकजुटता से भरा था, लेकिन जल्द ही यह भयानक अराजकता में बदल गया जब उपद्रवियों ने दुकानों पर हमले शुरू कर दिए।
मरियम ने हिंसा के औचित्य पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि फ्रांस का इतिहास क्रांतियों पर आधारित रहा है और कभी-कभी बड़ा प्रभाव डालने की जरूरत महसूस होती है, लेकिन यह सवाल बेहद जटिल है कि क्या ऐसी हिंसा से सरकार वास्तव में ध्यान देगी। शांतिपूर्ण दिखने वाला यह मार्च कुछ ही घंटों में भीषण उपद्रव में तब्दील हो गया और शहर के विभिन्न हिस्सों में आगजनी तथा लूट की घटनाएं शुरू हो गईं।
प्रमुख बाजारों और शॉपिंग सेंटरों में व्यापक लूटपाट
उपद्रवियों ने शहर के मध्य भाग से लेकर बाहरी रिहायशी इलाकों तक कई प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों को निशाना बनाया। पेरिस के मशहूर शैम्प्स-एलिसीस की तर्ज पर पहचाने जाने वाले ला कानेबिएरे बुलेवार्ड, रुए पैराडिस और प्रसिद्ध सेंटर बोर्स शॉपिंग सेंटर में दुकानों के ताले तोड़कर सामान लूट लिया गया। लूटपाट की यह लहर केवल शहर के केंद्र तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तरी हिस्से में स्थित ग्रैंड लिटोरल और ले मर्लान जैसे बड़े शॉपिंग मॉल में भी दुकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। कई जगहों पर उपद्रवियों ने तोड़फोड़ के बाद आग लगाने की भी कोशिश की।
पुलिस संगठन यूएन1टीई के अर्नौड ब्लेज ने इन हिंसक घटनाओं को युद्ध जैसी स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों ने हिंसा का ऐसा स्तर पहले कभी नहीं देखा था। ब्लेज के अनुसार, फ्रांस में ब्लैक ब्लॉक के नाम से पहचाने जाने वाले धुर-वामपंथी तत्वों ने माहौल को भड़काया, जिसके बाद वंचित उत्तरी उपनगरों के युवाओं ने अराजकता का फायदा उठाकर दुकानों को लूटना शुरू कर दिया। इस दोहरी चुनौती के कारण पुलिस बल चारों तरफ बिखर गया और स्थिति को संभालना बेहद कठिन हो गया।
पुलिस की रणनीति पर सवाल और भारी झड़पें
हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई सीधी झड़पों में 118 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं, जो उस दौरान पूरे फ्रांस में घायल हुए कुल पुलिसकर्मियों की संख्या का दसवां हिस्सा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 4000 आंसू गैस के गोले दागे। अर्नौड ब्लेज ने स्पष्ट किया कि जब सुरक्षा बलों का गोला-बारूद पूरी तरह समाप्त हो गया, तो उनके पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया कि पुलिस केवल शांतिपूर्ण छात्रों पर सख्ती कर रही थी और दुकानदारों की रक्षा करने में नाकाम रही।
मार्सिले में अब तक 101 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से लगभग एक-चौथाई नाबालिग बच्चे हैं। सोमवार को प्रशासन ने शहर में किसी भी तरह के तीसरे दिन के उपद्रव को रोकने के लिए आठ घंटे तक सभी सभाओं और प्रदर्शनों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया। इस रोक के बाद मुख्य सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की जगह भारी पुलिस बल गश्त करता नजर आया और शहर के बंदरगाह क्षेत्र में केवल कुछ परेशान पर्यटक ही घूमते दिखाई दिए।
मेयर का सरकार पर निशाना और गृह मंत्री का दौरा
मार्सिले के सोशलिस्ट मेयर बेनोइट पायन ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी और उसे बहाल करने की कोशिशें पूरी तरह विफल रहीं। पायन ने कहा कि यदि पुलिस की रणनीति में बुनियादी बदलाव नहीं किया गया और केवल हाई स्कूल छात्रों को निशाना बनाया जाता रहा, तो शहर में दोबारा ऐसी लूटपाट देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मार्सिले में अब लूटने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, और जो थोड़ा बहुत रह गया है, उसे भी उपद्रवी निशाना बना लेंगे।
शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए सिटी हॉल पर भी कब्जा कर लिया था। इसी पृष्ठभूमि में फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज सोमवार शाम स्थिति का जायजा लेने मार्सिले पहुंचे। गौरतलब है कि देश भर में भड़की हिंसा के बाद गृह मंत्री ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मैक्रों को सौंपा था, लेकिन राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। मार्सिले पहुंचने पर उन्होंने सिटी हॉल में मेयर पायन से मुलाकात की और सुरक्षा इंतजामात की समीक्षा की।
सामाजिक तनाव और भविष्य की चिंताएं
सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध और मंगलवार से कुछ इलाकों में नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू लागू करने की योजना के बावजूद स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है। क्षतिग्रस्त ट्राम स्टॉप के पास खड़ी 79 वर्षीय बुजुर्ग शांताल बेलांजर ने कहा कि फ्रांस का कई व्यवस्थाओं पर से नियंत्रण खो चुका है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवाएं, अस्पताल और शिक्षा प्रणाली बेहद खस्ताहाल हैं और बाहरी उपनगरों को पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है।
शांताल बेलांजर पहले इन्हीं गरीब उत्तरी उपनगरों में काम कर चुकी हैं, जहां अत्यधिक गरीबी और अपराध दर चिंता का विषय रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि निराशा और गुस्से की वजह से एक पूरी पीढ़ी अपराध के रास्ते पर बढ़ रही है। बच्चों को समाज से पूरी तरह अलग-थलग होते देखना बेहद पीड़ादायक है। भले ही अस्थायी शांति दिखाई दे रही हो, लेकिन आने वाले सप्ताहांत में फिर से बड़े प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थिति के दोबारा बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।



















