फ्रांस भर में व्यापक स्तर पर हुए हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सरकार ने सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। देश के विभिन्न हिस्सों में तीन दिनों तक चले उपद्रव के दौरान पुलिस ने अब तक 2 हजार 400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अकेले रविवार के दिन ही सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए 2 हजार उपद्रवियों को हिरासत में लिया। इस व्यापक अशांति के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा संदेश दिया है कि अराजकता फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और तबाही मचाने वाले हर व्यक्ति को इसके लिए वित्तीय और कानूनी स्तर पर भारी कीमत चुकानी होगी।
हिंसा और लूटपाट पर राष्ट्रपति का कड़ा रुख
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सार्वजनिक संबोधन में अत्यंत गंभीर स्थिति का उल्लेख करते हुए साफ किया कि हिंसा में शामिल तत्वों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि शनिवार 17 अक्तूबर को अति वामपंथी समूहों के प्रदर्शनकारियों और उनके साथ शामिल असमाजिक तत्वों ने मुख्य भूमि फ्रांस और उसके बाहर स्थित क्षेत्रों के कई प्रमुख शहरों में हिंसक उपद्रव मचाया। इस दौरान असामाजिक तत्वों ने संगठित रूप से दुकानों में लूटपाट की, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया और सरकारी इमारतों पर हमले किए।
राष्ट्रपति मैक्रों ने जोर देकर कहा कि देश की न्यायपालिका जनता के विश्वास और कानून की गरिमा को ध्यान में रखकर न्याय करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी कानून का उल्लंघन होगा और अपराध सामने आएगा, उसके विरुद्ध सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएंगे। जिन लोगों ने राष्ट्रीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें जेब से जुर्माना भरकर भरपाई करनी होगी। राष्ट्रपति ने यह भी चेताया कि फ्रांसीसी गणतंत्र की नींव को हिलाने या व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश करने वालों को देश की अदालतों में जवाबदेह ठहराया जाएगा।
दंगाइयों से नुकसान की वसूली का नया नियम
फ्रांस में व्यवस्था बहाल करने के लिए संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली दंगाइयों से करने की नीति अपनाई जा रही है। यह तरीका भारत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लागू किए गए उपद्रवियों से क्षतिपूर्ति वसूलने के कड़े मॉडल की तर्ज पर देखा जा रहा है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आगजनी और तोड़फोड़ में नष्ट हुई सरकारी इमारतों, सड़कों और निजी व्यापारिक प्रतिष्ठानों की मरम्मत का खर्च करदाताओं की जेब से नहीं बल्कि पहचान किए गए आरोपियों से ही वसूला जाएगा। इसके लिए वीडियो फुटेज और तकनीकी निगरानी के जरिए एक-एक आरोपी की पहचान की जा रही है।
ऐतिहासिक लिमोगेस सिटी हॉल को आग के हवाले किया
हिंसा के दौरान दंगाइयों ने फ्रांस की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। पेरिस के लिमोगेस में मौजूद 19वीं सदी का ऐतिहासिक सिटी हॉल उपद्रवियों की आगजनी की भेंट चढ़ गया। यह इमारत 143 साल पुरानी थी और इसने इतिहास के दो बड़े विश्व युद्धों को देखा था तथा दोनों युद्धों के संकट को सफलतापूर्वक झेला था। प्रदर्शनकारियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर में आग लगाकर इसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसे देश की सांस्कृतिक विरासत पर एक गहरा आघात माना जा रहा है।
लाखों प्रदर्शनकारी और 148 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार फ्रांस भर में आयोजित इन विरोध प्रदर्शनों में लगभग 5 लाख 50 हजार लोगों ने भागीदारी की थी। कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 8 लाख प्रदर्शनकारियों तक पहुंच सकती है। यह विशाल आंदोलन मजदूर संघों, विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त आह्वान पर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने देश भर में 148 अलग-अलग स्थानों पर रैलियां निकालीं और धरने दिए।
हालांकि शांतिपूर्ण विरोध के आह्वान के बावजूद कई जगहों पर आंदोलन पूरी तरह बेकाबू हो गया। नकाबपोश दंगाइयों ने सड़कों पर खड़ी पुलिस गाड़ियों पर हमले किए और उन्हें खदेड़ दिया। राजधानी पेरिस से लेकर छोटे शहरों तक बची हुई दुकानों में खुली लूटपाट की गई। सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ने के बाद अब पुलिस और प्रशासन पूरे देश में सामान्य स्थिति बहाल करने और दोषियों पर कठोर कानूनी शिकंजा कसने में जुटा हुआ है।




















