पारंपरिक भारतीय रसोई में चुकंदर को अमूमन सलाद, ताजे रस या सूखी सब्जियों तक ही सीमित रखा जाता है, लेकिन इसकी उपयोगिता मीठे व्यंजनों में भी बेहद खास हो सकती है। गाजीपुर स्थित राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की छात्राओं ने इसी सोच को हकीकत में बदलते हुए चुकंदर की शानदार बर्फी तैयार की है। यह अनूठी पहल न्यूट्रीफिट फिस्टा 2026 के अवसर पर सामने आई, जहां छात्राओं ने सामान्य आहार को पौष्टिक और आकर्षक अंदाज में पेश करने का सफल हुनर दिखाया।
पोषण अभियान के मंच पर दिखा छात्राओं का पाक कौशल
यह पूरा आयोजन राष्ट्रीय पोषण माह और सेवा संकल्प अभियान की रूपरेखा के अंतर्गत संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को दैनिक खानपान में उपलब्ध सब्जियों के रचनात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करना था। गृह विज्ञान संकाय की होनहार छात्रा प्रिया पांडे और नाजिया बानो ने अपनी पाक कला और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय करते हुए चुकंदर की बर्फी की संकल्पना पेश की। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि खानपान में थोड़ी सूझबूझ जोड़ दी जाए तो सेहत से भरपूर चीजों को भी बच्चों और बड़ों की पसंदीदा मिठाई में ढाला जा सकता है।
तैयार करने की चरणबद्ध विधि और समय
प्रिया पांडे ने इस व्यंजन को पकाने की विस्तृत तकनीक साझा करते हुए स्पष्ट किया कि इसे बनाने की शुरुआत चुकंदर की सफाई से होती है। ताजे चुकंदर को पानी से अच्छी तरह धोकर छील लिया जाता है, ताकि किसी तरह की मिट्टी या अशुद्धि न रहे। इसके बाद चुकंदर को कद्दूकस करके दूध के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। दूध के साथ पकने से चुकंदर पूरी तरह गल जाता है और एक एकसार मिश्रण में तब्दील होने लगता है।
जब चुकंदर पककर नरम हो जाता है और बर्तन में दूध का गीलापन सूखने लगता है, तब इसमें मिल्क पाउडर मिलाया जाता है। मिश्रण में लगातार करछुल चलाना जरूरी होता है ताकि तली में गांठें न बनें और मिश्रण तेजी से गाढ़ा हो सके। गाढ़ापन आने पर इसमें मनमोहक महक और बढ़िया स्वाद के लिए पिसी हुई हरी इलायची का पाउडर डाला जाता है। इस पूरे गाढ़े मिश्रण को हल्का ठंडा करके पहले से घी लगी ट्रे में समतल फैलाया जाता है। ऊपर से बारीक कटे काजू, बादाम और अन्य सूखे मेवे बिखरते हुए हल्के हाथों से दबा दिए जाते हैं। जब यह पूरी तरह जमकर सेट हो जाता है, तब इसे बर्फी के टुकड़ों में काट लिया जाता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में लगभग 1 से 2 घंटे का समय लगता है।
घरेलू रसोई के लिए आवश्यक सामग्री और अनुपात
यदि कोई व्यक्ति अपने घर पर यह पौष्टिक मिठाई बनाना चाहता है, तो उसे सटीक अनुपात का ध्यान रखना होगा। इसके लिए 500 ग्राम ताजा चुकंदर, लगभग 500 मिलीलीटर दूध और 150 से 200 ग्राम मिल्क पाउडर की जरूरत होती है। मिठास बढ़ाने के लिए स्वादानुसार चीनी या अन्य प्राकृतिक मीठा लिया जा सकता है। इसके अलावा आधा चम्मच इलायची पाउडर और ऊपर से सजावट के लिए करीब 50 से 75 ग्राम मिश्रित मेवे पर्याप्त होते हैं। धीमी आंच पर पकाने और लगातार चलाने से यह मिठाई बिना किसी कृत्रिम रंग के गहरा लाल गुलाबी रूप ले लेती है।
चुकंदर के पोषण तत्व और चिकित्सीय महत्व
महिला डिग्री कॉलेज की गृह विज्ञान विशेषज्ञ नेहा मौर्य ने इस पहल की सराहना करते हुए चुकंदर के पोषक तत्वों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि जमीन के नीचे उगने वाली यह कंदमूल सब्जी शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का खजाना है। यदि 100 ग्राम कच्चे चुकंदर के पोषण की गणना की जाए, तो उसमें लगभग 43 कैलोरी ऊर्जा, 1.6 ग्राम प्रोटीन और 9.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है।
इसके साथ ही पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने वाला 2.8 ग्राम फाइबर और रक्त निर्माण में सहायक 0.8 मिलीग्राम आयरन भी इसमें पाया जाता है। चुकंदर में पोटैशियम और फोलेट की भी प्रचुर मात्रा होती है, जो हृदय और मांसपेशियों के कामकाज को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। इस तरह के नवाचार दर्शाते हैं कि कृत्रिम रंगों वाली बाजारू मिठाइयों की तुलना में ऐसी प्राकृतिक मिठाइयां सेहत के लिए कहीं अधिक सुरक्षित और गुणकारी साबित होती हैं।



















